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सम्राट चौधरी के 'गले की फांस' बना भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर, पप्पू यादव ने की भगत सिंह से तुलना; भोजपुर में क्या चल रहा है?

बिहार के भोजपुर में भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला राजनीतिक तूफान बन गया है. वायरल वीडियो सामने आने के बाद पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं. पूर्णिया सांसद Pappu Yadav ने भरत की तुलना शहीद Bhagat Singh से की है, जबकि Sanjay Jha, Ashwini Choubey और अन्य नेताओं ने निष्पक्ष जांच की मांग की है. मामले में तीन एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं.

सम्राट चौधरी के गले की फांस बना भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर, पप्पू यादव ने की भगत सिंह से तुलना; भोजपुर में क्या चल रहा है?
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सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी7 Mins Read

Updated on: 20 Jun 2026 4:51 PM IST

बिहार के भोजपुर जिले का एक छोटा सा गांव बेलौटी इन दिनों पूरे राज्य की राजनीति का केंद्र बन गया है. वजह है 17 जून की सुबह हुई वह घटना, जिसमें भरत भूषण तिवारी नाम के युवक की पुलिस कार्रवाई के बाद मौत हो गई. शुरुआत में इसे एक सामान्य पुलिस मुठभेड़ बताया गया, लेकिन कुछ ही घंटों में मामला इतना उलझ गया कि अब पुलिस, सरकार, विपक्ष और आम जनता सभी एक-दूसरे के सामने खड़े नजर आ रहे हैं.

सांसद पप्पू यादव ने सोशल मीडिया (X) पर भरत भूषण तिवारी को लेकर लिखा कि, 'भारत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला बताता है. बीजेपी की कुकर्मी सरकार से इनके आका. अंग्रेज़ सरकार अधिक न्यायप्रिय थी. उसने हमारे गौरव भगत सिंह जी का एनकाउंटर नहीं किया, जब उन्होंने नेशनल असेंबली में बम फेंका था. भरत जी भी आज के भगत सिंह हैं, उन्होंने न्याय के लिए अपनी कुर्बानी दी है! @JmmJharkhand ने लिखा कि, भाजपा जिसे मानसिक विच्छिप्त, पागल, गुंडा, राष्ट्र द्रोही, साबित करने में दिन रात एक की हुई है. उसके लिए - आम जनों का प्यार देखिए. उसके अंतिम दर्शन को स्वतः जुटी ये जनसैलाब देखिए.

सुबह की कार्रवाई, शाम तक पूरे बिहार में बवाल

पुलिस का कहना है कि उसे सूचना मिली थी कि भरत भूषण तिवारी के पास अवैध हथियार हैं. इसी सूचना के आधार पर शाहपुर थाना की टीम सुबह-सुबह उसके घर पहुंची. पुलिस के मुताबिक दरवाजा खुलते ही भरत ने आक्रामक रुख अपनाया और फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी. मुठभेड़ में घायल भरत को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई.

भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया (X) पर ट्वीट कर लिखा कि, भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में दिनांक 17.06.2026 को हुई पुलिस मुठभेड़ की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच हेतु उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया गया है. न्यायिक जांच का उद्देश्य घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता के साथ जांच सुनिश्चित करना है.

एक वायरल वीडियो ने बदल दिया पूरा नैरेटिव

घटना के कुछ समय बाद सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो सामने आए. इन वीडियो को लेकर दावा किया गया कि भरत तिवारी ने पुलिस के सामने हथियार फेंक दिया था. इसके बावजूद उस पर गोली चलने के आरोप लगाए जाने लगे. वीडियो की सत्यता की जांच अभी बाकी है, लेकिन इन क्लिप्स ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया. यही वजह है कि अब लोग सिर्फ यह नहीं पूछ रहे कि भरत के पास हथियार था या नहीं, बल्कि यह भी पूछ रहे हैं कि पुलिस कार्रवाई पूरी तरह कानून के दायरे में हुई या नहीं.

चार पुलिसकर्मी सस्पेंड, लेकिन सवाल बरकरार

मामला बढ़ता देख सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया. लेकिन विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों का कहना है कि सिर्फ निलंबन से काम नहीं चलेगा. वे पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं.

राजनीति में क्यों मचा है हड़कंप?

भरत तिवारी की मौत अब कानून-व्यवस्था के मुद्दे से आगे निकलकर राजनीतिक लड़ाई बन चुकी है. पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने भरत की तुलना शहीद भगत सिंह से कर दी. उनका कहना है कि व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने वालों को दबाने की कोशिश की जा रही है. वहीं जदयू सांसद संजय झा ने वायरल वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि पूरे मामले की वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में जांच होनी चाहिए. भाजपा के वरिष्ठ नेता अश्विनी चौबे ने भी सवाल उठाया कि अगर युवक ने आत्मसमर्पण कर दिया था तो फिर गोली चलाने की जरूरत क्यों पड़ी. इतना ही नहीं, झारखंड की सत्तारूढ़ पार्टी जेएमएम भी इस बहस में कूद गई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करने लगी.

गांव में गुस्सा क्यों फूटा?

भरत की मौत की खबर फैलते ही बेलौटी और आसपास के इलाकों में माहौल गरमा गया. परिजनों और समर्थकों ने शव के साथ आरा-बक्सर फोरलेन जाम कर दिया. कई घंटे तक सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लगी रही. लोगों का आरोप था कि यह मुठभेड़ नहीं बल्कि संदिग्ध पुलिस कार्रवाई थी.

अब पिता और भाई भी केस में क्यों घिर गए?

मामले ने नया मोड़ तब लिया जब पुलिस ने भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को भी आरोपी बना दिया. पुलिस का आरोप है कि दोनों को भरत के पास अवैध हथियार होने की जानकारी थी और उन्होंने उसे संरक्षण दिया. पुलिस का दावा है कि कार्रवाई के दौरान जब उनसे हथियारों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी. इसी आधार पर उनके खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई.

तीन FIR और बढ़ती कानूनी लड़ाई

अब तक इस मामले में तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज होने की बात सामने आ चुकी है. पहली एफआईआर मुठभेड़ और फायरिंग से जुड़ी है. दूसरी एफआईआर में पिता और भाई को आरोपी बनाया गया है. तीसरी एफआईआर सड़क जाम और विरोध प्रदर्शन को लेकर दर्ज की गई है, जिसमें 14 नामजद और 50 से अधिक अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है. अब सबकी नजर किस पर है? फिलहाल भोजपुर में हर चौक-चौराहे पर एक ही चर्चा है- क्या यह वास्तव में पुलिस मुठभेड़ थी या फिर कुछ और? एक तरफ पुलिस अपनी कार्रवाई को सही बता रही है, दूसरी तरफ परिजन, राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन सवाल उठा रहे हैं. अब इस मामले का सच पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच, वायरल वीडियो की जांच और आगे होने वाली कानूनी प्रक्रिया से ही सामने आएगा. तब तक भरत भूषण तिवारी का नाम बिहार की राजनीति और पुलिस व्यवस्था पर चल रही सबसे बड़ी बहस के केंद्र में बना रहेगा.

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