Begin typing your search...

क्या उत्तर प्रदेश के 'विजय' बनना चाहते हैं चंद्रशेखर आजाद, 2027 को लेकर किस प्लानिंग पर कर रहे काम?

2027 यूपी चुनाव से पहले चंद्रशेखर आजाद पूरे प्रदेश में सत्ता परिवर्तन यात्रा निकालेंगे. जानिए आजाद समाज पार्टी (ASP) का प्लान, दलित वोट बैंक और BSP फैक्टर.

Chandrashekhar Azad Azad Samaj Party UP Election 2027
X
( Image Source:  @BhimArmyChief )

तमिलनाडु में अभिनेता से नेता और अब वहां के सीएम बने जेसेफ विजय की पार्टी टीवीके (TVK) के तेजी से उभरने ने देश की क्षेत्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. अब उसी मॉडल से प्रेरित होकर भीम आर्मी प्रमुख और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद भी उत्तर प्रदेश में खुद को बड़े राजनीतिक विकल्प के तौर पर स्थापित करने की कोशिश में जुट गए हैं. अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले वह 2 जून से ‘सत्ता परिवर्तन यात्रा’ शुरू करने जा रहे हैं. इस यात्रा के जरिए वह प्रदेश के सभी 75 जिलों तक पहुंचकर संगठन को मजबूत करने और जनता के बीच अपनी सीधी पकड़ बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं.

2027 के लिए चंद्रशेखर का बड़ा प्लान क्या?

आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के चंद्रशेखर आजाद की रणनीति सिर्फ चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि बूथ स्तर तक संगठन खड़ा करने की है. पार्टी नेताओं के मुताबिक यात्रा के दौरान पदयात्रा, बाइक रैली, चौपाल और गांव-गांव संवाद कार्यक्रम किए जाएंगे. खास बात यह है कि यात्रा किसी तय रूट पर नहीं चलेगी, बल्कि अलग-अलग चरणों में पूरे प्रदेश को कवर किया जाएगा. पार्टी का मानना है कि लगातार जमीन पर सक्रिय रहकर ही वह खुद को SP-BSP और BJP के बीच चौथे विकल्प के रूप में पेश कर सकती है.

BSP के कमजोर होने से चंद्रशेखर को कितना फायदा?

यूपी में दलित वोट बैंक लंबे समय तक मायावती और BSP की सबसे बड़ी ताकत रहा है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में BSP का जनाधार लगातार कमजोर हुआ है. 2022 विधानसभा चुनाव में पार्टी सिर्फ एक सीट जीत सकी थी, जबकि 2024 लोकसभा चुनाव में भी उसका प्रदर्शन बेहद खराब रहा. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसी खाली होती राजनीतिक जमीन पर चंद्रशेखर आजाद तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं. दलित युवाओं और सोशल मीडिया पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें नई पीढ़ी का आक्रामक नेता बना रही है.

दलित-मुस्लिम समीकरण पर दांव खेलेगी ASP?

उत्तर प्रदेश में करीब 70 ऐसी विधानसभा सीटें मानी जाती हैं, जहां दलित और मुस्लिम वोट मिलकर चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं. ASP की रणनीति इन्हीं सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत करने की है. पार्टी लगातार संविधान, सामाजिक न्याय और दलित अधिकारों के मुद्दों को अपनी राजनीति के केंद्र में रख रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर चंद्रशेखर दलितों के साथ मुस्लिम मतदाताओं का भरोसा भी जीतने में सफल होते हैं, तो कई सीटों पर मुकाबला पूरी तरह बदल सकता है.

क्या गठबंधन की राजनीति से दूरी बना रहे हैं एसएसपी नेता?

चंद्रशेखर आजाद ने संकेत दिए हैं कि उनकी पार्टी 2027 का चुनाव अकेले लड़ सकती है. उनका कहना है कि बड़ी पार्टियां गठबंधन में छोटे दलों को बराबरी का सम्मान नहीं देतीं. 2022 विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर हुए विवाद के बाद ASP अब अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान मजबूत करने पर जोर दे रही है. 2024 में नगीना लोकसभा सीट पर मिली जीत को पार्टी अपने आत्मविश्वास का सबसे बड़ा आधार मान रही है.

क्या सड़क की लोकप्रियता को वोट में बदल पाएंगे?

चंद्रशेखर आजाद की सबसे बड़ी ताकत उनकी जमीनी सक्रियता मानी जाती है. दलित उत्पीड़न या सामाजिक अन्याय से जुड़ा कोई मामला सामने आते ही वह तुरंत मौके पर पहुंचते हैं, जिससे युवाओं और दलित समुदाय के बीच उनकी मजबूत छवि बनी है. हालांकि, चुनौती यह है कि आंदोलन की राजनीति को चुनावी सफलता में बदलना आसान नहीं होता. 2022 विधानसभा चुनाव में उन्होंने योगी आदित्यनाथ के खिलाफ गोरखपुर सदर सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा और उनकी जमानत भी जब्त हो गई थी. इसके बावजूद ASP को भरोसा है कि लगातार जमीन पर सक्रिय रहकर वह 2027 तक उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा खिलाड़ी बन सकती है.

अगला लेख