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मौत से पहले 'फरसा वाले बाबा' ने क्यों रोका था कंटेंटर, गाय-बैल नहीं तो क्या था उसमें? मथुरा पुलिस ने बताया सच

मथुरा के कोसीकलां में ‘फरसा वाले बाबा’ की मौत को लेकर पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है. जांच में सामने आया कि यह मामला हत्या नहीं बल्कि घने कोहरे में हुआ सड़क हादसा है.

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( Image Source:  X: @SouleFacts )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय5 Mins Read

Published on: 22 March 2026 10:14 AM

मथुरा के कोसीकलां इलाके में प्रसिद्ध गौरक्षक संत चंद्रशेखर, जिन्हें लोग प्यार से 'फरसा वाले बाबा' कहते थे, की मौत का मामला काफी चर्चा में रहा. सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाहें फैल रही थीं कि यह गौ-तस्करी से जुड़ी हत्या है. लेकिन मथुरा पुलिस ने अब पूरी तरह साफ-साफ अपना आधिकारिक बयान जारी कर दिया है. पुलिस ने स्पष्ट कहा है कि यह कोई हत्या या गौ-तस्करी का मामला नहीं है, बल्कि एक दुर्भाग्यपूर्ण सड़क दुर्घटना हुई है.

जांच में जो बातें सामने आई हैं. पुलिस का कहना है, 'घटना घने कोहरे की वजह से हुई. सुबह के समय विजिबिलिटी बहुत कम थी, जिससे देखना मुश्किल हो रहा था. बाबा चंद्रशेखर ने एक कंटेनर ट्रक को संदिग्ध समझकर रोका था, क्योंकि उन्हें लगा कि शायद उसमें गाय-बैल हो सकते हैं. लेकिन जांच में पता चला कि उस कंटेनर में कोई गाय-बैल नहीं थे. बल्कि किराने का सामान लदा हुआ था, जैसे साबुन, फिनाइल, शैंपू आदि. ठीक उसी समय पीछे से एक और ट्रक आया, जिसमें तार लदे हुए थे. कोहरे की वजह से ड्राइवर को सामने की गाड़ी और बाबा दिखाई नहीं दिए, और उस ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी. इस टक्कर से बाबा गंभीर रूप से घायल हो गए और मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई.

झूठी अफवाहें न फैलाएं

पुलिस ने इस पूरे मामले में दुर्घटना का मुकदमा थाना कोसीकलां में दर्ज कर लिया है. ट्रक ड्राइवर और संबंधित वाहनों की जांच भी की जा रही है. पुलिस ने लोगों से बहुत विनम्रता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर बिना वजह अफवाहें न फैलाएं. फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम या किसी भी प्लेटफॉर्म पर गौ-तस्करी या हत्या वाली खबरें पूरी तरह झूठी और भ्रामक हैं. ऐसे मैसेज या पोस्ट शेयर करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन ने साफ कहा है कि माहौल खराब करने की कोशिश करने वालों पर उनकी नजर बनी हुई है, और जरूरत पड़ने पर तुरंत एक्शन लिया जाएगा. यह घटना बहुत दुखद है, और बाबा चंद्रशेखर की कमी ब्रज क्षेत्र में सभी को महसूस हो रही है. लेकिन सच को जानना और अफवाहों से बचना बहुत जरूरी है, ताकि कोई अनावश्यक तनाव या हिंसा न फैले. शांति बनाए रखें और सिर्फ सत्यापित जानकारी पर भरोसा करें.

क्या फैलाई गई थी अफवाहें?

हादसे के बाद कुछ असामाजिक और बाहरी तत्वों ने मौके पर और सोशल मीडिया पर तेजी से अफवाहें फैला दीं. उन्होंने यह झूठी बात फैलाई कि बाबा चंद्रशेखर उर्फ़ फरसा वाले बाबा की मौत गौ-तस्करी से जुड़ी हत्या है, जबकि पुलिस की जांच में यह साफ हो चुका है कि यह एक सड़क दुर्घटना थी. इन अफवाहों के कारण गुस्साई भीड़ ने नेशनल हाईवे (NH) पर जाम लगा दिया. लोगों ने हाईवे ब्लॉक कर दिया, पुलिस पर पथराव किया, कई पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की और सरकारी कामकाज में भारी बाधा डाली. स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिस को आंसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े और लाठीचार्ज करना पड़ा था. माहौल को पूरी तरह बिगाड़ने और शांति भंग करने की कोशिशों को देखते हुए मथुरा जिले में सेक्टर स्कीम लागू कर दी गई है. इसका मतलब है कि इलाके को कई सेक्टरों में बांटकर पुलिस की भारी तैनाती की गई है, ताकि कोई और उपद्रव न हो सके और कानून-व्यवस्था बनी रहे.

पुलिस की सख्त कार्रवाई

मथुरा पुलिस ने इस बवाल और अफवाह फैलाने के मामले में अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. इनमें से एक मुख्य नाम दक्ष चौधरी का है, जो मथुरा के बाहर का रहने वाला है. दक्ष चौधरी अपने तीन साथियों के साथ फरसा बाबा के आश्रम पहुंचा था. पुलिस के अनुसार, वह अफवाहें फैला रहा था, लोगों को भड़का रहा था और सरकारी काम में रुकावट डाल रहा था. दक्ष चौधरी और उसके साथियों के खिलाफ कठोर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है और उन्हें जेल भेज दिया गया है. बाकी बाकी गिरफ्तार लोगों पर भी पथराव, तोड़फोड़ और हाईवे जाम करने जैसे आरोप हैं. पुलिस ने कहा है कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर बाकी उपद्रवियों को भी जल्द ही चिन्हित करके गिरफ्तार किया जाएगा.

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