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हिमाचल-उत्तराखंड सीमा पर भारी तनाव, निहंग सिखों ने तोड़े पुलिस बैरिकेड; हेमकुंड साहिब की ओर बढ़े

हेमकुंड साहिब की ओर बढ़ रहे निहंग सिखों के एक समूह ने देहरादून के कुलहाल बॉर्डर पर पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए, जिससे हिमाचल-उत्तराखंड सीमा पर तनाव बढ़ गया.

हिमाचल-उत्तराखंड सीमा पर भारी तनाव, निहंग सिखों ने तोड़े पुलिस बैरिकेड; हेमकुंड साहिब की ओर बढ़े
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( Image Source:  X: @NaughtyHimachal )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय6 Mins Read

Published on: 26 Jun 2026 8:29 AM

गुरुवार की शाम हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर अचानक उस समय स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई, जब निहंग सिखों के एक बड़े समूह ने देहरादून जिले की कुलहाल पुलिस चौकी पर लगे बैरिकेड्स को जबरन तोड़ दिया. पुलिस की कड़ी सुरक्षा और भारी घेराबंदी को दरकिनार करते हुए यह समूह आगे बढ़ गया और प्रसिद्ध तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब की ओर मार्च करने लगा. दरअसल, यह पूरा मामला उत्तराखंड के कर्णप्रयाग और नागरासु गुरुद्वारों में चल रहे एक पुराने विवाद से जुड़ा हुआ है.

हाल ही में निहंग समूहों ने इस विवाद के विरोध में उत्तराखंड की ओर कूच करने का खुला ऐलान किया था. इस घोषणा के बाद उत्तराखंड प्रशासन तुरंत अलर्ट मोड पर आ गया था. कानून-व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए प्रशासन ने कुलहाल बॉर्डर पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया था. खुद जिला मजिस्ट्रेट आशीष चौहान और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रमेंद्र डोभाल मौके पर मौजूद रहकर सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाल रहे थे. बॉर्डर पर आने-जाने वाले सभी वाहनों की सघन चेकिंग की जा रही थी.

बातचीत रही बेअसर, बैरिकेड तोड़ आगे बढ़ा जत्था

यह निहंग जत्था पंजाब के मोहाली में स्थित 'गुरुद्वारा सिंह शहीदान' से रवाना हुआ था. जैसे ही वे हिमाचल-उत्तराखंड सीमा पर पहुंचे, उत्तराखंड पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया. इसके बाद माहौल को शांत करने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने कुलहाल बैरियर और पास के पांवटा साहिब गुरुद्वारे में निहंग समूह के नेताओं के साथ कई दौर की बातचीत की. अधिकारियों की कोशिश थी कि मामला बातचीत से सुलझ जाए. हालांकि, यह कोशिश पूरी तरह कामयाब नहीं हो सकी. बातचीत के बीच ही प्रदर्शनकारियों के एक गुट ने आपा खो दिया और पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स को तोड़ते हुए आगे निकल गए. पुलिस अधीक्षक पंकज गैरोला ने कहा, 'हम हर हाल में कानून और व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रण में रखने की कोशिश कर रहे हैं.'

पुलिस का क्या कहना है?

मामले की गंभीरता को देखते हुए देहरादून के एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल ने स्थिति को स्पष्ट किया. उन्होंने बताया, 'देहरादून पुलिस गुरुवार सुबह से ही कुलहाल बैरियर पर पूरी तरह मुस्तैद थी. शाम लगभग 5:00 बजे, जीरकपुर की तरफ से कुछ निहंग सिख वहां पहुंचे. पांवटा साहिब गुरुद्वारे और बैरियर पर उनसे काफी देर तक बातचीत की गई. पुलिस की बात मानकर कुछ लोग वहीं रुक गए, लेकिन 15 से 20 लोगों के एक छोटे समूह ने दूसरे बैरियर को तोड़ने की कोशिश की. एसएसपी डोभाल ने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा, 'ऐसी किसी भी गैर-कानूनी हरकत से अत्यंत सख्ती से निपटा जाएगा. हालांकि, कुछ लोगों के वापस लौटने की भी चर्चा है. पुलिस की कोशिश यही है कि कम से कम बल का प्रयोग करके इस मामले को शांतिपूर्वक सुलझा लिया जाए.'

क्या है 16 जून की घटना?

इस मौजूदा तनाव की जड़ें 16 जून को कर्णप्रयाग में हुई एक हिंसक घटना से जुड़ी हैं. उस दिन स्थानीय निवासियों और निहंग सिखों के एक अन्य समूह के बीच किसी बात को लेकर तीखी बहस हो गई थी, जो बाद में हिंसा में बदल गई. आरोप है कि विवाद के दौरान निहंगों ने तलवारें लहराईं, जिसमें कुछ स्थानीय लोग और एक निहंग सिख घायल हो गए थे. इस मामले में कार्रवाई करते हुए उत्तराखंड पुलिस ने चार निहंगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था.

निहंग समूह की मांग और उनका पक्ष

वर्तमान में प्रदर्शन कर रहे निहंगों का कहना है कि जब तक पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए उनके चारों साथियों को रिहा नहीं किया जाता, वे पंजाब वापस नहीं लौटेंगे. समूह के एक प्रवक्ता ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "हम किसी तरह का टकराव नहीं चाहते. हम केवल प्रार्थना करते हुए शांतिपूर्वक अपनी तीर्थयात्रा पूरी करना चाहते हैं. हमारा मकसद स्थानीय लोगों के साथ चल रहे इस विवाद को लड़ाई-झगड़े के बजाय आपसी समझौते और बातचीत से सुलझाना है.' उन्होंने आगे बताया कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया है कि हिरासत में लिए गए निहंगों की जमानत प्रक्रिया को कुछ ही दिनों में पूरा कर लिया जाएगा. फिलहाल, इस समूह ने साफ कर दिया है कि जब तक उनके साथी जेल से बाहर नहीं आते, वे उत्तराखंड में ही डेरा डाले रहेंगे और उन्हें साथ लेकर ही पंजाब वापस जाएंगे.

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