गैर जमानती वारंट से लेकर संपत्ति जब्त करने तक का आदेश... चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ कोर्ट ने किस मामले में सुनाया ये फैसला?
गाजियाबाद की एमपी-एमएलए कोर्ट ने एक पुराने मामले में नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है. इस बार की सुनावई के दौरान चंद्रशेखर कोर्ट में भी नहीं पहुंचे.
Chandrashekhar Azad
जहां एक तरफ यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियों ने अपनी-अपनी तैयारी शुरू कर दी है तो वहीं अब चुनाव से पहले आजाज समाज पार्टी के अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद की मुश्किलें बढ़ गई है, दरअसल गाजियाबाद की एमपी-एमएलए कोर्ट ने चंद्रशेखर के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है. मामला मारपीट और गाली-गलौज करने का है.
गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान चंद्रशेखर आजाद कोर्ट में नहीं पहुंचे. शिकायतकर्ता के वकील भजनलाल गौतम ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर कहा कि मामले में चार्जशीट पर सुनवाई चल रही है और चंद्रशेखर के खिलाफ पहले भी गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है. वकील ने उनकी लगातार गैरहाजिरी का हवाला देते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई की मांग की, जिसके बाद अदालत ने गैर जमानती वारंट जारी किया.
कोर्ट में क्या-क्या हुआ?
मामले की सुनवाई गाजियाबाद की एमपी-एमएलए कोर्ट में हुई. सांसद चंद्रशेखर आजाद के अदालत में मौजूद नहीं होने पर शिकायतकर्ता पक्ष ने कोर्ट का ध्यान उनकी पिछली गैरहाजिरी और पहले जारी वारंट की ओर दिलाया. शिकायतकर्ता के वकील ने अदालत से चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट के साथ-साथ सीआरपीसी की धारा 82 और 83 के तहत कार्रवाई की मांग भी की. फिलहाल अदालत ने सुनवाई के दौरान चंद्रशेखर आजाद की गैरहाजिरी को देखते हुए उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है. इसके अलावा उनकी संपत्ति ज़ब्त करने का आदेश भी दिया गया है. यह मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 323 और 305 के तहत दर्ज किया गया था.
क्या है 2018 का पूरा मामला?
यह मामला साल 2018 का है. शिकायतकर्ता धर्मेंद्र कुमार गाजियाबाद के मसूरी थाना क्षेत्र के नूरपुर गांव के रहने वाले हैं. उनका आरोप है कि वह साहिबाबाद इलाके के वृंदावन गार्डन में आयोजित एक शादी समारोह में शामिल होने गए थे. इसी दौरान चंद्रशेखर आजाद भी अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचे थे. धर्मेंद्र कुमार के मुताबिक, उन्होंने चंद्रशेखर से उनके साथ मौजूद हथियारों को लेकर सवाल किया था. जब धर्मेंद्र ने पूछा कि इतने हथियार लेकर क्यों आए हैं, तो चंद्रशेखर ने कथित तौर पर जवाब दिया था कि "दिखाई नहीं दे रहा है, राइफल हैं."
इस बातचीत के बाद चंद्रशेखर आजाद, गुलजार सिद्दीकी, पंकज जाटव और करीब 15 अज्ञात लोगों ने उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की. धर्मेंद्र कुमार ने यह भी आरोप लगाया था कि घटना के दौरान उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई. बाद में इस मामले में पंकज जाटव का नाम अलग कर दिया गया. पुलिस की ओर से मामले में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और इसी पर अदालत में आगे की सुनवाई चल रही है.
पहले कब जारी हुआ था वारंट?
चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ इस मामले में पहले भी वारंट जारी हो चुका है. मई 2025 में वह इसी मामले में वारंट रिकॉल कराने के लिए गाजियाबाद की एमपी-एमएलए कोर्ट में पेश हुए थे. उस समय अदालत ने उनकी ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के लिए अगली तारीख तय की थी.




