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केली कुंज छोड़कर कहां गए प्रेमानंद महाराज? 8 दिन बाद आश्रम का पहला बयान, 93 दिनों से लापता अनुज यहां मिला- किडनी चोरी का मचा हल्ला!

केली कुंज आश्रम से जुड़े शिष्य की मौत के बाद पहला बयान आया. 93 दिन बाद अनुज मिला. प्रेमानंद महाराज के बेलवन जाने समेत वायरल दावों की पूरी कहानी जानें.

केली कुंज छोड़कर कहां गए प्रेमानंद महाराज? 8 दिन बाद आश्रम का पहला बयान, 93 दिनों से लापता अनुज यहां मिला- किडनी चोरी का मचा हल्ला!
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सागर द्विवेदी
सागर द्विवेदी10 Mins Read

Updated on: 4 Oct 2026 4:35 PM IST

वृंदावन के केली कुंज आश्रम से जुड़े मामलों को लेकर पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे और सवाल सामने आ रहे हैं. एक तरफ 25 सितंबर को आश्रम से जुड़े एक शिष्य दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत का मामला है, दूसरी तरफ हाथरस के 16 वर्षीय अनुज चौधरी की करीब 93 दिनों तक गुमशुदगी और फिर बरामदगी ने चर्चा को और बढ़ा दिया. इसी बीच आश्रम के भीतर गुटबाजी, प्रेमानंद महाराज के कहीं और चले जाने और संपत्ति से जुड़े कई दावे भी सोशल मीडिया पर किए जा रहे हैं.

हालांकि, इन दावों में से कई की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. खुद आश्रम ट्रस्ट ने अपुष्ट जानकारी और अफवाहों से बचने की अपील की है. ऐसे में आइए क्रमवार समझते हैं कि कब क्या हुआ और अब तक आधिकारिक तौर पर क्या सामने आया है.

25 सितंबर 2026: आश्रम से जुड़े शिष्य की मौत

आपके दिए आश्रम के आधिकारिक बयान के मुताबिक, 25 सितंबर 2026 को श्री हित राधा केली कुंज ट्रस्ट के गुरु कृपा कुंज आश्रम में श्री दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण के साथ एक दुखद घटना हुई. इस घटना के बाद उनकी मौत को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे सामने आए. पोस्टमार्टम और शरीर पर चोट से जुड़े दावों को लेकर भी सवाल उठाए गए. हालांकि, इन दावों की पूरी आधिकारिक पुष्टि अभी अलग से सामने नहीं रखी गई है. इसलिए मौत के कारण और उससे जुड़े अन्य आरोपों को जांच पूरी होने तक तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा.

25 सितंबर के बाद: मौत को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल

शिष्य की मौत के बाद सोशल मीडिया पर आश्रम को लेकर सवाल उठने लगे. कुछ पोस्ट में मौत की परिस्थितियों को लेकर सवाल किए गए तो कुछ लोगों ने आश्रम की व्यवस्था और वहां रहने वाले साधकों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए. यहीं से मामला सिर्फ एक मौत तक सीमित नहीं रहा और आश्रम से जुड़े दूसरे मामलों को भी सोशल मीडिया पर जोड़कर देखा जाने लगा.

इसके बाद: अनुज चौधरी की गुमशुदगी का मामला चर्चा में आया

इसी दौरान हाथरस के सादाबाद क्षेत्र के गांव खेड़ा बरामई का 16 वर्षीय अनुज चौधरी करीब तीन महीने से लापता था. परिवार लगातार उसकी तलाश कर रहा था. पुलिस और अधिकारियों से संपर्क किया गया और बेटे की सकुशल बरामदगी की मांग की जाती रही. अनुज के मामले को लेकर उसके परिजन वृंदावन तक पहुंचे थे और केली कुंज आश्रम से भी सवाल किए गए थे.

अनुज के आश्रम से जुड़े होने को लेकर क्या सामने आया?

यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है. अनुज के परिवार की आशंका और आश्रम से जुड़े दावों के बीच पुलिस ने जो जानकारी दी, उसके मुताबिक अनुज ने 26 जून 2026 को केली कुंज वृंदावन में दीक्षा ली थी, लेकिन उसके आश्रम के किसी कुंज में रहने की बात सामने नहीं आई थी यानी दीक्षा लेने की बात और आश्रम में रहने की बात अलग-अलग हैं. इसी अंतर को रिपोर्ट में साफ रखना जरूरी है.

2 अक्टूबर: मथुरा पुलिस ने अनुज मामले पर बयान दिया. मथुरा पुलिस के अनुसार, 2 अक्टूबर 2026 को अनुज के परिजन वृंदावन पहुंचे थे. उनका आरोप था कि अनुज आश्रम में है और उन्हें आश्रम की ओर से पूरी जानकारी नहीं दी जा रही. पुलिस ने आश्रम के लोगों से बातचीत की. पुलिस के मुताबिक, अनुज के 26 जून को दीक्षा लेने की जानकारी सामने आई, लेकिन आश्रम के किसी कुंज में उसके रहने की बात सामने नहीं आई. पुलिस ने परिवार को भरोसा दिया कि अनुज की तलाश में पुलिस पूरी भूमिका निभाएगी.

3 अक्टूबर के आसपास: अनुज की बरामदगी की खबर

इसके बाद अनुज के मामले में बड़ा अपडेट सामने आया. आपके दिए विवरण के मुताबिक, 93 दिनों से लापता 16 वर्षीय अनुज चौधरी बरामद हो गया. शनिवार देर रात पुलिस की मौजूदगी में उसकी मुलाकात उसके माता-पिता से कराई गई. तीन महीने से ज्यादा समय बाद बेटे को सामने देखकर परिवार भावुक हो गया. मां और बहन की आंखों से आंसू निकल आए. लेकिन अनुज को तत्काल परिवार के सुपुर्द नहीं किया गया.

