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नीट का छात्र कैसे बना 'फर्जी ब्रिगेडियर'? मिलिट्री इंटेलिजेंस ने पकड़ने के लिए ऐसे डाला दाना; जांच में सामने कई बड़ी बातें

शाहजहांपुर में 21 साल का युवक खुद को भारतीय सेना का ब्रिगेडियर बताकर घूमता रहा. सेना की खुफिया विंग ने फिल्मी अंदाज में जाल बिछाकर उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया.

नीट का छात्र कैसे बना फर्जी ब्रिगेडियर? मिलिट्री इंटेलिजेंस ने पकड़ने के लिए ऐसे डाला दाना; जांच में सामने कई बड़ी बातें
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( Image Source:  X: @SenBaijnath )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय7 Mins Read

Updated on: 13 Jun 2026 9:49 AM IST

एक 21 साल का लड़का जिसके कंधे पर ब्रिगेडियर के स्टार सजे हों, गाड़ी पर सेना का आधिकारिक झंडा लहरा रहा हो, नंबर प्लेट पर रूतबा साफ दिख रहा हो और साथ में दो मुस्तैद बाउंसर चल रहे हों. उसे देखकर कोई भी अदब से सैल्यूट ठोक देगा. शाहजहांपुर और आसपास के जिलों में पिछले दो महीनों से ऐसा ही एक रूतबा घूम रहा था. लेकिन जब सेना की खुफिया विंग (Military Intelligence) ने जाल बिछाया, तो इस तथाकथित 'ब्रिगेडियर साहब' की जो हकीकत सामने आई, उसने हर किसी को सन्न कर दिया.

यह कहानी किसी बॉलीवुड फिल्म की स्क्रिप्ट जैसी लग सकती है, लेकिन यह सौ फीसदी हकीकत है. हाल ही में बिहार के औरंगाबाद में एक नकली आईपीएस (IPS) पकड़ा गया था, जो पुलिस की वर्दी पहनकर वसूली कर रहा था. अभी लोग उस सदमे से उबरे भी नहीं थे कि उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में एक फर्जी ब्रिगेडियर ने सेना और खुफिया एजेंसियों की रातों की नींद उड़ा दी. अगर इस घटना की पूरी कहानी पर नजर डालेंगे तो यह और भी दिलचस्प लगेगी कि कैसे नीट (NEET) की तैयारी करने वाला एक नाकाम छात्र भारतीय सेना का फर्जी अफसर बन बैठा और कैसे सेना ने एक फिल्मी जाल बिछाकर उसका 'द एंड' किया.

बाउंसर्स के साथ घूमता था आर्यन

पकड़े गए आरोपी का नाम आर्यन वर्मा है, जिसकी उम्र महज 21 साल है. शाहजहांपुर और उसके पड़ोसी जिलों में आर्यन पिछले काफी समय से खुद को भारतीय सेना का एक हाई-प्रोफाइल ब्रिगेडियर बताकर घूम रहा था. उसकी हिम्मत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह सेना की पूरी यूनिफॉर्म, मेडल और बेज लगाकर आम जनता के बीच जाता था. चौंकाने वाली बात यह है कि आर्यन अकेले नहीं घूमता था. उसने अपने साथ दो हट्टे-कट्टे बाउंसर रखे हुए थे. जब भी कोई उससे इन बाउंसरों के बारे में पूछता, तो वह बड़े रौब से कहता कि ये नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) के स्पेशल कमांडो हैं, जो उसकी हाई-प्रोफाइल सुरक्षा के लिए तैनात किए गए हैं. उसके पास से सेना का एक आइडेंटिटी कार्ड मिला है. हैरान करने वाली बात यह है कि इस आईकार्ड पर सेना के एक प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज के डीन की मोहर लगी हुई थी.

रेजिमेंटल केन और नकली पिस्तौल

एक सच्चे सेना अधिकारी की तरह दिखने के लिए वह हमेशा अपने हाथ में एक रेजिमेंटल केन (छड़ी) रखता था. इसके अलावा, अपनी धौंस जमाने के लिए उसने कमर में एक नकली पिस्तौल भी खोंस रखी थी.

सेना की नजरों में कैसे आया 'फर्जी साहब'?

