हॉस्टल में ‘वीडियो कॉल कांड’! आपत्तिजनक हरकतों के बाद निकाली गई छात्रा, यूजर्स बोले - एक केरला स्टोरी इस पर भी
इंदौर की यूनिवर्सिटी में छात्रा को आपत्तिजनक गतिविधियों के आरोप में हॉस्टल से निकाला गया. जानें पूरा मामला, जांच और विवाद की वजह.
इंदौर की एक यूनिवर्सिटी में सामने आया हॉस्टल विवाद इन दिनों चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गया है, जहां एक छात्रा को कथित आपत्तिजनक गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया गया. कई छात्रों की शिकायतों और आंतरिक जांच के बाद प्रशासन ने यह सख्त कदम उठाया. यह मामला न केवल कैंपस अनुशासन बल्कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और डिजिटल व्यवहार की सीमाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.
क्या है पूरा मामला और कैसे शुरू हुआ विवाद?
इंदौर स्थित देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी एक बार फिर विवादों में है, जहां हॉस्टल के अंदर कथित आपत्तिजनक गतिविधियों को लेकर बड़ा मामला सामने आया है. यूनिवर्सिटी प्रशासन ने एक फर्स्ट ईयर की छात्रा को हॉस्टल से निष्कासित कर दिया है. यह कार्रवाई तब हुई जब कई छात्राओं ने उसके व्यवहार को लेकर गंभीर शिकायतें दर्ज कराईं. बताया जा रहा है कि शुरुआत एक लिखित शिकायत से हुई, जिसके बाद मामला तेजी से तूल पकड़ता चला गया.
वीडियो कॉल के दौरान क्या आरोप लगे?
शिकायत में आरोप लगाया गया कि संबंधित छात्रा हॉस्टल के कमरे में वीडियो कॉल के दौरान आपत्तिजनक हरकतें करती थी. इतना ही नहीं, यह भी कहा गया कि ये गतिविधियां तब भी होती थीं जब अन्य छात्राएं कमरे में मौजूद होती थीं. इस व्यवहार से न सिर्फ हॉस्टल का माहौल प्रभावित हुआ, बल्कि अन्य छात्राओं को मानसिक असहजता भी महसूस हुई. शिकायतकर्ता ने इसे “हॉस्टल अनुशासन का गंभीर उल्लंघन” बताया.
क्या मोबाइल ऐप के जरिए बढ़ाया जा रहा था विवाद?
जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया. आरोप है कि छात्रा एक मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए अन्य छात्राओं को अनजान लोगों से बातचीत और दोस्ती करने के लिए प्रेरित कर रही थी. प्रशासन के मुताबिक, यह गतिविधि न सिर्फ नियमों के खिलाफ थी, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर चिंता का विषय थी. इस पहलू ने मामले को और संवेदनशील बना दिया.
कितनी शिकायतें आईं और क्या कहा अधिकारियों ने?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर राकेश सिंघई ने बताया कि शुरुआत में एक शिकायत आई थी, लेकिन बाद में कम से कम चार और हॉस्टल रेजिडेंट्स ने भी समान आरोप लगाए. इससे यह स्पष्ट हुआ कि मामला किसी एक व्यक्ति की शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक स्तर पर समस्या बन चुका है. अधिकारियों ने इसे हॉस्टल के अनुशासन और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा माना.
जांच में क्या-क्या सामने आया?
शिकायतों के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने एक इंटरनल जांच कमेटी गठित की. इस कमेटी ने पूरे मामले की जांच की और संबंधित छात्रा के कमरे की तलाशी भी ली गई. तलाशी के दौरान कथित तौर पर कुछ आपत्तिजनक वस्तुएं बरामद हुईं, जिसने आरोपों को और गंभीर बना दिया. हालांकि प्रशासन ने इन वस्तुओं का सार्वजनिक विवरण नहीं दिया, लेकिन इसे कार्रवाई का अहम आधार बताया गया.
