अल हबीबी! शेख बनकर हर की पैड़ी पर घूम रहे थे दो युवक, पकड़े जाने के बाद सामने आई सच्चाई; Video Viral
उत्तराखंड के हरिद्वार में हर की पौड़ी पर अरबी शेख की वेशभूषा में घूम रहे दो युवकों का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की. खुद को दुबई से आया मुस्लिम बताने वाले युवक दरअसल नवीन और प्रिंस निकले, जो यूट्यूब के लिए कंटेंट बना रहे थे. स्थानीय लोगों के विरोध और सूचना के बाद पुलिस ने CCTV की मदद से दोनों को हिरासत में लिया. पूछताछ में युवकों ने व्यूज और लाइक के लिए ऐसा करने की बात स्वीकार की और माफी मांगी.
हरिद्वार के हर की पौड़ी क्षेत्र में उस वक्त हंगामा मच गया, जब दो युवक अरबी शेख की वेशभूषा में गंगा घाटों पर घूमते नजर आए. खुद को दुबई से आए मुस्लिम बताने वाले ये युवक लगातार मोबाइल से वीडियो शूट कर रहे थे. श्रद्धालुओं और स्थानीय पंडितों को यह हरकत आपत्तिजनक लगी, क्योंकि हर की पौड़ी केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि गहरी धार्मिक आस्था का केंद्र है. वीडियो वायरल होने के बाद मामला और संवेदनशील हो गया. आखिरकार पुलिस को दखल देना पड़ा.
मंगलवार को जब दोनों युवक अरबी लिबास में घाटों पर घूमते दिखे, तो लोगों ने उन्हें ऐसा न करने की सलाह दी. स्थानीय लोगों का कहना था कि धार्मिक स्थल पर इस तरह की वेशभूषा और वीडियो बनाना भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है. युवकों ने पलटकर कहा कि वे भारत में कहीं भी घूम सकते हैं और किसी से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है. विरोध बढ़ने पर दोनों ने पास जाकर कपड़े बदले और वहां से निकल गए, लेकिन तब तक मामला गंभीर हो चुका था.
पुलिस की त्वरित कार्रवाई, CCTV से हुई पहचान
घटना की सूचना मिलते ही हरिद्वार पुलिस हरकत में आई. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर कोतवाली नगर पुलिस ने तुरंत एक टीम गठित की. सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय इनपुट के आधार पर दोनों युवकों की पहचान और लोकेशन ट्रेस की गई. कुछ ही घंटों में पुलिस ने रावली महदूद, सिडकुल क्षेत्र से दोनों को हिरासत में ले लिया.
शेख नहीं, हरिद्वार के युवक निकले नवीन और प्रिंस
पुलिस पूछताछ में दोनों युवकों की असल पहचान सामने आ गई. एक का नाम नवीन कुमार (22) और दूसरे का नाम प्रिंस (22) बताया गया. दोनों उत्तराखंड और आसपास के क्षेत्र के रहने वाले निकले और किसी भी तरह से विदेश या दुबई से उनका कोई संबंध नहीं था. पुलिस के सामने उनकी बनाई हुई ‘शेख’ की कहानी कुछ ही मिनटों में ढह गई.
यूट्यूब के व्यूज के लिए रची गई थी पूरी स्क्रिप्ट
पूछताछ में युवकों ने कबूल किया कि वे एक यूट्यूब चैनल चलाते हैं. अधिक व्यूज, लाइक और कमेंट पाने के लिए वे अलग-अलग वेशभूषा में वीडियो बनाते रहे हैं. उन्होंने बताया कि इससे पहले पेंटागन मॉल और शिवालिक नगर में भी इसी तरह के वीडियो बनाए थे, जिन्हें सोशल मीडिया पर अच्छा रिस्पॉन्स मिला था. हर की पौड़ी पर वीडियो बनाना भी उसी प्रयोग का हिस्सा था.
माफी और चेतावनी
पुलिस कार्रवाई के बाद दोनों युवक माफी मांगते नजर आए. उन्होंने कहा कि उनका किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का इरादा नहीं था और वे सिर्फ सोशल मीडिया के लिए ऐसा कर रहे थे. पुलिस ने उन्हें सख्त चेतावनी देते हुए भविष्य में इस तरह की हरकत न करने को कहा. यह मामला एक बार फिर यह सवाल छोड़ गया कि क्या वायरल होने की चाह में आस्था और मर्यादा की सीमाएं लांघना सही है?





