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Explainer: यूपी का राम वन गमन पथ प्रोजेक्ट क्या, उद्घाटन से पहले क्या हुआ जो सवालों में आ गया 4400 करोड़ में बना हाईवे?

अयोध्या से चित्रकूट तक बन रहा करीब 4,400 करोड़ रुपये का राम वन गमन पथ उद्घाटन से पहले ही सुर्खियों में आ गया है. सड़क में कई जगह दरारें पड़ने की तस्वीर सामने आई है जिसके बाद इस पर सियासत भी तेज हो गई है.

Ram Van Gaman Path Road Cracks in Prayagraj rs 4400 Crore Ayodhya-Chitrakoot Project Explained
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Ram Van Gaman Path Project Explained: अयोध्या से चित्रकूट तक भगवान श्रीराम के वनवास से जुड़े धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को जोड़ने के लिए बनाया जा रहा राम वन गमन पथ इन दिनों सड़क धंसने की खबरों के बाद चर्चा में है.

प्रयागराज के श्रृंगवेरपुर इलाके में निर्माणाधीन सड़क के करीब 500 मीटर हिस्से में कई जगह दरारें और धंसाव दिखाई देने की बात सामने आई है. दावा है कि दोनों लेन में 118 जगह सड़क धंसी मिली और कुछ हिस्सों में सड़क करीब एक फीट तक बैठ गई है.

राम वन गमन पथ कितनी लागत से बनाया जा रहा है?

करीब 210 किलोमीटर लंबे राम वन गमन पथ प्रोजेक्ट पर लगभग 4,400 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है. इसका मकसद अयोध्या, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, श्रृंगवेरपुर धाम, कौशांबी और चित्रकूट जैसे धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी तैयार करना है. प्रोजेक्ट का शिलान्यास 2022 में हुआ था. इसे दिसंबर 2024 तक पूरा किया जाना था, लेकिन काम में देरी हुई और अब सड़क के उद्घाटन से पहले ही इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

सड़क धंसने से मचा हड़कंप

प्रयागराज के श्रृंगवेरपुर के पास राम वन गमन पथ के निर्माणाधीन हिस्से में सड़क कई जगह धंसी हुई दिखाई दी. करीब 500 मीटर के हिस्से में दोनों लेन में बड़े गड्ढे और दरारें नजर आईं.

कुछ जगहों पर दरारों की चौड़ाई करीब 1 से 1.5 फीट तक है. वहीं कुछ हिस्सों में सड़क लगभग एक फीट तक नीचे बैठ गई. पुल के पास बनी अप्रोच रोड के एक तरफ झुकने की बात भी सामने आई है. पुल के नीचे से देखने पर अप्रोच की दीवारों में भी बाहर की तरफ उभार दिखाई देने का दावा किया गया है. सबसे चिंता की बात यह है कि पुल के नीचे वाहन लगातार गुजर रहे हैं, जबकि ऊपर सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.

स्थानीय लोगों के मुताबिक, हाल में हुई भारी बारिश के बाद सड़क के नीचे पानी जमा हुआ. उनका आरोप है कि निर्माण के दौरान मिट्टी की पर्याप्त कॉम्पैक्शन और रोलिंग नहीं हुई, जिसकी वजह से बारिश का पानी जमीन के भीतर जाने के बाद सड़क बैठ गई.

सड़क धंसने की वजह क्या है?

स्थानीय लोगों ने सड़क की गुणवत्ता और ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि अगर सड़क के नीचे की मिट्टी को सही तरीके से दबाया और मजबूत किया जाता तथा पानी की निकासी की उचित व्यवस्था होती, तो इस तरह का धंसाव नहीं होता. उनका कहना है कि सड़क के बीच में दरार आने के साथ एक तरफ का हिस्सा पूरी तरह नीचे बैठ गया है और इसके नीचे ढलान जैसी स्थिति बन गई है. भारी बारिश और जल निकासी की कमी को भी उन्होंने इसकी वजह बताया.

राम वन गमन पथ को कौन बना रहा है?

राम वन गमन पथ के निर्माण से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, प्रोजेक्ट के अलग-अलग हिस्सों का काम अलग-अलग कंपनियों को दिया गया है. सामने आई रिपोर्ट में PNC Infratech का नाम भी निर्माण से जोड़ा गया है. PNC Infratech का संबंध भाजपा के राज्यसभा सांसद नवीन जैन के भाई प्रदीप जैन से बताया जा रहा है. कहा जा रहा है कि इसी कंपनी ने कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे का निर्माण किया है.

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में भी सड़क की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ चुके हैं और वहां गड्ढों की शिकायतों का जिक्र सामने आया था. उस मामले में NHAI ने कंपनी को नॉन-परफॉर्मिंग एंटिटी घोषित किया था और कंपनी की ओर से कुछ अधिकारियों को हटाया गया था. हालांकि, राम वन गमन पथ के जिस हिस्से में अभी धंसाव हुआ है, उसके जिम्मेदार ठेकेदार को लेकर विभागीय स्तर पर अलग दावा सामने आया है.

PWD अधिकारी ने क्या कहा?

