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‘नैरेटिव आपका, जवाब हमारा’, अखिलेश के ‘घुसपैठिए’ और भाटी विवाद पर SP नेता की BJP को दो टूक चुनौती - Exclusive

अखिलेश यादव के ‘घुसपैठिए’ बयान और राजकुमार भाटी की धम्म प्रतिज्ञाओं पर विवाद के बीच उदयवीर सिंह ने बीजेपी को चुनौती दी. जानिए सपा के पलटवार की पूरी कहानी.

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यूपी की राजनीति में चुनाव से ठीक पहले बयान और वैचारिक विवाद नए सियासी समीकरण बना रहे हैं. अखिलेश यादव के ‘घुसपैठिए’ वाले बयान से लेकर समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी की 22 धम्म प्रतिज्ञाओं तक, बीजेपी को सपा पर हमले का नया मुद्दा मिला है. लेकिन सपा भी इस लड़ाई में पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रही. स्टेट मिरर से बातचीत में अखिलेश यादव के मुखर समर्थक माने जाने वाले उदयवीर सिंह ने चुनौती देते हुए कहा कि पहले बीजेपी इसे मुद्दा बनाकर तो दिखाए, जवाब देने के लिए सपा तैयार हैं. अब सवाल है कि यह विवाद चुनावी नैरेटिव बनेगा या सियासी बयानबाजी तक सीमित रहेगा?

भाजपा को क्या चुनौती दी?

फिलहाल, जब उदयवीर सिंह से पूछा गया कि यदि भाजपा इन दोनों घटनाओं को चुनावी मुद्दा बनाती है तो इससे सपा को कितना नुकसान हो सकता है? उन्होंने कहा कि पहले भाजपा को इसे मुद्दा बनाने दीजिए, सपा उसका जवाब देगी. फिर नफा नुकसान का आकलन कर लेंगे. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की भी चुनाव को लेकर अपनी राजनीतिक तैयारी है. उदयवीर सिंह के मुताबिक, यह कोई मुद्दा नहीं है और इसलिए इसके राजनीतिक प्रभाव की बात भी उसी मायने में देखी जानी चाहिए.

योगी को ‘घुसपैठिया’ कहने का क्या तर्क दिया?

उदयवीर सिंह ने कहा कि सपा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए ‘घुसपैठिया’ शब्द की कोई नई परिभाषा नहीं बनाई है. उनका दावा है कि अखिलेश यादव ने वही कसौटी इस्तेमाल की है, जिसे भाजपा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं घुसपैठ के मुद्दे पर राजनीतिक बहस में रखते रहे हैं. उदयवीर ने कहा कि यदि 1947 के विभाजन के समय जो लोग भारत में रह गए, उन्हें भी 'घुसपैठिया' कहे जाने की बात की जाती है, तो उसी तर्क को दूसरे मामलों पर भी लागू करके देखा जाना चाहिए.

उत्तराखंड को लेकर उदयवीर सिंह ने क्या सवाल उठाया?

उदयवीर सिंह ने सवाल किया कि योगी आदित्यनाथ मूल रूप से उत्तराखंड के रहने वाले हैं और उत्तराखंड अब उत्तर प्रदेश का हिस्सा नहीं है. उनका तर्क था कि यदि किसी व्यक्ति के दूसरे राज्य से आकर उत्तर प्रदेश में रहने को घुसपैठ की कसौटी से देखा जाता है, तो इसी कसौटी के आधार पर योगी आदित्यनाथ को लेकर भी सवाल उठाया जा सकता है. हालांकि, यह उदयवीर सिंह का राजनीतिक तर्क है, किसी कानूनी या संवैधानिक परिभाषा का निष्कर्ष नहीं.

क्या उदयवीर ने घुसपैठ के आंकड़ों पर भी सवाल उठाया?

उदयवीर सिंह ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें जनगणना सहित विभिन्न प्रक्रियाओं का जिक्र करती हैं, लेकिन यदि घुसपैठियों को लेकर लगातार राजनीतिक दावे किए जा रहे हैं तो उनके ठोस आंकड़े भी सामने आने चाहिए. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी किसी विशेष वर्ग को घुसपैठिया नहीं मानती और भाजपा की ओर से इस्तेमाल की जाने वाली इस राजनीतिक भाषा का जवाब उसी के संदर्भ में दिया जा रहा है. मैं, भाजपा वालों से पूछता हूं, क्या यूपी में एक भी घुसपैठिया निकला? अगर नहीं तो ये मुद्दा सीएम खुद भी बार बार क्यों उठाते हैं, क्यों किसी को मानसिक तौर पर प्रताड़ित करते हैं.

उदयवीर सिंह कौन हैं?

उदयवीर सिंह समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और उत्तर प्रदेश विधान परिषद के पूर्व सदस्य हैं. उनकी पहचान लंबे समय से अखिलेश यादव के समर्थक नेताओं में होती रही है. वर्ष 2016 में समाजवादी पार्टी के भीतर मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के बीच राजनीतिक संघर्ष के दौरान उदयवीर सिंह ने अखिलेश यादव का खुलकर समर्थन किया था.

अखिलेश के समर्थन में मुलायम सिंह को क्या पत्र लिखा था?

वर्ष 2016 में उदयवीर सिंह ने तत्कालीन सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को पत्र लिखकर अखिलेश यादव को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने और उन्हें अधिक अधिकार देने की मांग की थी. पत्र में उन्होंने शिवपाल सिंह यादव तथा परिवार के कुछ सदस्यों पर अखिलेश यादव के खिलाफ साजिश के आरोप भी लगाए थे. ये आरोप उस समय उदयवीर सिंह की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप थे.

सपा से निष्कासन के बाद उनकी वापसी कैसे हुई?

