Begin typing your search...

3 स्तर की जांच, फिर भी इंसानों के लिए आ गईं 60,000 पशुओं वाली सिरिंज, नोएडा जिला अस्पताल में कैसे हुई चूक?

नोएडा के जिला अस्पताल में तीन स्तर की जांच के बावजूद करीब 60,000 वेटरनरी (पशुओं में इस्तेमाल होने वाली) सिरिंज मंगवा ली गईं. यह चूक तब उजागर हुई जब सप्लाई पहुंचने के बाद पैकेजिंग पर ‘वेटरनरी यूज’ लिखा मिला, जिससे अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया.

noida district hospital
X

नोएडा जिला अस्पताल में कैसे आई 60 हजार वेटेनरी सिरिंज

मोहम्मद रज़ा
By: मोहम्मद रज़ा3 Mins Read

Updated on: 2 April 2026 5:37 PM IST

नोएडा के राजकीय जिला संयुक्त अस्पताल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मरीजों के इलाज के लिए जहां सटीक और सुरक्षित मेडिकल उपकरणों की जरूरत होती है, वहीं अस्पताल प्रशासन ने इंसानों की जगह पशुओं में इस्तेमाल होने वाली करीब 60,000 वेटरनरी सिरिंज का ऑर्डर दे दिया.

यह मामला तब उजागर हुआ जब सिरिंज की खेप अस्पताल पहुंची और पैकेजिंग खोलने पर उस पर ‘वेटरनरी यूज’ लिखा मिला. हैरानी की बात यह है कि यह ऑर्डर कई स्तरों की जांच प्रक्रिया से गुजरने के बावजूद किसी अधिकारी की नजर में नहीं आया, जिससे सिस्टम की बड़ी चूक सामने आई है.

कैसे हुई इतनी बड़ी चूक?

जानकारी के अनुसार, 25 दिसंबर 2025 को अस्पताल प्रशासन ने GeM पोर्टल के जरिए लखनऊ की एक एजेंसी को सिरिंज का ऑर्डर दिया था. यह ऑर्डर फार्मासिस्ट, एसएमओ स्टोर और सीएमएस जैसे तीन अहम स्तरों से पास हुआ, लेकिन किसी ने भी यह नहीं देखा कि ऑर्डर में ‘वेटरनरी सिरिंज’ का जिक्र था.

सप्लाई आते ही खुला मामला

जब सिरिंज अस्पताल के स्टोर में पहुंची और बॉक्स खोले गए, तो पैकेजिंग पर साफ लिखा था कि ये पशुओं के उपयोग के लिए हैं. यह देखते ही अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया और तुरंत ऑर्डर को वापस करने का फैसला लिया गया.

सीएमएस ने बताया मानवीय भूल

अस्पताल की सीएमएस अजय राणा ने इसे मानवीय भूल बताते हुए कहा कि सप्लाई मिलते ही गलती पकड़ ली गई थी, इसलिए न तो कोई बिल बना और न ही भुगतान किया गया. हालांकि, इस घटना ने खरीद प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है.

सिस्टम पर उठे बड़े सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बाद बड़ा सवाल यही है कि आखिर नोएडा जैसे हाईटेक शहर के इस हाईटेक सरकारी अस्पताल में रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए आते हैं, वहां इस तरह की लापरवाही कैसे हो सकती है? अगर समय रहते यह गलती पकड़ में नहीं आती, तो मरीजों की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ हो सकता था, लेकिन अस्पताल प्रशासन इसे सिर्फ मानवीय भूल बताने में लगा हुआ है.

स्टेट मिरर स्पेशल
अगला लेख