  • PWD NH Wing के Executive Engineer रविंद्र पाल सिंह ने बताया कि जिस हिस्से में नुकसान हुआ है, वह PNC के हिस्से में नहीं आता बल्कि S&P के हिस्से से जुड़ा है. उन्होंने यह भी कहा कि क्षतिग्रस्त हिस्सा दोनों कंपनियों द्वारा संभाले जा रहे चरणों की सीमा के आसपास आता है.
  • अधिकारी के मुताबिक, सड़क को नुकसान भारी बारिश के कारण हुआ है और फिलहाल वहां मरम्मत एवं मेंटेनेंस का काम कराया जा रहा है.
  • यानी एक तरफ स्थानीय लोग निर्माण की गुणवत्ता, मिट्टी की कॉम्पैक्शन और ड्रेनेज पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि विभागीय अधिकारी फिलहाल भारी बारिश को सड़क धंसने की प्रमुख वजह बता रहे हैं.

क्या है राम वन गमन पथ प्रोजेक्ट?

राम वन गमन पथ परियोजना के तहत अयोध्या से चित्रकूट तक करीब 210 किलोमीटर लंबा चार लेन हाईवे तैयार किया जा रहा है. इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 4,400 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. इसका उद्देश्य सिर्फ सड़क बनाना नहीं, बल्कि उन प्रमुख स्थानों को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ना है, जिनका संबंध भगवान श्रीराम के वनवास की यात्रा से माना जाता है.

Credit- Google Gemini

अयोध्या से शुरू होकर यह मार्ग सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, श्रृंगवेरपुर धाम, कौशांबी और फिर चित्रकूट तक पहुंचता है. प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए इन स्थानों के बीच यात्रा आसान होने की उम्मीद है.

2022 में हुआ था शिलान्यास, दिसंबर 2024 तक पूरा होना था काम

राम वन गमन पथ का शिलान्यास 2022 में किया गया था. धार्मिक पर्यटन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिहाज से इस परियोजना को काफी अहम माना गया. प्रोजेक्ट को दिसंबर 2024 तक पूरा किया जाना था, लेकिन तय समयसीमा में काम पूरा नहीं हो सका. करीब डेढ़ साल की देरी के बाद अब यह परियोजना लगभग पूरी होने की स्थिति में बताई जा रही है.

इसी वजह से इसके जल्द उद्घाटन की चर्चाएं भी चल रही थीं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा इसके उद्घाटन की संभावना की बातें सामने आई थीं, लेकिन उद्घाटन से पहले सड़क के कुछ हिस्सों में धंसाव और दरारों की तस्वीरें और वीडियो सामने आने से परियोजना की गुणवत्ता पर बहस तेज हो गई है.

'उद्घाटन से पहले ही सड़क धंस गई'

सड़क धंसने के बाद मामला सिर्फ इंजीनियरिंग और निर्माण गुणवत्ता तक सीमित नहीं रहा. इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है. पत्रकार रवि राज ने मौके की स्थिति दिखाते हुए सड़क निर्माण में कथित भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और दावा किया कि 4,400 करोड़ रुपये की परियोजना में अनियमितताएं हुई हैं. इसके बाद उन्होंने पुलिस की ओर से परेशान किए जाने का आरोप भी लगाया.

रवि राज के मुताबिक, सड़क की स्थिति सामने लाने के बाद उन पर दबाव बनाया जा रहा है और वह दो दिनों तक घर से बाहर निकलने में भी असहज रहे. बाद में वह समाजवादी पार्टी के कार्यालय पहुंचे और पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से मदद की मांग की.

समाजवादी पार्टी ने सरकार पर साधा निशाना

समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल ने सड़क धंसने को लेकर भाजपा सरकार पर हमला बोला. पार्टी ने आरोप लगाया कि भगवान राम के नाम पर बनाई जा रही परियोजना में भ्रष्टाचार हुआ है और उद्घाटन से पहले ही सड़क का धंसना सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है.

हालांकि, राजनीतिक दलों के आरोपों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सड़क के क्षतिग्रस्त होने की वास्तविक वजह क्या है और निर्माण में कहीं तकनीकी या प्रशासनिक लापरवाही हुई है या नहीं.

असली सवाल अब जांच का है

राम वन गमन पथ एक बड़ी और धार्मिक महत्व वाली सड़क परियोजना है. इसलिए इसके निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, मिट्टी की गुणवत्ता, कॉम्पैक्शन, ड्रेनेज, सड़क की मोटाई और निर्माण मानकों की जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है.

अगर भारी बारिश ही सड़क धंसने की वजह है, तो यह भी देखना होगा कि क्या सड़क का डिजाइन और ड्रेनेज सिस्टम स्थानीय परिस्थितियों और बारिश के हिसाब से पर्याप्त था. वहीं अगर जांच में निर्माण संबंधी कमी सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी होगा.

फिलहाल क्षतिग्रस्त हिस्से में मरम्मत का काम जारी है. अंतिम तस्वीर तकनीकी जांच और संबंधित विभागों की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही साफ होगी... लेकिन 4,400 करोड़ रुपये की इस परियोजना के उद्घाटन से पहले सड़क के धंसने ने इसकी गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं.

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