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75 रुपये में AI की पढ़ाई! नैनीताल में खुली उत्तराखंड की पहली AI लैब, पहाड़ के बच्चों के लिए डिजिटल क्रांति

नैनीताल में 75 रुपये महीना फीस पर पहली AI लैब शुरू हुई है, जहां बच्चों को मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स और कोडिंग सिखाई जाएगी। यह पहल पहाड़ के युवाओं को डिजिटल भविष्य और बेहतर करियर के लिए तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम है.

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( Image Source:  Create By AI )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय

Published on: 15 Feb 2026 3:09 PM

डिजिटल दौर में पहाड़ी इलाकों के युवाओं को नई-नई तकनीक से जोड़ने के लिए उत्तराखंड के नैनीताल शहर से एक बहुत ही अच्छी और प्रेरणादायक शुरुआत हुई है. यहां सरोवर नगरी कहे जाने वाले नैनीताल में पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) लैब शुरू की गई है. इस लैब की सबसे खास बात यह है कि यहां छात्र-छात्राएं और आम लोग बहुत ही कम फीस में आधुनिक तकनीक सीख सकते हैं.

महज 75 रुपये प्रति महीना शुल्क रखा गया है, जिससे कोई भी बच्चा या युवा आसानी से इस लैब से जुड़ सकता है और महंगी शिक्षा के बिना ही नई टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग ले सकता है. यह AI लैब अभी सेंट मैरी कॉन्वेंट स्कूल में शुरू की गई है. यहां बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं दिया जाता, बल्कि पूरी तरह प्रैक्टिकल तरीके से पढ़ाई होती है यानी बच्चे हाथों-हाथ काम करके सीखते हैं. ट्रेनिंग में बेसिक कंप्यूटर की जानकारी से लेकर काफी एडवांस्ड चीजें शामिल हैं, जैसे:

  • मशीन लर्निंग (मशीनों को खुद सीखने की कला)
  • रोबोटिक्स (रोबोट बनाना और चलाना)
  • कोडिंग (प्रोग्रामिंग भाषा सीखना)
  • चैटबॉट बनाना (जैसे चैट GPT जैसी बात करने वाली मशीनें)
  • डिजिटल कंटेंट क्रिएशन (वीडियो, ग्राफिक्स आदि बनाना)
  • प्रोजेक्ट डेवलपमेंट (असली प्रोजेक्ट्स पर काम करना)

ट्रेनर बच्चे को रियल प्रोजेक्ट्स पर काम करवाते हैं, ताकि वे भविष्य में टेक्नोलॉजी की दुनिया में अच्छे से तैयार हो सकें और अच्छी नौकरी या अपना काम शुरू कर सकें.

क्या AI लाएगा बड़ा बदल?

स्कूल की प्रिंसिपल सिस्टर मंजूषा ने बताया कि यह लैब बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को देखते हुए शुरू की गई है. आज की दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है और AI ही आने वाले समय का सबसे बड़ा हिस्सा बनेगा. अगर बच्चों को छोटी उम्र से ही AI और नई तकनीक से परिचित करा दिया जाए, तो वे बड़े होकर बहुत अच्छे मौके पा सकेंगे. कई लोग सोचते हैं कि AI आने से इंसानों का काम खत्म हो जाएगा या 'ह्यूमन टच' कम हो जाएंगी, लेकिन सिस्टर मंजूषा कहती हैं कि ऐसा बिल्कुल नहीं है. बल्कि AI इंसान की क्षमताओं को और मजबूत बनाता है, उसे और स्मार्ट बनाता है.इस लैब में अभी कक्षा 4 से कक्षा 9 तक के बच्चों को शामिल किया जा रहा है.

इस पहल पर क्या कहा प्रिंसिपल ने?

