आज होगा चंपत राय के इस्तीफे पर फैसला, राम मंदिर चोरी विवाद को लेकर क्या कुछ बोल गए ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष- 5 Point में समझिए
राम मंदिर दान विवाद पर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने पहली बार चुप्पी तोड़ी. जानिए उन्होंने अपनी भूमिका, दान व्यवस्था और जांच को लेकर क्या कहा.
अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक आज होने जा रही है. इस बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे को लेकर चर्चा होने की संभावना है. हाल के दिनों में राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर उठे विवाद के बीच बुलाई गई इस बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं. माना जा रहा है कि बैठक में ट्रस्ट के प्रशासनिक और वित्तीय मुद्दों पर भी महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं.
अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे को लेकर उठे कथित अनियमितताओं के विवाद के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने अपनी स्थिति साफ की है. उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके पद, पहचान या प्रभाव को देखते हुए किसी तरह की रियायत नहीं मिलनी चाहिए.
अपने विस्तृत बयान में स्वामी गोविंद देव गिरी ने कहा कि ट्रस्ट में उनकी जिम्मेदारी प्रशासनिक या वित्तीय संचालन की नहीं, बल्कि ऑडिट किए गए आय-व्यय के रिकॉर्ड की निगरानी तक सीमित है. उन्होंने कहा कि दान स्वीकार करना, नकदी संभालना, बैंक खाते संचालित करना या भुगतान की मंजूरी देना उनकी जिम्मेदारियों में शामिल नहीं है.
1. क्या स्वामी गोविंद देव गिरी ने पद के लिए ट्रस्ट की जिम्मेदारी संभाली थी?
उन्होंने बताया कि वे भगवान श्रीराम की सेवा के उद्देश्य से ट्रस्ट से जुड़े हैं और किसी पद या अधिकार की इच्छा से उन्होंने यह जिम्मेदारी नहीं संभाली. देशभर में धार्मिक कार्यक्रमों में व्यस्त रहने के कारण उनका अयोध्या आना सीमित रहता है और वे लगभग हर डेढ़-दो महीने में एक बार ही ट्रस्ट की बैठकों या आवश्यक कार्यों के लिए पहुंचते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कभी भी ट्रस्ट से यात्रा या आवास का खर्च नहीं लिया.
2. ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड की निगरानी कैसे की जाती है?
कोषाध्यक्ष के अनुसार, ट्रस्ट की लेखा व्यवस्था पूरी तरह पेशेवर तरीके से संचालित होती है. चार्टर्ड अकाउंटेंट और लेखा विभाग हर महीने आय-व्यय का मिलान करते हैं, जिसके बाद ऑडिट किए गए रिकॉर्ड उनके समक्ष रखे जाते हैं. उन्होंने दावा किया कि ट्रस्ट के सभी वित्तीय दस्तावेज सुरक्षित हैं और किसी भी अधिकृत जांच एजेंसी द्वारा उनकी जांच की जा सकती है.
3. क्या स्वामी गोविंद देव गिरी ने कभी व्यक्तिगत रूप से दान स्वीकार किया?
स्वामी गोविंद देव गिरी ने यह भी कहा कि ट्रस्ट बनने के बाद उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर किसी श्रद्धालु से न तो नकद दान लिया और न ही कोई अन्य भेंट स्वीकार की. उन्होंने बताया कि परिवार के दो सदस्यों द्वारा दी गई एक नकद राशि और एक चांदी की ईंट भी उन्होंने सीधे ट्रस्ट के खाते और अभिलेख में जमा करा दी थी. उन्होंने ट्रस्ट की वित्तीय प्रक्रिया पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि राम मंदिर से जुड़े सभी भुगतान केवल बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से किए जाते हैं. नकद लेनदेन की कोई व्यवस्था नहीं है और उनके पास किसी भी बैंक खाते का संचालन अधिकार या भुगतान स्वीकृत करने की शक्ति भी नहीं है.
4. राम मंदिर ट्रस्ट में भुगतान और बैंकिंग व्यवस्था कैसे काम करती है?
दानपात्रों में आने वाले चढ़ावे को लेकर उन्होंने कहा कि उसकी गिनती, मूल्यांकन और रिकॉर्ड तैयार करने की पूरी प्रक्रिया एक निर्धारित मानक प्रक्रिया (SOP) के तहत होती है, जिसे भारतीय स्टेट बैंक के सहयोग से तैयार किया गया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कभी भी नियमित रूप से इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं रहे और अब तक केवल एक बार इसे प्रत्यक्ष रूप से देखा है.
5. दानपात्र में आने वाले चढ़ावे की गिनती किस प्रक्रिया से होती है?
बयान के अंत में स्वामी गोविंद देव गिरी ने माना कि इस विवाद से करोड़ों रामभक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंची है. उन्होंने भविष्य में ऐसी किसी भी आशंका को समाप्त करने के लिए ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाने की वकालत की. उन्होंने सुझाव दिया कि दान की डिजिटल निगरानी, कीमती वस्तुओं का विस्तृत रिकॉर्ड और हर चरण की जवाबदेही सुनिश्चित करने वाली व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत हो सके.




