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चौंमू में बवाल के बाद चला बुलडोजर, मस्जिद को लेकर हुई थी जमकर पत्थरबाजी; योगी राज से किया जा रहा कम्पेयर

राजस्थान के जयपुर जिले का चौमूं कस्बा बीते दिनों अचानक सुर्खियों में आ गया, जब यहां एक छोटे से विवाद ने हिंसक रूप ले लिया. हालात इस कदर बिगड़े कि पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा और कई जवान घायल हो गए. हिंसा के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया और अब उसी कार्रवाई की कड़ी में नोटिस के बाद बुलडोजर चलाकर अतिक्रमण हटाया जा रहा है.

चौंमू में बवाल के बाद चला बुलडोजर, मस्जिद को लेकर हुई थी जमकर पत्थरबाजी; योगी राज से किया जा रहा कम्पेयर
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( Image Source:  ANI )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत

Updated on: 2 Jan 2026 12:10 PM IST

राजस्थान के जयपुर जिले के चौंमू कस्बे में हुए हालिया बवाल के बाद प्रशासन की सख्ती अब साफ नजर आने लगी है. मस्जिद के पास रेलिंग को लेकर भड़की हिंसा और जमकर हुई पत्थरबाजी के बाद अब अतिक्रमण हटाने के लिए बुलडोजर की कार्रवाई शुरू कर दी गई है.

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इस दौरान कई लोगों को पहले ही नोटिस जारी किए गए थे, जिनकी अवधि पूरी होने के बाद यह कदम उठाया गया. प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई की तुलना अब उत्तर प्रदेश के ‘योगी मॉडल’ से की जा रही है, जिससे यह मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों ही स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है.

नोटिस से शुरू हुई प्रशासनिक सख्ती

हिंसा के तुरंत बाद चौमूं नगर परिषद और पुलिस ने इलाके में अवैध गतिविधियों की पहचान शुरू की. जांच के दौरान सामने आया कि पठान कॉलोनी समेत कुछ क्षेत्रों में सड़क पर अतिक्रमण और अवैध निर्माण लंबे समय से बने हुए थे. प्रशासन ने 29 दिसंबर को करीब 20 से 22 लोगों को नोटिस जारी किए. इन नोटिसों में साफ निर्देश दिए गए कि तीन दिन के भीतर सड़क से अतिक्रमण हटाया जाए, अन्यथा सख्त कार्रवाई की जाएगी.

तीन दिन बीते, जवाब नहीं आया

नोटिस मिलने के बावजूद संबंधित लोगों की ओर से न तो कोई जवाब दिया गया और न ही अतिक्रमण हटाने की पहल हुई. प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए था. तय समय सीमा खत्म होते ही नगर परिषद ने अगला कदम उठाने का फैसला लिया.

सुबह-सुबह पहुंचा बुलडोजर

शुक्रवार सुबह चौमूं की सड़कों पर बुलडोजर दिखाई दिए. नगर परिषद की टीम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई. अवैध निर्माण और सड़क पर बने ढांचों को हटाया गया, ताकि सार्वजनिक रास्ता खाली कराया जा सके. इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए, जिससे किसी तरह की दोबारा हिंसा न हो.

चौंमू में क्यों हुई थी हिंसा?

चौमूं में तनाव की शुरुआत मस्जिद के पास लगाए जाने वाली रेलिंग को लेकर हुई थी. इससे पहले पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच बातचीत हुई और एक पत्थर हटाने पर सहमति बनी. लेकिन पत्थर हटने के बाद वहां रेलिंग लगाने की कोशिश शुरू हुई, जिसका पुलिस ने विरोध किया. इसी दौरान कुछ लोगों ने पत्थरबाजी कर दी, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए.

प्रशासन का साफ संदेश

नगर परिषद के हेल्थ इंस्पेक्टर संदीप सिंह काव्या के अनुसार, यह कार्रवाई पूरी तरह नियमों के तहत की जा रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि नोटिस की अवधि खत्म होने के बाद ही बुलडोजर चलाया गया है. प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने और सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ आगे भी सख्ती जारी रहेगी.

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