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चांदी की ईंटों से लेकर हार, चरण पादुका तक दान में दीं, बदले में रसीद तक नहीं, राम मंदिर में चंदा देने वालों ने क्या-क्या बताया

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद में SIT ने जांच तेज कर दी है. 3 किलो चांदी की माला, 1 किलो चरण पादुका और 60 किलो चांदी के कथित तौर पर गायब होने के दावों की जांच की जा रही है. जानें क्या है पूरा मामला

चांदी की ईंटों से लेकर हार, चरण पादुका तक दान में दीं, बदले में रसीद तक नहीं, राम मंदिर में चंदा देने वालों ने क्या-क्या बताया
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Ayodhya Chadhava: अयोध्या के राम मंदिर में दान की गई वस्तुओं के कथित गायब होने के मामले की जांच अब तेज हो गई है. भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) उन श्रद्धालुओं और दानदाताओं से संपर्क कर रही है, जिन्होंने मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारियों को सीधे आभूषण, चांदी या अन्य कीमती वस्तुएं सौंपी थीं. जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दान कब दिया गया, किसने उसे प्राप्त किया और क्या उसके बदले कोई आधिकारिक रसीद जारी की गई थी.

18 जून को SIT ने मुंबई के कारोबारी अनिल विश्वकर्मा का बयान दर्ज किया. उन्होंने दावा किया कि उनके परिवार ने रामलला को 3 किलो चांदी की माला और 1 किलो चांदी की चरण पादुका दान की थी, लेकिन मंदिर प्रशासन की ओर से उन्हें आज तक कोई रसीद नहीं दी गई. वहीं, इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के नॉर्थ इंडिया हेड अनुराग रस्तोगी ने दावा किया है कि व्यापारियों की ओर से दान की गई 60 किलो चांदी का भी कोई पता नहीं चल पाया है.

क्या है पूरा मामला?

अयोध्या के रोकड़िया हनुमान मंदिर के महंत आचार्य विनोद मिश्रा ने बताया कि मूल रूप से जौनपुर के रहने वाले और वर्तमान में मुंबई में व्यवसाय करने वाले अनिल विश्वकर्मा ने रामलला को चांदी की माला और चरण पादुका अर्पित करने का संकल्प लिया था. महंत के अनुसार, बारीक कारीगरी से तैयार की गई चांदी की माला का वजन करीब 3 किलो था, जबकि 64 शुभ प्रतीकों से अंकित चरण पादुका का वजन लगभग 1 किलो था.

उन्होंने बताया कि विश्वकर्मा परिवार की महिलाएं और बच्चे समेत पूरा परिवार करीब 200 किलोमीटर नंगे पैर चलकर 29 अक्टूबर 2025 को अयोध्या पहुंचा था. उनके आश्रम में पूजा-अर्चना के बाद परिवार इन वस्तुओं को सिर पर रखकर राम मंदिर लेकर गया.

मंदिर में किससे हुई मुलाकात?

महंत विनोद मिश्रा का दावा है कि मंदिर के प्रवेश द्वार पर परिवार की मुलाकात रामाशंकर उर्फ टिन्नू यादव से हुई. उन्होंने परिवार को वीवीआईपी मार्ग से गर्भगृह तक पहुंचाया. वहां चांदी की माला और चरण पादुका रामलला के सामने रखी गईं, जिसके बाद टिन्नू यादव ने उन्हें अपने कब्जे में ले लिया. महंत का कहना है कि बाद में जब परिवार ने दान की तस्वीरें और आधिकारिक रसीद मांगी तो उन्हें बताया गया कि पहले बैंक अधिकारियों द्वारा चांदी की शुद्धता की जांच होगी, उसके बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी.

रसीद को लेकर महंत ने दावा किया कि टिन्नू यादव ने परिवार से कहा था कि "भाई साहब" के देखने के बाद ही रसीद जारी की जाएगी. महंत के मुताबिक यहां "भाई साहब" से आशय ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से था.

क्या है महंत विनोद मिश्रा का आरोप?

महंत विनोद मिश्रा ने आरोप लगया है कि न तो वह चांदी की माला रामलला को पहनाई गई और न ही परिवार को इसके बारे में कोई जानकारी दी गई. उन्होंने कहा कि कई बार अनुरोध करने के बावजूद परिवार को रसीद नहीं मिली. महंत का दावा है कि बाद में टिन्नू यादव ने उन्हें बताया कि चांदी की माला और चरण पादुका को पश्चिम बंगाल भेज दिया गया, जहां उन्हें पिघलाकर चांदी की ईंटों में बदला गया. इन ईंटों का उपयोग मंदिर में पूजा-पाठ के लिए जरूरी बर्तन बनाने में किया जाना था. महंत ने कहा कि यह जानकारी मिलने के बाद श्रद्धालु परिवार काफी आहत हुआ.

60 किलोग्राम चांदी का क्या है मामला?

इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के नॉर्थ इंडिया हेड अनुराग रस्तोगी ने बताया कि देशभर के सर्राफा कारोबारियों ने राम मंदिर निर्माण के लिए 10 से 20 ग्राम तक चांदी का योगदान दिया था. उनके अनुसार, इस तरह कुल 60 किलो चांदी इकट्ठा की गई थी, जिसे पिघलाकर 1 से 1.25 किलो वजन की चांदी की ईंटों में बदला गया. इन ईंटों पर दानदाताओं के नाम और गोत्र भी अंकित किए गए थे. इसके अलावा ऋषिकेश की एक संस्था ने 1 किलो का चांदी का कलश भी दान किया था.

रस्तोगी ने बताया कि 20 जुलाई 2020 को चंपत राय की अनुमति मिलने के बाद इन चांदी की ईंटों को अयोध्या लाया गया था. रामकचहरी में विशेष पूजा का आयोजन हुआ था, जिसमें चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और कोषाध्यक्ष प्रकाश गुप्ता मौजूद थे.

रस्तोगी ने यह भी दावा किया कि उन्होंने अलग से दो चांदी के दीपक, दो चांदी के कटोरे, 200 ग्राम का पंचधातु का मूसल और नाग-नागिन की एक जोड़ी भी दान की थी. उनका कहना है कि चांदी के दीपकों में से एक का उपयोग डॉ. अनिल मिश्रा और उनकी पत्नी ने मंदिर की अखंड ज्योति जलाने के लिए किया था. यह दीपक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रामलला दर्शन के दौरान ली गई तस्वीरों में भी दिखाई देता है. हालांकि, रस्तोगी का आरोप है कि भव्य मंदिर निर्माण पूरा होने के बाद न तो वह चांदी का दीपक दिखाई दिया और न ही भगवान को भोग लगाने के लिए दान किए गए चांदी के कटोरों का कोई पता चल सका. फिलहाल SIT इन सभी दावों और आरोपों की जांच कर रही है.

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