झारखंड में नसबंदी के बाद भी महिला कैसे हुई प्रेग्नेंट, अब डॉक्टर को कितना देना पड़ेगा जुर्माना, आयोग ने क्या सुनाया फैसला?
झारखंड के गिरिडीह से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला नशबंदी करवाने के बाद भी प्रेग्नेंट हो गई. जिसके बाद महिला ने डॉक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज और डॉक्टर पर जुर्माना लगाया गया.
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परिवार पूरा हो चुका था, इसलिए झारखंड के गिरिडीह में एक महिला ने नसबंदी का ऑपरेशन कराया. उसे भरोसा था कि वह अब दोबारा प्रेग्नेंट नहीं होगी करना पड़ेगा, लेकिन करीब आठ महीने बाद मेडिकल जांच में कुछ ऐसा सामने आया, जिसने उसे हैरान कर दिया. क्योंकि महिला फिर से प्रेग्नेंट थी. इसके बाद मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचा, जहां डॉक्टर को अपनी लापरवाही का जिम्मेदार ठहराया गया.
अब आयोग ने डॉक्टर को महिला को कुल 72,500 रुपये देने का आदेश दिया है. आयोग ने डॉक्टर को चिकित्सा में लापरवाही और सेवा में कमी के लिए जिम्मेदार माना. आदेश के मुताबिक, डॉक्टर को ऑपरेशन के लिए ली गई फीस लौटाने के साथ महिला और उसके परिवार को हुई शारीरिक व मानसिक परेशानी के लिए मुआवजा भी देना होगा.
कब कराई थी नसबंदी?
शिकायत के मुताबिक, महिला और उसके पति के पहले से दो बेटे और एक बेटी थे. परिवार नियोजन के लिए उन्होंने नसबंदी कराने का फैसला किया. महिला डॉक्टर के पास पहुंची, जहां उसकी मेडिकल रिपोर्ट देखने के बाद उसे ट्यूबेक्टॉमी कराने की सलाह दी गई. महिला 14 दिसंबर, 2022 को डॉक्टर के क्लिनिक में भर्ती हुई और ऑपरेशन के लिए 15,000 रुपये का भुगतान किया. उसका आरोप था कि डॉक्टर ने उसे भरोसा दिलाया था कि ऑपरेशन के बाद वह दोबारा गर्भवती नहीं होगी. प्रक्रिया के दौरान फैलोपियन ट्यूब को हटाने और उसके शेष हिस्से को बांधने की बात भी कही गई.
हालांकि, 26 अगस्त, 2023 को मेडिकल जांच में महिला के गर्भवती होने की पुष्टि हुई. इससे महिला और उसका परिवार हैरान रह गया. महिला ने आरोप लगाया कि उसने डॉक्टर से संपर्क कर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की, लेकिन उसे संतोषजनक जवाब नहीं मिला.
क्या बोली महिला?
डॉक्टर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के बाद महिला ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज कराई. उसने चिकित्सा में लापरवाही, सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का आरोप लगाया. महिला का कहना था कि उसने डॉक्टर की सलाह पर परिवार नियोजन की प्रक्रिया कराई थी, लेकिन इसके बावजूद गर्भवती होने से उसे और उसके परिवार को शारीरिक तथा मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा.
आरोपों पर क्या है डॉक्टर का जवाब?
डॉक्टर ने आयोग के सामने महिला की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज किया. उनका कहना था कि ट्यूबेक्टॉमी की प्रक्रिया सही तरीके से की गई थी और ऑपरेशन से पहले महिला तथा उसके पति को बता दिया गया था कि इसके सफल होने की 100 प्रतिशत गारंटी नहीं होती. डॉक्टर ने दलील दी कि इस प्रक्रिया के विफल होने की संभावना 0.4 से 2 प्रतिशत तक रहती है. उनके मुताबिक, महिला और उसके पति को इस जोखिम की जानकारी थी और उन्होंने इसके बावजूद ऑपरेशन कराने की सहमति दी थी. डॉक्टर ने यह भी कहा कि अगर महिला गर्भावस्था जारी नहीं रखना चाहती थी, तो वह किसी सरकारी या निजी अस्पताल में गर्भपात करा सकती थी.
आयोग ने क्यों माना डॉक्टर को जिम्मेदार?
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत थे कि महिला की ट्यूबेक्टॉमी की गई थी. हालांकि, डॉक्टर ऑपरेशन सही तरीके से किए जाने और चिकित्सा में लापरवाही नहीं होने के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं कर सके. आयोग के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार और सदस्य कुमारी विद्योत्तमा बंसल ने माना कि महिला ने चिकित्सा में लापरवाही और सेवा में कमी के आरोपों को ठोस तथा विश्वसनीय सबूतों से साबित किया.
डॉक्टर को कितना पैसा देना होगा?
1. नसबंदी ऑपरेशन की फीस वापस-15,000 रुपये
2. शारीरिक और मानसिक परेशानी का मुआवजा- 50,000 रुपये
3. मुकदमे का खर्च- 7,500 रुपये