22 अक्टूबर 2016 को उदयवीर सिंह को समाजवादी पार्टी से छह वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया गया था. पार्टी की ओर से उनके खिलाफ अनुशासनहीनता और आपत्तिजनक टिप्पणियों का आरोप लगाया गया था. हालांकि, जनवरी 2017 में अखिलेश यादव के निर्देश पर उन्हें पार्टी में दोबारा शामिल कर लिया गया. इसके बाद वह अखिलेश यादव के समर्थक नेताओं में सक्रिय रहे.

वर्तमान में सपा में उदयवीर सिंह की क्या भूमिका है?

अक्टूबर 2026 में उदयवीर सिंह समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर पार्टी का पक्ष रखते दिखाई दे रहे हैं. वह भाजपा और उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़े मुद्दों पर सपा की ओर से प्रतिक्रिया देते रहे हैं. मौजूदा विवाद में भी उनका बयान अखिलेश यादव के रुख के बचाव और भाजपा के संभावित चुनावी नैरेटिव का जवाब देने की रणनीति के रूप में सामने आया है.

अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ को ‘घुसपैठिया’ क्यों कहा?

अखिलेश यादव ने 24 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान घुसपैठ के मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में सबसे बड़े घुसपैठिए उत्तराखंड के हैं और घुसपैठिए की परिभाषा तय करने की जरूरत है. उनके बयान को योगी आदित्यनाथ के उत्तराखंड में जन्म से जोड़कर देखा गया. सपा की ओर से बाद में स्पष्ट किया गया कि टिप्पणी उत्तराखंड के लोगों के लिए नहीं, बल्कि एक व्यक्ति के संदर्भ में थी.

क्या अखिलेश पहले भी योगी को लेकर ऐसी टिप्पणी कर चुके हैं?

अखिलेश यादव ने इससे पहले 13 अक्टूबर 2025 को भी योगी आदित्यनाथ को लेकर ‘घुसपैठिए’ शब्द का इस्तेमाल किया था. लखनऊ के लोहिया पार्क में राम मनोहर लोहिया की पुण्यतिथि के अवसर पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने योगी आदित्यनाथ को उत्तराखंड से आया घुसपैठिया बताते हुए उन्हें वापस उत्तराखंड भेजने की बात कही थी.

अखिलेश के बयान पर किसने माफी की मांग की?

अखिलेश यादव के बयान पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आपत्ति जताई और उनसे सार्वजनिक माफी की मांग की. धामी ने उत्तराखंड के लोगों के सम्मान और राज्य आंदोलन से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए अखिलेश यादव की टिप्पणी की आलोचना की.

राजकुमार भाटी धम्म प्रतिज्ञा विवाद में कैसे आए?

सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी 20 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के अंबेडकर भवन में आयोजित धम्म दीक्षा कार्यक्रम में शामिल हुए थे. इस कार्यक्रम में डॉ. भीमराव आंबेडकर की 22 प्रतिज्ञाएं दोहराई गईं. इन प्रतिज्ञाओं में ब्रह्मा, विष्णु, महेश, राम और कृष्ण को भगवान न मानने तथा उनकी पूजा न करने से संबंधित बातें भी शामिल हैं. कार्यक्रम का वीडियो सामने आने के बाद राजकुमार भाटी के धर्म परिवर्तन को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया.

राजकुमार भाटी ने विवाद पर क्या सफाई दी?

विवाद के बाद राजकुमार भाटी ने कहा कि उन्होंने हिंदू धर्म नहीं छोड़ा है और न ही उनका उद्देश्य धर्म परिवर्तन करना था. उन्होंने कहा कि वह गौतम बुद्ध और डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का सम्मान करते हैं. भाटी ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होना अपने आप में धर्म परिवर्तन का प्रमाण नहीं है.

भाजपा ने भाटी के मामले पर क्या कहा?

भाजपा नेताओं ने राजकुमार भाटी के कार्यक्रम में 22 प्रतिज्ञाएं पढ़े जाने को लेकर समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा. भाजपा की ओर से आरोप लगाया गया कि इन प्रतिज्ञाओं में हिंदू देवी-देवताओं के संबंध में आपत्तिजनक बातें हैं और सपा को इस पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए. भाजपा ने इसे हिंदू आस्था से जोड़ते हुए सपा की राजनीति पर सवाल उठाए.

घुसपैठिए और भाटी विवाद को भाजपा कैसे देख रही है?

भाजपा की ओर से अखिलेश यादव के ‘घुसपैठिए’ बयान को उत्तराखंड और वहां के लोगों के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी के तौर पर पेश किया गया, जबकि राजकुमार भाटी के मामले को धार्मिक आस्था से जोड़कर सपा पर निशाना साधा गया. इस तरह दोनों घटनाएं राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय बन गई हैं. वहीं, सपा इन आरोपों को भाजपा की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बताते हुए जवाब देने की बात कह रही है.

क्या विवादों को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी है?

अखिलेश यादव की टिप्पणी और राजकुमार भाटी के धम्म प्रतिज्ञा कार्यक्रम से जुड़े विवाद ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में धर्म, पहचान और घुसपैठ जैसे मुद्दों को फिर चर्चा में ला दिया है. भाजपा इन्हें किस सीमा तक चुनावी विमर्श का हिस्सा बनाती है, यह उसकी आगामी राजनीतिक रणनीति पर निर्भर करेगा. दूसरी ओर, उदयवीर सिंह ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि भाजपा इन मुद्दों को चुनावी नैरेटिव का हिस्सा बनाती है तो समाजवादी पार्टी भी उसका राजनीतिक और वैचारिक जवाब देने के लिए तैयार है.

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