अपनी पत्नी को बेच दो... पैसे चुका दो वाला मैसेज...1.2 करोड़ की ठगी और फर्जी ED नोटिस, युवराज मर्डर केस में क्या-क्या हुए खुलासे?
युवराज सिंह मनचंदा मर्डर केस में 1.2 करोड़ रुपये की कथित ठगी, फर्जी ED नोटिस और ‘पत्नी को बेच दो’ वाले WhatsApp मैसेज का खुलासा हुआ है. पुलिस हत्या और ठगी के बीच संभावित कनेक्शन की जांच कर रही है.
31 साल के युवराज सिंह मनचंदा की कथित हत्या की जांच में एक नया और गंभीर एंगल सामने आया है. पुलिस युवराज की हत्या के आरोप में गिरफ्तार अन्या वत्स और उसके पार्टनर संयम सचदेवा से जुड़े कथित ठगी के एक मामले की भी जांच कर रही है. इसी जांच के दौरान एक WhatsApp मैसेज सामने आया, जिसमें शिकायतकर्ता को कथित तौर पर लिखा गया था- “अपनी पत्नी को बेच दो, कुछ भी करो, लेकिन पैसे चुका दो.” यह मैसेज 1.2 करोड़ रुपये से ज्यादा की कथित ठगी से जुड़े FIR में दर्ज है.
Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायतकर्ता एक सरकारी बैंक की सब्सिडियरी नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट है. उसने आरोप लगाया कि अन्या वत्स और संयम सचदेवा ने फर्जी सरकारी नोटिस के जरिए उससे 1.2 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या युवराज मनचंदा को दोनों की कथित गतिविधियों के बारे में जानकारी थी और क्या इसका उसकी हत्या से कोई संबंध हो सकता है.
एफआईआर में क्या?
FIR में एक WhatsApp मैसेज का जिक्र किया गया है, जिसमें शिकायतकर्ता पर पैसे लौटाने का दबाव बनाया गया था. कथित मैसेज में लिखा था- “अपनी पत्नी को बेच दो, कुछ भी करो, लेकिन पैसे चुका दो.” रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायतकर्ता से यह रकम दिवाली से पहले लौटाने के लिए कथित तौर पर दबाव डाला गया था.
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि अन्या वत्स और संयम सचदेवा से जुड़े कथित रैकेट में उससे 1.2 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की गई. उसने यह रकम अपनी बचत, लोन और परिवार के सदस्यों से उधार लेकर जुटाई थी. शिकायतकर्ता संयम सचदेवा का पूर्व स्कूलमेट भी बताया गया है.
फेक ईडी नोटिस?
रिपोर्ट के अनुसार, शिकायतकर्ता को WhatsApp पर कथित तौर पर प्रवर्तन निदेशालय यानी ED का फर्जी नोटिस भेजा गया. इसके बाद सचदेवा और वत्स ने कथित तौर पर दावा किया कि उनके बड़े सरकारी अधिकारियों से संपर्क हैं और वे इस मामले को सुलझाने में मदद कर सकते हैं.
रिपोर्ट में बताया गया है कि दोनों ने कथित तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के नाम से भी फर्जी नोटिस का इस्तेमाल किया. इन कथित नोटिसों में Prevention of Money Laundering Act, Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act और Unlawful Activities (Prevention) Act जैसे कानूनों के तहत मामलों का जिक्र किया गया था.
कैसे हुआ ठगी है एहसास?
शिकायतकर्ता के मुताबिक, अन्या वत्स ने बाद में कथित तौर पर उससे 26 करोड़ रुपये और मांगे. दावा किया गया कि उसकी ओर से 13.8 करोड़ रुपये सरकारी एजेंसियों को दिए जा चुके हैं. बाद में शिकायतकर्ता को कथित ठगी का एहसास हुआ और उसने पुलिस से संपर्क किया.
रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायतकर्ता की शिकायत पर अगस्त में दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया. पुलिस अब इस कथित ठगी के मामले और युवराज की हत्या के बीच किसी संभावित संबंध की भी जांच कर रही है.
क्या युवराज को कथित ठगी के बारे में पता था?
जांच का एक अहम सवाल यह है कि क्या युवराज मनचंदा को अन्या वत्स और संयम सचदेवा की कथित गतिविधियों के बारे में कोई जानकारी थी. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या युवराज को ऐसी कोई जानकारी मिली थी, जिसका संबंध बाद में हुई उसकी हत्या से हो सकता है.
