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सवाल पूछना हो गया गुनाह! जापान दौरे पर थे सीएम मान तो किसने की हेलीकॉप्टर की सवारी? 10 लोगों के खिलाफ केस

पंजाब की राजनीति में एक बार फिर सवाल पूछने और जवाब देने को लेकर बहस तेज़ हो गई है. मामला उस वक्त सामने आया, जब सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने यह जानने की कोशिश की कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के जापान दौरे के दौरान उनका सरकारी हेलिकॉप्टर आखिर किसके इस्तेमाल में था. यही सवाल अब कई लोगों के लिए कानूनी मुश्किल बन गया है.

सवाल पूछना हो गया गुनाह! जापान दौरे पर थे सीएम मान तो किसने की हेलीकॉप्टर की सवारी? 10 लोगों के खिलाफ केस
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( Image Source:  ANI )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत4 Mins Read

Updated on: 3 Jan 2026 12:10 PM IST

पंजाब की राजनीति में एक बार फिर सवाल पूछने और जवाब देने की आज़ादी को लेकर बहस तेज़ हो गई है. मामला उस वक्त गरमा गया जब सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने यह जानने की कोशिश की कि मुख्यमंत्री भगवंत मान जब आधिकारिक दौरे पर जापान गए हुए थे, तब उनका सरकारी हेलीकॉप्टर आखिर किसके इस्तेमाल में था. बस इसी सवाल ने ऐसा तूल पकड़ा कि RTI एक्टिविस्ट समेत 10 लोगों के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज कर लिया.

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इस कार्रवाई के बाद सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं. पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के भ्रामक जानकारी फैलाई गई, जबकि आरोपियों का दावा है कि उन्होंने सिर्फ जनता से जुड़े एक मुद्दे पर सवाल उठाया था. अब यह मामला सिर्फ हेलीकॉप्टर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अभिव्यक्ति की आज़ादी और सत्ता से सवाल पूछने के अधिकार पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है.

क्या है मामला?

इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, दरअसल सोशल मीडिया पर कई पोस्ट में सवाल उठाया गया कि जब पंजाब के सीएम जापान दौरे पर थे, तो उनका हेलीकॉप्टर कौन इस्तेमाल कर रहा था. इस मामले में पुलिस ने RTI एक्टिविस्ट माणिक गोयल समेत 10 लोगों के खिलाफ साइबर क्राइम थाने में FIR दर्ज की. पुलिस का कहना है कि इन लोगों ने फेसबुक पर ऐसे पोस्ट डाले, जिनमें मुख्यमंत्री के हेलिकॉप्टर से जुड़े “गलत और बिना पुष्टि वाले” दावे किए गए, वो भी बिना किसी ठोस सबूत के. इससे लोगों के बीच गलत संदेश गया और यह सरकारी संस्थाओं की साख और सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है.

सरकारी रिकॉर्ड का हवाला

FIR में यह भी बताया गया है कि नागरिक उड्डयन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, जिस हेलिकॉप्टर की बात हो रही है, वह एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा ही इस्तेमाल किया गया था और वह पूरी तरह से अधिकृत था. यानी चॉपर के इस्तेमाल में कोई अनियमितता नहीं थी.

RTI एक्टिविस्ट का पलटवार

इस पूरे मामले पर माणिक गोयल ने कड़ा विरोध जताया है. उनका कहना है कि सरकार ने नए साल पर उन्हें “तोहफे” में झूठी FIR दी है. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले चार साल से RTI के जरिए मुख्यमंत्री के हेलिकॉप्टर से जुड़े सवालों का कोई जवाब नहीं मिला, इसलिए उन्होंने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया. गोयल का कहना है कि सवाल पूछना अपराध नहीं होना चाहिए और सरकार को पारदर्शिता से जवाब देना चाहिए, न कि FIR दर्ज करनी चाहिए.

‘सवाल पूछना हमारा हक’

FIR में नामजद सभी लोगों ने सोशल मीडिया पर एक साझा बयान जारी किया. इसमें लिखा गया कि उनका “एकमात्र अपराध” सरकार से सवाल पूछना है. उन्होंने कहा कि उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाए, लेकिन सवाल पूछने का अधिकार खत्म नहीं होना चाहिए. इन लोगों ने 4 जनवरी को चंडीगढ़ में विरोध प्रदर्शन करने का भी ऐलान किया है.

विपक्ष का हमला

मामले के सामने आते ही विपक्षी दलों ने सरकार को घेर लिया. बीजेपी, अकाली दल और कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार पत्रकारों और सोशल मीडिया पर सवाल उठाने वालों को डराने की कोशिश कर रही है. उनका कहना है कि लोकतंत्र में सवाल पूछना बुनियादी अधिकार है और इसे दबाया नहीं जा सकता है.

यह मामला अब सिर्फ एक हेलिकॉप्टर तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल बन गया है कि क्या सरकार से सवाल पूछना गुनाह है? जांच अभी जारी है, लेकिन इस पूरे विवाद ने पंजाब में अभिव्यक्ति की आज़ादी और सत्ता की जवाबदेही पर एक नई बहस छेड़ दी है.

पंजाब न्‍यूज
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