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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर दिखेगी भारत की कला और संस्कृति की झलक, 8000 घंटियों वाली कलाकृति बनेगी आकर्षण का केंद्र

नोएडा के जेवर में बना नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब सिर्फ एक ट्रांसपोर्ट हब नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, कला और आध्यात्मिक विरासत का भव्य प्रतीक बनने जा रहा है. 15 जून से यहां उड़ानों की शुरुआत होने वाली है और इसके साथ ही यात्रियों को एक ऐसा अनुभव मिलेगा.

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर दिखेगी भारत की कला और संस्कृति की झलक, 8000 घंटियों वाली कलाकृति बनेगी आकर्षण का केंद्र
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मोहम्मद रज़ा
By: मोहम्मद रज़ा4 Mins Read

Updated on: 26 May 2026 8:57 PM IST

ग्रेटर नोएडा के जेवर में बना नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब सिर्फ एक ट्रांसपोर्ट हब नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, कला और आध्यात्मिक विरासत का भव्य प्रतीक बनने जा रहा है. 15 जून से यहां उड़ानों की शुरुआत होने वाली है और इसके साथ ही यात्रियों को एक ऐसा अनुभव मिलेगा, जहां आधुनिक तकनीक के बीच भारत की परंपरा की झलक हर कदम पर दिखाई देगी.

एयरपोर्ट प्रशासन ने टर्मिनल को इस तरह डिजाइन किया है कि यहां पहुंचते ही यात्रियों को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक पहचान, भारतीय स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत का एहसास हो. लाल ग्रेनाइट, बनारस के घाटों जैसी सीढ़ियां, पारंपरिक हवेली स्टाइल आंगन और प्राकृतिक रोशनी से भरपूर डिजाइन इस एयरपोर्ट को देश के सबसे खास एयरपोर्ट्स में शामिल करने की तैयारी में हैं.

क्यों खास बनने जा रहा है नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट?

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को सिर्फ यात्रियों की सुविधा तक सीमित नहीं रखा गया है. यहां भारतीय संस्कृति और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का ऐसा मिश्रण तैयार किया गया है, जो यात्रियों को एयरपोर्ट पर भी एक सांस्कृतिक यात्रा का अनुभव देगा. टर्मिनल की ऊंची छतें, खुला आंगन, प्राकृतिक रोशनी और शांत वातावरण यात्रियों को भीड़भाड़ और भागदौड़ के बीच सुकून देने के लिए डिजाइन किए गए हैं. एयरपोर्ट के हर हिस्से में भारतीय वास्तुकला की झलक दिखाई देगी.

एयरपोर्ट का सबसे बड़ा आकर्षण क्या होगा?

एयरपोर्ट का सबसे बड़ा आकर्षण पद्मश्री कलाकार परेश मैती की शानदार कला स्थापना “Mystic Abode” होगी. इस इंस्टॉलेशन में 8000 से ज्यादा पीतल की घंटियों का इस्तेमाल किया गया है. भारतीय परंपरा में घंटियों की ध्वनि को सकारात्मक ऊर्जा, आध्यात्मिक शांति और आत्मचिंतन का प्रतीक माना जाता है. यही वजह है कि इस कलाकृति को एयरपोर्ट के प्रमुख आकर्षण के तौर पर तैयार किया गया है, ताकि यात्रियों को यात्रा के दौरान आध्यात्मिक शांति का एहसास हो सके.


‘जागृति’ पेंटिंग में क्या दिखेगा खास

पद्मश्री परेश मैती की विशाल ऑयल-ऑन-कैनवास पेंटिंग “जागृति” भी एयरपोर्ट की खूबसूरती को नई पहचान देगी. छह पैनलों में बनी यह पेंटिंग भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को दर्शाती है. इस कलाकृति में वाराणसी के घाट, सांची स्तूप, सारनाथ, ताजमहल, अयोध्या, कुंभ मेला और मथुरा-वृंदावन के कुसुम सरोवर जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को चित्रित किया गया है. सभी दृश्यों में उगते सूरज की रोशनी को एक समान प्रतीक के रूप में दिखाया गया है, जो नई शुरुआत और जागृति का संदेश देती है.

एयरपोर्ट की डिजाइन में भारतीय संस्कृति को कैसे शामिल किया गया

एयरपोर्ट की वास्तुकला में भारतीय पारंपरिक तत्वों को बेहद खूबसूरती से शामिल किया गया है. टर्मिनल के डिजाइन में लाल ग्रेनाइट, घाट शैली की सीढ़ियां और हवेली प्रेरित आंगन संरचना का इस्तेमाल किया गया है. इसके अलावा यात्रियों को आरामदायक अनुभव देने के लिए खुली जगहें, प्राकृतिक वेंटिलेशन और शांत वातावरण पर खास ध्यान दिया गया है. एयरपोर्ट प्रशासन का कहना है कि यहां आने वाले यात्रियों को सिर्फ सफर नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का अनुभव भी मिलेगा.

कौन हैं पद्मश्री कलाकार परेश मैती

परेश मैती देश के सबसे प्रतिष्ठित समकालीन कलाकारों में गिने जाते हैं. पिछले लगभग पांच दशकों में उनकी 90 से ज्यादा एकल प्रदर्शनियां भारत और विदेशों में आयोजित हो चुकी हैं. उनकी कलाकृतियां राष्ट्रपति भवन, ब्रिटिश म्यूजियम और नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी संग्रहित हैं. यही वजह है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट में उनकी कला स्थापना को बेहद खास माना जा रहा है.

यात्रियों को क्या मिलेगा नया अनुभव

एयरपोर्ट प्रशासन के मुताबिक, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भारतीय कला, संस्कृति और आतिथ्य को स्विस तकनीकी दक्षता के साथ जोड़ते हुए यात्रियों को विश्वस्तरीय अनुभव देने की तैयारी में है. यह एयरपोर्ट आने वाले समय में सिर्फ उत्तर भारत का बड़ा एविएशन हब ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहचान का नया प्रतीक भी बन सकता है.

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