Char Dham Yatra 2026: 6500 पुलिसकर्मी तैनात, CCTV और NPR कैमरों से होगी निगरानी, भीड़ नियंत्रण के खास इंतजाम
चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले उत्तराखंड प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा प्लान तैयार किया है. इस बार 6500 पुलिसकर्मी तैनात होंगे और पूरे मार्ग पर CCTV व NPR कैमरों से निगरानी रखी जाएगी.
Char Dham Yatra 2026: चारधाम यात्रा शुरू होने में अब 50 दिन से भी कम समय बचा है. यानी अप्रैल महीने में यह पवित्र यात्रा शुरू हो जाएगी. उत्तराखंड सरकार और प्रशासन इस बार भी श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को लेकर पूरी तैयारी में जुटे हुए हैं. सभी विभाग मिलकर काम कर रहे हैं ताकि यात्रा सुचारू रूप से चल सके और किसी को भी कोई परेशानी न हो. यात्रा के पूरे मार्ग पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं.
इस बार 6500 पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे. पूरे रास्ते को 10-10 किलोमीटर के छोटे-छोटे सेक्टरों में बांट दिया गया है, ताकि हर हिस्से पर नजर रखना आसान हो. गढ़वाल के कमिश्नर विनय शंकर पांडे और आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप ने खुद यात्रा मार्ग का दौरा किया है. उन्होंने वहां की व्यवस्थाओं को अच्छे से जांचा-परखा है और उसी के आधार पर आगे की प्लानिंग की जा रही है.
विभाग को सख्त निर्देश
आईजी राजीव स्वरूप ने बताया कि अप्रैल से शुरू होने वाली इस यात्रा की तैयारियां पहले से ही तेजी से चल रही हैं. गढ़वाल कमिश्नर की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक भी हो चुकी है, जिसमें सभी विभागों की जिम्मेदारियां साफ-साफ तय कर दी गई हैं. 31 मार्च तक सारी व्यवस्थाएं पूरी करने की डेडलाइन रखी गई है, इसलिए हर विभाग को इसी समय के अंदर काम पूरा करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं.
सीसीटीवी, एनपीआर कैमरे और स्मार्ट सुरक्षा
पुलिस ने चप्पे-चप्पे पर सख्त निगरानी रखने की योजना बनाई है. पिछले सालों के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए हर छोटी-बड़ी बात पर काम किया जा रहा है. सभी धामों में सीसीटीवी कैमरे और एनपीआर (नंबर प्लेट रीडिंग) कैमरे लगाए जा चुके हैं. इनसे भीड़ का सही अंदाजा लगेगा और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत बनी रहेगी.
भीड़ को नियंत्रित करने का खास प्लान
इस बार बहुत बड़ी संख्या में श्रद्धालु आने की उम्मीद है इसलिए भीड़ को संभालने के लिए अलग से एक अच्छी कार्ययोजना तैयार की जा रही है. हर जिले में अलग-अलग भीड़ नियंत्रण का प्लान होगा, जिस पर जिला पुलिस काम कर रही है. अगर पहाड़ों में भीड़ बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, तो बाहर से आने वाले यात्रियों को हरिद्वार, देहरादून और ऋषिकेश जैसे मैदानी इलाकों में रोका जाएगा. वहां उनके रुकने, खाने-पीने और आराम करने की पूरी व्यवस्था रहेगी. भीड़ ज्यादा होने पर यात्रा को रोकने या रूट बदलने की भी योजना है. इसके लिए एक एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) तैयार किया गया है. धामों की क्षमता का वैज्ञानिक अध्ययन किया गया है, उसी के हिसाब से रजिस्ट्रेशन और यात्रा का संचालन होगा.
भूस्खलन वाले इलाकों में खास ध्यान
पुलिस ने यात्रा मार्ग पर आने वाले सभी भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की लिस्ट तैयार कर ली है. पिछले साल 58 ऐसे स्थान चिह्नित थे, और अब कुछ नए क्षेत्र भी जोड़ दिए गए हैं जो अब खतरनाक हो गए हैं. इन सभी जगहों पर पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे. साथ ही जेसीबी मशीनें भी मौके पर खड़ी रहेंगी ताकि कोई रास्ता बंद हो तो तुरंत साफ किया जा सके. पीडब्ल्यूडी, एनएच और बीआरओ जैसे विभागों को इन जगहों की लगातार निगरानी करने की जिम्मेदारी दी गई है.
कुछ खास और उपयोगी सुविधाएं
- प्रमुख जगहों पर क्यूआर कोड लगाए जाएंगे. यात्री अपने मोबाइल से स्कैन करके उस जगह की पूरी जानकारी तुरंत पा सकेंगे.
- ट्रैफिक जाम, खराब मौसम या कोई आपात स्थिति होने पर यात्रियों के मोबाइल पर अलर्ट मैसेज भेजे जाएंगे.
- पिछले साल की तरह इस बार भी पंजीकरण करवाने वाले श्रद्धालुओं को उनके मोबाइल नंबर पर रूट डायवर्जन, मौसम की जानकारी और जरूरी अपडेट भेजे जाएंगे.
- इससे वे अपनी यात्रा पहले से प्लान कर सकेंगे. पर्यटकों के वाहनों के लिए ग्रीन कार्ड अनिवार्य होगा.




