जहां जन्मा वहीं दफ्न और वहीं से चलाया खौफ का साम्राज्य... ऐसी है अतीक अहमद के कसारी-मसारी की कहानी, घोड़ों का ठिकाना अब श्रीकृष्णपुरी
प्रयागराज के कसारी-मसारी में अतीक अहमद की कहानी, घोड़ों के ठिकाने से श्रीकृष्णपुरी नामकरण और गरीबों के लिए प्रस्तावित पद्मलोक आवासीय योजना तक.
अतीक का गढ़ और प्रयागराज का कसारी-मसारी इलाका, जहां कभी बाहुबली से नेता बने अतीक अहमद के नाम और उसके दबदबे की चर्चा होती थी, अब एक नए बदलाव की कहानी लिखने की तैयारी में है. जिस जमीन को लेकर अतीक और उसके करीबियों पर कब्जे के आरोप लगे, वहां अब गरीब परिवारों के लिए आवास बनाने की योजना आगे बढ़ रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस इलाके को श्रीकृष्णपुरी के रूप में विकसित करने की घोषणा की है. पद्मलोक आवासीय योजना के जरिए सरकार का दावा है कि इस जमीन पर अब जरूरतमंदों को घर मिलेंगे. अब सवाल यह है- क्या बदल पाएगी कसारी-मसारी की पहचान?
जहां चलता था खौफ का राज, वहीं बसेगी श्रीकृष्णपुरी
प्रयागराज का कसारी-मसारी इलाका एक बार फिर चर्चा में इसलिए है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का वह ऐलान, जिसमें उन्होंने इस इलाके को ‘श्रीकृष्णपुरी’ के नाम से विकसित करने की 15 अक्टूबर को घोषणा की. उन्होंने 15 अक्टूबर 2026 को योगी ने माफिया अतीक अहमद और उसके सहयोगियों के कब्जे से मुक्त कराई गई जमीन पर पद्मलोक आवासीय योजना का भूमि पूजन किया. अब उसी जमीन पर गरीब परिवारों के लिए बहुमंजिला आवास सरकार बनाने जा रही है.
क्या है कसारी-मसारी की कहानी?
कसारी-मसारी प्रयागराज के धूमनगंज क्षेत्र में स्थित पुरानी बस्ती है. इसका इतिहास केवल अतीक अहमद तक सीमित नहीं है. स्थानीय मान्यता के मुताबिक, कसारी और मसारी नाम के दो सगे भाई सूफी संत थे, जो अयोध्या से प्रयागराज आए थे. लोगों की सेवा और लोकप्रियता के कारण उनके नाम पर इस क्षेत्र की पहचान बनी. हालांकि, इस नाम की उत्पत्ति से जुड़ी कहानी स्थानीय मान्यता के रूप में ही देखी जानी चाहिए. इलाके में मुस्लिम गद्दी बिरादरी के परिवार भी लंबे समय से रहते आए हैं. उनकी पुश्तैनी जमीनों पर समय के साथ आबादी और रिहायशी बस्तियां विकसित हुईं.
अतीक का क्या कनेक्शन?
प्रयागराज का कसारी-मसारी का अतीक अहमद से पारिवारिक जुड़ाव रहा. उसके परिवार की पुश्तैनी जमीनें और पुराने ठिकाने इस इलाके में बताए जाते हैं. परिवार के कई रिश्तेदार भी यहां रहते थे. बाद में चकिया का नाम अतीक के राजनीतिक और आपराधिक प्रभाव से जुड़े प्रमुख ठिकानों में सामने आया. अतीक और उसके भाई अशरफ की हत्या के बाद दोनों को कसारी-मसारी के कब्रिस्तान में दफनाया गया. यही वजह है कि इस बस्ती का नाम आते ही अतीक के परिवार, उसके पुराने ठिकानों और प्रयागराज की राजनीति का इतिहास भी चर्चा में आ जाता है.
कसारी-मसारी में कैसे बना अतीक का दबदबा?
बाहुबली से राजनेता बने अतीक अहमद ने 1989 में इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की. इसके बाद वह कई बार विधायक बना और 2004 में फूलपुर से लोकसभा सांसद चुना गया. राजनीतिक पहुंच के साथ उसका नाम हत्या, अपहरण, धमकी और जबरन वसूली जैसे गंभीर आपराधिक मामलों में भी सामने आता रहा. उसके खिलाफ दर्ज मामलों और सहयोगियों के नेटवर्क ने प्रयागराज में उसके प्रभाव की छवि को मजबूत किया.
किस जमीन पर बनेंगे गरीबों के घर?
