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अखिलेश ने खाई पुड़ी तो चली गई Anjali Maicy के पिता की नौकरी, इस दावे में कितना दम?

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से इन दिनों एक बेहद की हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है जहां पर एक अंजलि मैसी नाम की एक लड़की ने दावा किया है कि अखिलेश को पूड़ी खिलाने से मेरे पिता का डिमोशन हो गया है जिसके इस पर सत्ता पक्ष का क्या कहना है आइए जानते हैं...

अखिलेश ने खाई पुड़ी तो चली गई Anjali Maicy के पिता की नौकरी, इस दावे में कितना दम?
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सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी4 Mins Read

Updated on: 7 May 2026 6:18 PM IST

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने आम इंसानी रिश्तों, राजनीति और प्रशासन तीनों को एक साथ चर्चा के केंद्र में ला दिया है. एक साधारण सी भंडारे की घटना अब बड़ा राजनीतिक विवाद बन चुकी है इस भंडारे में एक अंजली मैसी नाम की एक लड़की थी जिसने अखिलेश को भंडारे की पुड़ी खिलाई.

जिसकी वजह से अब कहा कि पुड़ी खिलाने से उसके पिता की नौकरी चली गई है जिसके उनका वीडियो अखिलेश यादव के साथ वायरल हो रहा है जिसमें वह कह अखिलेश यादव से कहती है कि सर आपके लिए ऐसी 100 नौकरी कुर्बान जिसके बाद अंजली मेसी सुर्खियों में आ गई है तो आइए इस स्टोरी में उनके बारे में जानते हैं.

एक साधारण भंडारे से शुरू हुई यह कहानी राजनीति में घुल चुकी है और आरोप- प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है. सत्ता बनाम विपक्ष और सामाजिक संदेश तक पहुंच जाता है. एक ओर जहां अंजली अपने पिता के साथ हुए कथित अन्याय की बात कर रही हैं, वहीं प्रशासन इसे नियमों के उल्लंघन से जोड़ रहा है.

कौन हैं अंजली मैसी और क्यों आईं चर्चा में?

अंजली मैसी उत्तर प्रदेश की लखनऊ की रहने वाली एक पढ़ी-लिखी युवती हैं. उन्होंने अंग्रेजी में एमए किया है और फिलहाल एक निजी स्कूल में शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं. अंजली खुद को दलित समुदाय से जुड़ा बताती हैं और राजनीति में एक्टिव भूमिका निभाने की इच्छा रखती हैं. कॉलेज के दिनों से ही वह अखिलेश यादव के काम से प्रभावित रही हैं और भविष्य में सक्रिय राजनीति में उतरना चाहती हैं.

क्या है पूरा मामला, जिसने तूल पकड़ लिया?

14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के अवसर पर अखिलेश यादव लखनऊ के एक गुरुद्वारे में मत्था टेकने पहुंचे थे. वहां से निकलते समय पास में अंजली द्वारा आयोजित भंडारा चल रहा था. अंजली के आग्रह पर अखिलेश यादव ने अपनी गाड़ी रुकवाई और भंडारे की पूड़ी प्रसाद के रूप में ग्रहण की. इस दौरान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसमें अंजली उनकी तारीफ करती नजर आईं.

पिता के डिमोशन का आरोप क्यों लगा?

अंजली का आरोप है कि उनके पिता उमेश कुमार, जो छावनी परिषद (कैंटोनमेंट बोर्ड) में कार्यरत हैं, को इस घटना के अगले ही दिन सुपरवाइजर पद से हटाकर सफाई कर्मचारी बना दिया गया. प्रेस कॉन्फ्रेंस में भावुक होते हुए अंजली ने कहा कि 'मेरे पापा ऐसी 100 नौकरियां कुर्बान कर देंगे'. इस बयान ने पूरे मामले को और ज्यादा राजनीतिक रंग दे दिया.

अखिलेश यादव ने क्या कहा?

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उन्होंने साफ किया कि वह पहले अंजली को नहीं जानते थे और सिर्फ भंडारे में शामिल हुए थे. उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई है और कहा कि वे इस मुद्दे को उच्च अधिकारियों के सामने उठाएंगे.

प्रशासन का क्या है पक्ष?

छावनी परिषद के अधिकारियों ने अंजली के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह कार्रवाई भंडारे की घटना से जुड़ी नहीं है. उनके अनुसार उमेश कुमार मूल रूप से सफाई कर्मचारी ही हैं. उन्हें डिमोट नहीं किया गया, बल्कि ड्यूटी बदली गई है. उन्होंने सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन किया था. वरिष्ठ अधिकारियों को सीधे निमंत्रण भेजना नियमों के खिलाफ था. अधिकारियों का कहना है कि पहले से भी उनके खिलाफ अनुशासनहीनता की शिकायतें थीं.

क्यों बना यह मामला राजनीतिक मुद्दा?

यह मामला सिर्फ एक पारिवारिक या प्रशासनिक विवाद नहीं रहा, बल्कि अब यह राजनीतिक नैरेटिव का हिस्सा बन चुका है. अंजली इसे सत्ता पक्ष की 'धांधली' बता रही है. विपक्ष इसे सरकारी दमन के रूप में पेश कर रहा है. प्रशासन इसे नियमों के उल्लंघन का मामला मान रहा है यानी सच्चाई इन तीनों के बीच कहीं उलझी हुई नजर आती है.

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