कब लापता हुए थे युवराज?
युवराज 6 सितंबर को लापता हुए थे. उन्होंने अपने परिवार को बताया था कि उनकी गुरुग्राम में एक मीटिंग है और वह रात करीब 10 बजे तक वापस आ जाएंगे. इसके बाद उनका फोन बंद हो गया. साउथ-ईस्ट दिल्ली के DCP विनीत कुमार के मुताबिक, 11 सितंबर को करीब शाम 4:15 बजे उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई.
पुलिस को जांच के दौरान पता चला कि युवराज Adani Realty में सेल्स मैनेजर के तौर पर काम करते थे और दिल्ली के लाजपत नगर इलाके में एक रेस्टोरेंट में खाना खाने के बाद वहां से निकले थे. तकनीकी जांच के जरिए पुलिस अन्या वत्स तक पहुंची. रिपोर्ट के मुताबिक, उसका फोन भी 8 सितंबर से ट्रेस नहीं हो रहा था. बाद में पुलिस ने कथित तौर पर उसके इस्तेमाल किए जा रहे एक नए मोबाइल नंबर का पता लगाया. कॉल रिकॉर्ड और लोकेशन की जांच से पुलिस को उत्तराखंड का सुराग मिला.
कहां से परड़े गए अन्या और संयम?
पुलिस टीम ने उत्तराखंड पहुंचकर अन्या वत्स और संयम सचदेवा को पकड़ लिया. DCP विनीत कुमार के मुताबिक, पूछताछ के दौरान दोनों ने युवराज से मिलने और उसकी हत्या करने की बात कबूल की. पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने यह भी बताया कि उन्होंने युवराज के शव को गुरुग्राम के बादशाहपुर इलाके में ठिकाने लगाया था.
कहां मिली लाश?
पुलिस को बाद में पता चला कि गुरुग्राम पुलिस ने 10 सितंबर को एक शव बरामद किया था. शव का पोस्टमार्टम कराया गया और बाद में तय प्रक्रिया के तहत उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया. DCP के मुताबिक, शव की तस्वीरें और बरामद सामान युवराज के परिवार को दिखाए गए, जिसके बाद परिवार ने उसकी पहचान की.
शव मिलने पर क्या उठे सवाल
युवराज के दोस्त और वकील रजत जैन ने शव मिलने और उसे संभालने की टाइमलाइन पर सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि ZIPNET रिकॉर्ड के मुताबिक शव 10 सितंबर को मिला था और 14 सितंबर को उसका निपटारा किया गया, लेकिन इसकी जानकारी पोर्टल पर 16 सितंबर को अपलोड हुई.
युवराज की बहन ने भी आरोप लगाया कि परिवार को उनके निजी सामान और पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं दी गई. उनका कहना था कि परिवार को बताया गया कि शव तीन दिन तक मॉर्चरी में रहा और 14 सितंबर को उसका अंतिम संस्कार किया गया.
गुरुग्राम पुलिस ने क्या कहा?
गुरुग्राम पुलिस ने अपनी ओर से किसी देरी से इनकार किया है. पुलिस का कहना है कि दिल्ली पुलिस को 24 घंटे के भीतर गुमशुदगी की FIR दर्ज करनी चाहिए थी और समय रहते गुरुग्राम पुलिस को इसकी जानकारी देनी चाहिए थी. Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक, जांचकर्ताओं ने एक अवैध पिस्तौल और युवराज की कार जब्त की है. दोनों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है. आरोपियों के मोबाइल फोन भी फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी यानी FSL भेजे गए हैं.
वृंदावन में रुकने की हो रही जांच?
जांचकर्ताओं को पता चला कि आरोपी कथित तौर पर उत्तराखंड जाते समय वृंदावन में भी रुके थे. पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह रुकना पुलिस से बचने की कोशिश का हिस्सा था. रिपोर्ट के अनुसार, युवराज के साथ कथित पैसों के विवाद को लेकर दोनों आरोपी अपने बयान भी बदलते रहे हैं. फिलहाल पुलिस हत्या, कथित ठगी, पैसों के विवाद और आरोपियों की गतिविधियों के बीच संभावित संबंधों की जांच कर रही है.




