Jaipur: जहां काट रहे थे उम्रकैद, वहीं मिल गया प्यार; अब शादी करेंगे दोनों दोषी- मचा हंगामा
जयपुर (Jaipur) के सांगानेर स्थित खुली जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे युवक-युवती को प्यार हुआ. जिसके बाद अब दोनों शादी करने वाले हैं.
Life Imprisonment Prisoners wedding
राजस्थान की जेल व्यवस्था से जुड़ा एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. अलग-अलग हाई-प्रोफाइल हत्या मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे दो दोषी विवाह करने जा रहे हैं. यह रिश्ता उस दौरान परवान चढ़ा, जब दोनों शहर की खुली हवा वाली जेल में बंद थे और वहीं एक-दूसरे के करीब आए.
यह मामला न केवल अपराध और सजा की गंभीरता को लेकर चर्चा में है, बल्कि जेल नियमों, पैरोल व्यवस्था और पीड़ित परिवारों की आपत्तियों को लेकर भी सवाल खड़े कर रहा है राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के बाद दोनों को पैरोल दी गई, जिसके चलते अब यह विवाह संभव हो पाया है.
कौन हैं प्रिया सेठ और हनुमान प्रसाद?
प्रिया सेठ (34) को साल 2018 में जयपुर में एक युवक की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था. वहीं हनुमान प्रसाद (29) को 2017 में अलवर में एक ही परिवार के पांच लोगों की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. दोनों को 2023 में दोषी करार दिया गया और तब से वे आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं.
जेल में बने रिश्ते, शादी तक पहुंची बात
सूत्रों के अनुसार, प्रिया सेठ और हनुमान प्रसाद लगभग एक साल से सांगानेर स्थित खुली जेल में बंद थे. इसी दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और संबंध स्थापित हो गए. अब यह रिश्ता विवाह में बदलने जा रहा है. शादी अलवर जिले में हनुमान प्रसाद के पैतृक नगर बरोदामेओ में संपन्न होगी.
हाईकोर्ट के आदेश के बाद मिली पैरोल
दोनों दोषियों के वकील विश्राम प्रजापत ने बताया कि 7 जनवरी को राजस्थान उच्च न्यायालय ने पैरोल समिति को निर्देश दिया था कि वह सात दिनों के भीतर उनके पैरोल आवेदनों पर निर्णय ले. इस आदेश के अनुपालन में समिति ने दोनों को पैरोल दे दी. वकील ने कहा "सेठ और प्रसाद बुधवार से शुरू होने वाली 15 दिन की पैरोल पर जेल से बाहर आ गए हैं."
पीड़ित परिवार का विरोध
इस पूरे घटनाक्रम का कड़ा विरोध पीड़ित परिवार की ओर से किया जा रहा है. प्रिया सेठ मामले में पीड़ित परिवार के वकील संदीप लोहारिया ने पैरोल दिए जाने पर आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा "पैरोल मंजूर होने के बाद भी समिति ने हमें सूचित नहीं किया. हम इसके खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करेंगे."