भारतीय सेना की अपनी एक गरिमा और प्रोटोकॉल होता है. किसी भी ब्रिगेडियर स्तर के अधिकारी की मूवमेंट, उनका रहन-सहन और तौर-तरीके बेहद अनुशासित होते हैं. अप्रैल के महीने में मिलिट्री इंटेलिजेंस को शाहजहांपुर इलाके में एक ऐसे 'युवा ब्रिगेडियर' की संदिग्ध गतिविधियों की भनक लगी, जो सेना के तय नियमों और उम्र के हिसाब से फिट नहीं बैठ रहा था. 21 साल की उम्र में सेना में ब्रिगेडियर बनना असंभव है, क्योंकि इस रैंक तक पहुंचने में दशकों की कड़ी मेहनत और अनुभव की जरूरत होती है. बस यहीं से सेना के अधिकारियों का माथा ठनका. अधिकारियों ने बिना कोई हंगामा किए चुपचाप आर्यन वर्मा पर नजर रखनी शुरू कर दी. लगभग दो महीने तक उसकी पल-पल की हरकत को ट्रैक किया गया और जब पुख्ता सबूत मिल गए, तो उसे रंगे हाथों पकड़ने के लिए एक बेहद दिलचस्प और फुलप्रूफ प्लान तैयार किया गया.

'मोटिवेशनल स्पीच' का लालच

सेना के अधिकारी जानते थे कि अगर उन्होंने सीधे तौर पर आर्यन को पकड़ने की कोशिश की, तो वह भाग सकता है या कानून व्यवस्था की स्थिति पैदा हो सकती है. इसलिए उन्होंने आर्यन के सामने ऐसा दाना डाला जिसमें वह खुद चलकर आकर फंस गया. सेना के एक विंग अधिकारी ने आम नागरिक बनकर आर्यन वर्मा को फोन मिलाया. फोन पर अधिकारी ने कहा, 'सर, शाहजहांपुर कैंट के शहीद म्यूजियम में एक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. यहां सेना में भर्ती होने की तैयारी कर रहे कई नौजवान छात्र आ रहे हैं. हम चाहते हैं कि आप एक सीनियर ब्रिगेडियर के तौर पर उन्हें मोटिवेट करने के लिए एक स्पीच दें.' खुद को सचमुच का ब्रिगेडियर समझ बैठा आर्यन इस बड़े ऑफर को ठुकरा नहीं पाया. युवाओं को ज्ञान बांटने और अपना रूतबा चमकाने के लालच में उसने तुरंत हां कह दी.

ऐसे हुआ 'द एंड'

तय रणनीति के मुताबिक शुक्रवार को शहीद म्यूजियम के बाहर सेना की खुफिया टीम सिविल ड्रेस में तैनात हो गई. कुछ ही देर में दूर से एक चमचमाती गाड़ी आती दिखी. गाड़ी पर बकायदा सेना का झंडा लगा था और आगे वीआईपी नंबर प्लेट. गाड़ी की अगली सीट पर वर्दी में कड़क होकर बैठे थे 'ब्रिगेडियर' आर्यन वर्मा. आर्यन के मन में चल रहा था कि जैसे ही वह गाड़ी से उतरेगा, वहां मौजूद जवान और छात्र उसे सैल्यूट मारेंगे. लेकिन पासा पलट चुका था. जैसे ही गाड़ी रुकी, इससे पहले कि आर्यन का पैर जमीन पर पड़ता, मिलिट्री इंटेलिजेंस और सेना के जवानों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया. पलक झपकते ही नकली ब्रिगेडियर साहब को हिरासत में ले लिया गया. मौके पर मौजूद उसके ड्राइवर की तलाशी ली गई, तो उसके पास से आर्यन का जाली आईकार्ड भी बरामद हो गया.

X: @SenBaijnath

NEET में फेल आर्यन वर्मा

इस पूरी घटना के पीछे की जो बैकग्राउंड स्टोरी सामने आई है, वह समाज और पैरेंट्स के लिए एक बड़ा सबक है. जांच के दौरान पता चला है कि आर्यन वर्मा कोई पेशेवर अपराधी नहीं था, बल्कि वह दिल्ली में रहकर नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) यानी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था. आर्यन ने नीट पास करने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन वह हर बार फेल हो गया. परीक्षाओं में लगातार मिल रही असफलता के कारण वह मानसिक तनाव और हीनभावना का शिकार होने लगा. डॉक्टर बनने का सपना टूटा, तो उसने समाज में अपनी इज्जत और रूतबा बनाए रखने के लिए एक खतरनाक शॉर्टकट चुना. उसने सीधे भारतीय सेना का ब्रिगेडियर बनने का नाटक रच डाला ताकि कोई उस पर उंगली न उठा सके. चौंकाने वाली बात यह भी है कि आर्यन एक अच्छे और पढ़ें-लिखे परिवार से आता है. उसके पिता बागवानी विभाग (Horticulture Department) में एक प्रतिष्ठित अधिकारी हैं, जबकि उसकी मां एक स्कूल में टीचर हैं. परिवार को भी भनक नहीं थी कि उनका बेटा दिल्ली में पढ़ाई करने के बजाय शाहजहांपुर में फर्जी अफसर बनकर घूम रहा है.

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