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हत्या या आत्महत्या? कितने सवाल छोड़ गई नीरजा मोदी, स्कूल ने मिटाए खून के दाग और सबूत

सबसे बड़ा सवाल स्कूल प्रशासन के व्यवहार को लेकर उठा है. घटना के तुरंत बाद स्कूल ने जिस जगह अमायरा गिरी थी, वहां की सफाई करवा दी. पुलिस जब घटनास्थल पर पहुंची, तो वहां खून के निशान तक गायब थे.

हत्या या आत्महत्या? कितने सवाल छोड़ गई नीरजा मोदी, स्कूल ने मिटाए खून के दाग और सबूत
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( Image Source:  X : @AmarTvMedia )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय5 Mins Read

Published on: 2 Nov 2025 12:11 PM

जयपुर में शनिवार दोपहर एक ऐसी घटना हुई, जिसने हर किसी के दिल को झकझोर दिया. नीरजा मोदी स्कूल में चौथी कक्षा में पढ़ने वाली मात्र 9 साल की बच्ची अमायरा की मौत चौथी मंजिल से गिरने के कारण हो गई. यह घटना स्कूल की छुट्टी से ठीक पहले हुई, जब वह वॉशरूम जाने के बहाने कक्षा से बाहर निकली थी. जब नीचे ज़मीन पर उसकी लाश मिली, तो पूरे स्कूल में अफरा-तफरी मच गई. शुरू में किसी को समझ नहीं आया कि यह हादसा हुआ या कुछ और बाद में जब पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज देखी, तो उसमें बच्ची चौथी मंजिल की रेलिंग पर चढ़ती और फिर नीचे गिरती नजर आई. लेकिन, इस फुटेज के बावजूद कई ऐसे सवाल बाकी हैं जो इस मामले को बेहद रहस्यमय बना रहे हैं.

क्या यह आत्महत्या थी या कोई साज़िश?

पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में यह आत्महत्या का मामला लग रहा है, लेकिन परिस्थितियां कुछ और इशारा कर रही हैं. सवाल उठ रहा है कि इतने बड़े और सुरक्षित स्कूल परिसर में कोई बच्ची कैसे इतनी ऊंचाई तक पहुंच गई और बिना किसी के रोकने के वहां से कूद गई?. सीसीटीवी फुटेज के एक हिस्से में बाकी छात्र और टीचर सामान्य रूप से अपनी जगहों पर दिख रहे हैं, मानो किसी को कुछ पता ही न चला. यह बात भी हैरान करती है कि बच्ची के गिरने के बाद किसी ने तत्काल सुरक्षा अलार्म क्यों नहीं बजाया या टीचर्स ने तुरंत प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी.

स्कूल प्रशासन की चुप्पी ने बढ़ाया शक

सबसे बड़ा सवाल स्कूल प्रशासन के व्यवहार को लेकर उठा है. घटना के तुरंत बाद स्कूल ने जिस जगह अमायरा गिरी थी, वहां की सफाई करवा दी. पुलिस जब घटनास्थल पर पहुंची, तो वहां खून के निशान तक गायब थे. जिला शिक्षा अधिकारी राम निवास शर्मा ने बताया कि स्कूल प्रशासन जांच में सहयोग नहीं कर रहा था. जब अधिकारियों ने प्रिंसिपल इंदु दवे से बात करनी चाही, तो स्टाफ ने उनका संपर्क डिटेल देने से मना कर दिया.इतना ही नहीं, स्कूल के रिप्रेजेन्टेटिव ने एजुकेशन डिपार्टमेंट और पुलिस के फोन कॉल्स तक रिसीव नहीं किए. इससे पूरे मामले पर शक और गहराता जा रहा है.

माता-पिता का दुख और सवाल

अमायरा के माता-पिता पूरी तरह टूट चुके हैं. उनकी आंखों में सवाल हैं ऐसा कदम आखिर उनकी बच्ची ने क्यों उठाया? उन्होंने साफ कहा कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत है. मां, जो एक बैंक में काम करती हैं, और पिता, जो प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं, का कहना है कि अमायरा एक खुशमिजाज और समझदार बच्ची थी. उसे न किसी चीज़ की कमी थी, न ही वह किसी मानसिक तनाव में थी. पढ़ाई में भी हमेशा अच्छा प्रदर्शन करती थी. वे मानने को तैयार नहीं कि वह खुद अपनी जान ले सकती है. उनका आरोप है कि स्कूल की लापरवाही या किसी घटना के कारण उनकी बेटी की जान गई है. उन्होंने पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई है और मांग की है कि स्कूल की पूरी जांच हो खासकर सीसीटीवी फुटेज, सुरक्षा प्रोटोकॉल और टीचर्स की जिम्मेदारी के पहलुओं की पड़ताल की जाए.

पुलिस जांच जारी है

पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कई एंगल से जांच शुरू की है. एसएचओ लखन खटाना ने कहा कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, स्कूल की सीसीटीवी फुटेज और स्टाफ से पूछताछ के बाद ही सच्चाई सामने आएगी. अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं कहा जा सकता, लेकिन हर संभावना को जांच में शामिल किया जा रहा है. पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अमायरा के क्लास से बाहर निकलने के बाद किसी ने उसे देखा था या नहीं और क्या चौथी मंजिल तक पहुंचने में किसी ने उसकी मदद की.

सवाल जिनके अबतक जवाब नहीं हैं

क्या 9 साल की बच्ची इतनी ऊंचाई से खुद छलांग लगा सकती है?

आखिर किन परिस्थितियों में वह क्लास से बाहर गई?

क्या किसी टीचर्स ने उसे जाते हुए देखा था? और सबसे बड़ा सवाल घटना के बाद खून के निशान क्यों मिटाए गए?

इन सभी सवालों ने प्रशासन, स्कूल प्रबंधन और स्थानीय समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है

शहर में गुस्सा और चिंता

जैसे ही यह खबर फैली, जयपुर में अभिभावकों के बीच चिंता की लहर दौड़ गई. कई लोगों का कहना है कि स्कूलों में सुरक्षा के नाम पर भारी फीस ली जाती है, फिर भी ऐसे हादसे कैसे हो जाते हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं. यह दुखद घटना न सिर्फ एक मासूम जान के जाने का मामला है, बल्कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, मानसिक सेहत और मॉनिटरिंग सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़ा करती है.

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