यूनिवर्सिटी ने इतना सख्त कदम क्यों उठाया?
जांच पूरी होने के बाद प्रशासन ने यह निष्कर्ष निकाला कि छात्रा का हॉस्टल में रहना अन्य छात्राओं के लिए परेशानी और असुरक्षा का कारण बन सकता है. VC राकेश सिंघई ने साफ कहा कि हॉस्टल का माहौल सुरक्षित और अनुशासित रखना प्राथमिकता है. ऐसे में तुरंत प्रभाव से छात्रा को हॉस्टल से निकालने का फैसला लिया गया. यह कदम यूनिवर्सिटी के इतिहास में पहली बार इतना कड़ा माना जा रहा है.
क्या यह यूनिवर्सिटी के लिए मिसाल बनेगा?
इस घटना ने कैंपस में अनुशासन और डिजिटल व्यवहार को लेकर नई बहस छेड़ दी है. विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की कार्रवाई भविष्य में अन्य छात्रों के लिए एक स्पष्ट संदेश हो सकती है कि हॉस्टल नियमों और नैतिक आचरण से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. साथ ही, यह भी संकेत है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का दुरुपयोग अब गंभीर कार्रवाई का कारण बन सकता है.
छात्राओं की सुरक्षा और माहौल पर क्या असर पड़ा?
हॉस्टल में रहने वाली कई छात्राओं ने इस कार्रवाई को राहत देने वाला कदम बताया है. उनका कहना है कि इस तरह की गतिविधियों से न केवल माहौल खराब होता है, बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ता है. प्रशासन का मानना है कि समय पर कार्रवाई से स्थिति को और बिगड़ने से रोका जा सका.
बताया जा रहा है कि ‘कॉलेज लाइफ एंजॉय’ करने के नाम पर कुछ छात्राओं पर बॉयफ्रेंड बनाने और मोबाइल ऐप के जरिए अनजान युवकों से बात करने का दबाव बनाया जा रहा था. 5 छात्राओं ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई, जबकि 10 से ज्यादा छात्राओं ने लिखित शिकायत दी थी. मामले में अनुचित गतिविधियों के आरोप में एक छात्रा को निष्कासित कर दिया गया है.
आगे क्या हो सकता है?
इस मामले के बाद संभावना है कि यूनिवर्सिटी हॉस्टल नियमों को और सख्त करे, खासकर डिजिटल व्यवहार और मोबाइल उपयोग को लेकर. साथ ही, नए दिशानिर्देश जारी किए जा सकते हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके. देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी का यह कदम न सिर्फ एक अनुशासनात्मक कार्रवाई है, बल्कि यह कैंपस में सुरक्षित और जिम्मेदार माहौल बनाए रखने की दिशा में एक सख्त संदेश भी है.
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. कई यूजर्स यूनिवर्सिटी के फैसले को सही ठहराते हुए इसे अनुशासन बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता में दखल करार दे रहे हैं. कुछ यूजर्स का कहना है कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए थी, वहीं अन्य ने छात्रावास के माहौल और सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही. कुल मिलाकर, यह मामला अब केवल कैंपस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया पर भी बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है.
यह तो अजमेर कांड जैसा है
यूजर @SaffronYeti का कहना है कि जेहादियों ने अपना जाल हर जगह फैला रखा है. इस लड़की की साफ है कि एक केरला स्टोरी इस पर भी ... नीतीश चौधरी नामक यूजर का कहना है कि क्या मामला है, कहीं लडकी मुस्लिम तो नहीं है न! पक्का मुस्लिम ही इसके जवाब में King of koria @NaimishBhatt2 ने लिखा है यह कहीं अजमेर कांड जैसा तो नहीं. राष्ट्र प्रहरी का कहा है कि कि सरकार ऐसी लड़कियों की पहचान कर कठोर सजा देने की व्यवस्था करे.