प्रिंसिपल का सपना था कि उनके स्कूल में ऐसी AI लैब बने, और अब वह सपना सच हो गया है. बच्चों में इस लैब को लेकर खूब जोश और उत्साह दिख रहा है. कक्षा 9 की छात्रा दीपिका उप्रेती ने कहा कि पहले वो AI के बारे में सिर्फ किताबों में पढ़ती थीं, लेकिन अब असली मशीनें और इक्विपमेंट देखकर, हाथ लगाकर सीखने का मौका मिल रहा है, जो बहुत मजेदार लग रहा है. दूसरी छात्रा आराध्या कुमार ने बताया कि इतनी छोटी उम्र में प्रोग्रामिंग और टेक्नोलॉजी सीख पाना उनके लिए बहुत बड़ी बात है. वे पूरे मन से इसे सीखना चाहती हैं और भविष्य में इससे बहुत कुछ हासिल करना चाहती हैं.

क्या है डी’रोबोजोन इनोवेटिव सेंट?

इस लैब में बच्चे रोबोट बनाने से लेकर कई और रोचक चीजें सीखेंगे. यह पूरी पहल डी’रोबोजोन इनोवेटिव सेंटर (D’RoboZone Innovative Centre) ने शुरू की है. सेंटर के डायरेक्टर अमित कुमार ने बताया कि यहां बच्चों को सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, रोबोट बनाना, 3डी प्रिंटिंग, ड्रोन डिजाइनिंग, प्रोग्रामिंग जैसी बहुत आधुनिक तकनीकों की ट्रेनिंग दी जाएगी. ट्रेनर सोमवार से शनिवार तक स्कूल में नियमित रूप से आकर बच्चों को पढ़ाएंगे. साथ ही बच्चों को इंजीनियरिंग, मेडिकल जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं और टेक्निकल करियर के लिए भी अच्छी गाइडेंस दी जाएगी. अमित कुमार का कहना है कि आजकल हर क्षेत्र में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है- चाहे होटल-हॉस्पिटैलिटी हो, कार-ऑटोमोबाइल हो, शिक्षा हो या कोई भी इंडस्ट्री. बाजार में AI एक्सपर्ट्स की बहुत डिमांड है, लेकिन अभी ट्रेंड युवा कम हैं. अगर स्कूल के स्तर से ही बच्चों को AI और टेक्नोलॉजी सिखाई जाए, तो कॉलेज पहुंचते-पहुंचते वे पूरी तरह स्किल्ड हो जाएंगे और अच्छी जॉब या अपना स्टार्टअप आसानी से शुरू कर सकेंगे.

कैसे करें आवेदन?

वे आगे की योजना भी बता रहे हैं कि यह पहल सिर्फ नैनीताल तक सीमित नहीं रहेगी. उनका प्रयास है कि उत्तराखंड के दूसरे सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में भी ऐसी AI लैब लगाई जाएं, ताकि पहाड़ के हर बच्चे तक डिजिटल शिक्षा पहुंच सके. अगर कोई बच्चा घर बैठे सीखना चाहे, तो उनकी वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकता है. वे ऑनलाइन क्लासेस भी देते हैं, किताबें और मटेरियल कोरियर से घर भेजते हैं. मोबाइल ऐप के जरिए भी बच्चे प्रोजेक्ट बना सकते हैं, AI, 3डी प्रिंटिंग जैसी चीजें सीख सकते हैं. पहाड़ी इलाकों में तकनीकी शिक्षा तक पहुंच बहुत कम है, इसलिए यह पहल बहुत खास है. कम फीस, हाथों-हाथ ट्रेनिंग और भविष्य के लिए उपयोगी कोर्स के साथ शुरू हुई यह AI लैब पहाड़ के बच्चों को डिजिटल दुनिया से जोड़ने का एक बड़ा और मजबूत कदम है. इससे न सिर्फ शिक्षा में बदलाव आएगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए नए रोजगार, स्टार्टअप और बेहतर करियर के रास्ते भी खुलेंगे. यह एक ऐसी शुरुआत है जो दिखाती है कि सही दिशा में छोटे प्रयास से भी बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं.

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