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मशीन तो बांग्लादेशी बता रही है... गाजियाबाद में 'नागरिकता बताने वाली मशीन' का दावा, Viral हुआ SHO का VIDEO

गाजियाबाद से सामने आया एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तूफान मचाए हुए है. इस वीडियो में कौशांबी थाने के प्रभारी (SHO) अजय शर्मा एक युवक की पीठ पर मोबाइल फोन लगाकर उसकी नागरिकता बताने का दावा करते नजर आ रहे हैं. पुलिस अधिकारी का यह अजीबो-गरीब प्रयोग अब कानून, तर्क और संवैधानिक अधिकारों को लेकर बहस का मुद्दा बन गया है.

मशीन तो बांग्लादेशी बता रही है... गाजियाबाद में नागरिकता बताने वाली मशीन का दावा, Viral हुआ SHO का VIDEO
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सागर द्विवेदी
Edited By: सागर द्विवेदी

Updated on: 1 Jan 2026 9:25 PM IST

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से सामने आया एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तूफान मचाए हुए है. इस वीडियो में कौशांबी थाने के प्रभारी (SHO) अजय शर्मा एक युवक की पीठ पर मोबाइल फोन लगाकर उसकी नागरिकता बताने का दावा करते नजर आ रहे हैं. पुलिस अधिकारी का यह अजीबो-गरीब प्रयोग अब कानून, तर्क और संवैधानिक अधिकारों को लेकर बहस का मुद्दा बन गया है.

वीडियो वायरल होते ही पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं. लोग हैरान हैं कि आखिर कौन-सी ऐसी ‘मशीन’ या तरीका है, जो मौके पर ही किसी व्यक्ति को भारतीय या बांग्लादेशी घोषित कर दे. सोशल मीडिया पर इसे लेकर जमकर तंज कसे जा रहे हैं और कौशांबी पुलिस की किरकिरी हो रही है.

मोबाइल से नागरिकता बताने का दावा, युवक को बताया बांग्लादेशी

वायरल क्लिप में देखा जा सकता है कि SHO अजय शर्मा एक युवक की पीठ पर मोबाइल फोन लगाते हैं और कहते हैं कि मशीन उसे बांग्लादेशी बता रही है. जबकि युवक खुद को बिहार के अररिया जिले का निवासी बता रहा है. इतना ही नहीं, उसकी बेटी मोबाइल फोन में अपनी पहचान से जुड़े दस्तावेज भी दिखाती नजर आती है. इसके बावजूद वीडियो में थाना प्रभारी कहते सुनाई देते हैं, “झूठ तो नहीं बोल रहे? मशीन तो तुम्हें बांग्लादेश का बता रही है.” यही संवाद अब सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा में है.

‘ऑपरेशन टॉर्च’ के दौरान सामने आया मामला

बताया जा रहा है कि यह मामला 23 दिसंबर का है. क्रिसमस और नववर्ष से पहले कौशांबी इलाके में सुरक्षा के मद्देनज़र पुलिस और आरएएफ ने मिलकर ‘ऑपरेशन टॉर्च’ चलाया था. इस अभियान के तहत फ्लैग मार्च के बाद भोवापुर के पास स्थित स्लम इलाकों में घर-घर जाकर दस्तावेजों की जांच की जा रही थी. इस कार्रवाई का उद्देश्य अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान करना बताया गया. इसी दौरान झुग्गियों में रह रहे एक पिता और उसकी बेटी से पूछताछ हुई.

पहचान पत्र दिखाने के बावजूद नहीं माना दावा

वीडियो में साफ दिखाई देता है कि पिता और बेटी खुद को बिहार का निवासी बता रहे हैं. बेटी अपने मोबाइल में आईडी प्रूफ भी दिखाती है. इसके बावजूद थाना प्रभारी कथित ‘मशीन’ का हवाला देते हुए युवक को बांग्लादेशी बताते हैं. यही नहीं, SHO मोबाइल फोन को उसकी कमर या पीठ पर रखकर यह साबित करने की कोशिश करते हैं कि मशीन सच बोल रही है. इस पूरे दृश्य ने पुलिस की समझ और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

सोशल मीडिया पर उड़ा मज़ाक, पुलिस कटघरे में

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने जमकर चुटकियां लीं. यूजर्स पूछ रहे हैं कि आखिर यह कौन-सी तकनीक है, जो बिना किसी आधिकारिक प्रक्रिया के मौके पर नागरिकता तय कर रही है. कई लोगों ने इसे कानून और मानवाधिकारों का मज़ाक करार दिया. इस घटना के बाद कौशांबी पुलिस की जमकर आलोचना हो रही है और पुलिस महकमा असहज स्थिति में नजर आ रहा है.

ACP का फोन नहीं उठा, ‘मशीन’ का रहस्य बरकरार

जब इस पूरे मामले पर एसीपी इंदिरापुरम अभिषेक त्रिपाठी से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई तो उनका फोन नहीं उठ सका. फिलहाल पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. हालांकि, तथाकथित ‘मशीन’ का सच अब तक सामने नहीं आया है, लेकिन वायरल वीडियो ने कौशांबी पुलिस को जरूर सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है.

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