प्रयागराज विकास प्राधिकरण के मुताबिक, इस आवासीय परियोजना के लिए करीब 9,811 वर्गमीटर जमीन निर्धारित की गई है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्राधिकरण ने इस जमीन का अधिग्रहण 1989 में किया था, लेकिन लंबे समय तक वहां नियोजित निर्माण नहीं हो सका. जमीन के एक हिस्से का इस्तेमाल अतीक के घोड़ों को रखने के लिए किए जाने की बात भी रिपोर्टों में सामने आई है. बाद में प्रशासन ने कब्जे से मुक्त कराई गई जमीन पर आवासीय विकास की योजना बनाई. अब इसी जगह पर बहुमंजिला आवास तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई है.
श्रीकृष्णपुरी नाम पर सियासत क्यों?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 15 अक्टूबर को घोषणा की कि कसारी-मसारी को अब ‘श्रीकृष्णपुरी’ के नाम से विकसित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि पुराने नाम से कसाइयों जैसी छवि बनती है. विधायक सिद्धार्थ नाथ सिंह की ओर से भी नाम बदलने की मांग किए जाने की बात सामने आई थी. यह घोषणा केवल नामकरण तक सीमित नहीं है. इसके जरिए सरकार ने उस इलाके की पहचान को अतीक के कथित दबदबे से हटाकर विकास और आवास से जोड़ने का राजनीतिक संदेश दिया है.
पद्मलोक योजना में कितने फ्लैट बनेंगे?
पद्मलोक आवासीय योजना के पहले चरण में 14 मंजिला आवासीय परिसर में 602 फ्लैट बनाए जाने हैं. हर फ्लैट में दो बेडरूम, हॉल और किचन होगा. प्रत्येक फ्लैट का प्रस्तावित क्षेत्रफल 56.45 वर्गमीटर है. परियोजना में पार्किंग, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग और सोलर सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं. रिपोर्टों के अनुसार, दूसरे चरण में 598 अतिरिक्त परिवारों के लिए आवास विकसित करने की योजना है. इस तरह पूरी परियोजना के तहत लगभग 1,200 परिवारों को घर उपलब्ध कराने का लक्ष्य बताया गया है. निर्माण पूरा होने और पात्रता के अनुसार आवंटन के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितने परिवार यहां बस पाएंगे.
सीएम योगी ने इसे गरीबों की नगरी क्यों कहा?
भूमि पूजन के दौरान योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार अब माफिया से मुक्त कराई गई जमीन पर गरीबों के आशियाने बना रही है. उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर माफिया के सामने झुकने का आरोप लगाते हुए कानून-व्यवस्था और विकास को अपनी सरकार की प्रायोरिटी बताया. यह बयान समाजवादी पार्टी पर उनके राजनीतिक हमले का भी हिस्सा था. सरकार का संदेश साफ है- "जिस जमीन को कभी माफिया के प्रभाव से जोड़ा जाता था, उसका इस्तेमाल अब सार्वजनिक आवास के लिए किया जाएगा."
अतीक अहमद का अंत कैसे हुआ?
अतीक अहमद का राजनीतिक सफर 1989 में विधायक बनने से शुरू हुआ और वह आगे चलकर सांसद भी बना. लेकिन उसके सार्वजनिक जीवन के साथ गंभीर आपराधिक मुकदमे जुड़े रहे. मार्च 2023 में प्रयागराज की अदालत ने उमेश पाल अपहरण मामले में उसे दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई. 15 अप्रैल 2023 को प्रयागराज में पुलिस हिरासत के दौरान मेडिकल जांच के लिए ले जाते समय अतीक और उसके भाई अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई. तीन हमलावर पत्रकार बनकर उनके पास पहुंचे थे. इस घटना ने पुलिस हिरासत की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े किए.
क्या बदल पाएगी कसारी-मसारी की पहचान?
कसारी-मसारी की कहानी अब दो अलग दौरों के बीच खड़ी है- एक ओर अतीक अहमद के परिवार और उससे जुड़े कथित जमीन विवादों का इतिहास, दूसरी ओर श्रीकृष्णपुरी नाम से प्रस्तावित आवासीय विकास. योगी सरकार इसे माफिया के प्रभाव से मुक्त जमीन के जनहित में इस्तेमाल का एग्जाम्पल के रूप में पेश कर रही है. फिलहाल, श्रीकृष्णपुरी का ऐलान प्रयागराज में विकास के साथ-साथ राजनीतिक विमर्श का भी नया चैप्टर खोल चुका है.