नाबालिग होने के कारण बाल कल्याण समिति की प्रक्रिया

अनुज की उम्र 16 साल होने के कारण अब उसके मामले में बाल संरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया अपनाई जा रही है. पुलिस के मुताबिक, उसे बाल कल्याण समिति (CWC) के सामने पेश किया जाना है. समिति के समक्ष प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा यानी अनुज की बरामदगी हो चुकी है, लेकिन उसके परिवार के साथ रहने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है.

इसी बीच सामने आए प्रेमानंद महाराज के आश्रम को लेकर बड़े दावे

अनुज की बरामदगी के बीच सोशल मीडिया पर आश्रम को लेकर कई तरह के दावे किए जाने लगे. इनमें सबसे प्रमुख दावा था कि आश्रम के भीतर दो गुट बन गए हैं. कुछ लोगों की ओर से दावा किया गया कि एक तरफ तपस्वी संत हैं और दूसरी तरफ ऐसे लोग हैं जिन पर संपत्ति से जुड़े काम करने के आरोप लगाए जा रहे हैं. लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये दावे हैं, इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.

दिनेश फलाहारी बाबा का दावा- आश्रम में दो गुट

दिनेश फलाहारी बाबा ने दावा किया कि आश्रम में दो गुट बन गए हैं. उन्होंने एक गुट को 'असली संत' और दूसरे को 'नकली संत' बताते हुए कहा कि प्रेमानंद महाराज इन परिस्थितियों से दुखी हैं. उनका दावा है कि प्रेमानंद महाराज कुछ संतों के साथ यमुना पार बेलवन आश्रम चले गए हैं. यह बयान दिनेश फलाहारी बाबा का दावा है. इसे प्रेमानंद महाराज या ट्रस्ट की ओर से पुष्टि किया गया तथ्य नहीं बताया गया है.

प्रेमानंद महाराज के आश्रम छोड़ने का दावा कितना सही?

सोशल मीडिया पर यह दावा भी चल रहा है कि प्रेमानंद महाराज केली कुंज आश्रम छोड़कर कहीं और चले गए हैं. लेकिन उपलब्ध आधिकारिक बयान में आश्रम छोड़ने की वजह या गुटबाजी के कारण बेलवन जाने की पुष्टि नहीं की गई है. इसलिए इस हिस्से को फिलहाल दावे के तौर पर ही रखना सही होगा.

फिर आया आश्रम ट्रस्ट का पहला आधिकारिक बयान

मामले में श्री हित राधा केली कुंज ट्रस्ट की ओर से बयान जारी किया गया. ट्रस्ट ने 25 सितंबर की घटना को दुखद बताते हुए कहा कि पूज्य महाराज श्री और समस्त परिकर इस घटना से अत्यंत आहत हैं. ट्रस्ट ने मृतक साधक के परिवार के प्रति संवेदना जताई और कहा कि वह पुलिस प्रशासन की निष्पक्ष और तथ्यात्मक जांच में पूरा सहयोग कर रहा है.

ट्रस्ट ने सोशल मीडिया की अफवाहों पर क्या कहा?

ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं, साधकों और आम लोगों से अपील की कि जांच पूरी होने तक किसी भी प्रकार की अपुष्ट जानकारी, अफवाह या अनुमान के आधार पर महाराज और आश्रम की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले बयान या प्रचार से बचें. ट्रस्ट ने कहा कि उसे भरोसा है कि पुलिस की निष्पक्ष जांच से घटना के वास्तविक तथ्य सामने आएंगे यानी आश्रम की ओर से पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया में गुटबाजी, संपत्ति या अन्य वायरल दावों की पुष्टि नहीं की गई.

दिनेश फलाहारी बाबा ने फिर क्या दावा किया?

इसके बाद दिनेश फलाहारी बाबा का एक और बयान सामने आया. उन्होंने दावा किया कि आश्रम में एक तरफ तपस्वी संत हैं और दूसरी तरफ कुछ ऐसे लोग हैं जो संपत्ति के कारोबार में शामिल हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि महाराज इन्हीं परिस्थितियों से आहत होकर तपस्वी संतों के साथ बेलवन आश्रम चले गए. उन्होंने मुख्यमंत्री को प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा को लेकर पत्र लिखने की बात भी कही है.

आश्रम में किडनी चोरी का दावा भी वायरल?

सोशल मीडिया पर इससे भी गंभीर दावा किया जा रहा है कि आश्रम से जुड़े लोगों के बीच किडनी चोरी जैसी घटनाएं सामने आई हैं. लेकिन आपकी दी गई सामग्री में इस दावे के समर्थन में कोई FIR, पुलिस बयान, मेडिकल रिकॉर्ड या आधिकारिक दस्तावेज नहीं दिया गया है. इसलिए इसे सिर्फ सोशल मीडिया पर चल रहा अपुष्ट दावा लिखना ही सुरक्षित होगा. बिना पुलिस या जांच एजेंसी की पुष्टि के इसे तथ्य के रूप में प्रकाशित नहीं किया जाना चाहिए.

महिला के साथ मारपीट का दावा भी चर्चा में

इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो/पोस्ट को लेकर दावा किया जा रहा है कि देवी इंदू नाम की महिला एक पीड़ित परिवार से मिलने जा रही थीं और केली कुंज के पास कुछ लोगों ने उनके साथ मारपीट की. कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया गया कि ये लोग प्रेमानंद महाराज के समर्थक थे. लेकिन यहां भी एक महत्वपूर्ण सवाल है. क्या पुलिस ने इस घटना की पुष्टि की है?

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