₹504 करोड़ फंड घोटाले में फंसे IAS पंकज अग्रवाल! CBI ने किया गिरफ्तार, जानिए 5 पॉइंट्स में पूरा मामला
दो दशक तक हरियाणा प्रशासन के अहम पदों पर रहे IAS पंकज अग्रवाल को CBI ने कथित फंड घोटाले में गिरफ्तार किया है. जांच एजेंसियों का दावा है कि सरकारी खातों से जुड़े करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन की जांच जारी है.
हरियाणा कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी पंकज अग्रवाल की गिरफ्तारी ने राज्य की नौकरशाही और सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है. दो दशक से ज्यादा समय तक कई अहम पदों पर रह चुके इस अधिकारी का नाम अब करोड़ों रुपये के कथित वित्तीय घोटाले की जांच में सामने आया है. सीबीआई की कार्रवाई के बाद उनके निलंबन की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं. आखिर पंकज अग्रवाल कौन हैं, उनका प्रशासनिक सफर कैसा रहा और किस मामले में जांच एजेंसियों ने उन्हें गिरफ्तार किया? आइए पांच पॉइंट्स में पूरा मामला समझते हैं.
IAS पंकज अग्रवाल कौन?
पंकज अग्रवाल वर्ष 2000 बैच के हरियाणा कैडर के आईएएस अधिकारी हैं. मूल रूप से झारखंड के धनबाद से ताल्लुक रखने वाले अग्रवाल ने प्रशासनिक सेवा में आने के बाद हरियाणा के कई महत्वपूर्ण विभागों और जिलों में जिम्मेदारियां संभालीं. उन्हें लंबे समय तक शांत और लो-प्रोफाइल अफसर के तौर पर जाना जाता रहा. आईएएस बनने के बाद उन्होंने गुरुग्राम स्थित हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (HIPA) में असिस्टेंट कमिश्नर के रूप में करियर शुरू किया. इसके बाद वे लगातार प्रशासनिक सीढ़ियां चढ़ते गए और राज्य के कई अहम पदों पर नियुक्त हुए.
किन-किन बड़े पदों पर रहे तैनात?
पंकज अग्रवाल 2007 से 2011 तक कुरुक्षेत्र के डिप्टी कमिश्नर रहे. इसके बाद 2011 से 2013 तक सोनीपत के डीसी के रूप में काम किया. उन्होंने श्रम आयुक्त, परिवहन आयुक्त, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के महानिदेशक जैसे कई प्रभावशाली पदों की जिम्मेदारी भी संभाली.
1. चुनाव आयोग से भी जुड़ा रहा नाम
2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें राज्य का मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) बनाया गया था. इस दौरान चुनावी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी उनके पास थी. बाद में उन्होंने शिक्षा, कृषि, सिंचाई और खनन जैसे महत्वपूर्ण विभाग भी संभाले.
2. राज्यसभा चुनाव के बाद पहली बार विवादों में आए
मार्च 2025 में हरियाणा राज्यसभा चुनाव के दौरान पंकज अग्रवाल का नाम राजनीतिक विवादों में उभरा. कांग्रेस नेताओं ने रिटर्निंग ऑफिसर के तौर पर उनके कुछ फैसलों पर सवाल उठाए थे. हालांकि अग्रवाल ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि उन्होंने चुनाव आयोग के नियमों के तहत ही कार्रवाई की थी.
3. आखिर किस मामले में हुई गिरफ्तारी?
सीबीआई ने 23 जून को पंकज अग्रवाल को कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में गिरफ्तार किया. जांच एजेंसी का आरोप है कि चंडीगढ़ स्थित एक बैंक शाखा में सरकारी खातों के संचालन और फंड ट्रांजैक्शन में गंभीर गड़बड़ियां हुईं, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा.
4. ₹60 करोड़ से लेकर ₹500 करोड़ से ज्यादा के कथित घोटाले का दावा
जांच एजेंसियों के मुताबिक हरियाणा के विभिन्न सरकारी विभागों के फंड कथित तौर पर नियमों के विपरीत खातों में जमा किए गए. आरोप है कि इन खातों के जरिए करोड़ों रुपये की संदिग्ध लेन-देन हुई. जांच में यह भी दावा किया गया है कि कई शेल कंपनियों और फर्जी संस्थाओं तक सरकारी धन पहुंचाया गया. पूरे मामले में लगभग ₹504 करोड़ के फंड डायवर्जन की जांच चल रही है, जबकि शुरुआती स्तर पर ₹60 करोड़ से अधिक के नुकसान की बात कही जा रही है.
5. आगे क्या हो सकता है?
गिरफ्तारी के बाद अब सीबीआई पंकज अग्रवाल से पूछताछ कर रही है. सूत्रों के अनुसार, जांच आगे बढ़ने के साथ उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई और निलंबन पर भी फैसला लिया जा सकता है. वहीं इस मामले में अन्य अधिकारियों और संबंधित लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है.
यह मामला सिर्फ एक आईएएस अधिकारी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है. जांच एजेंसियों के दावों के मुताबिक इसमें सरकारी फंड, बैंकिंग सिस्टम और कई विभागों की कार्यप्रणाली से जुड़े गंभीर सवाल उठ रहे हैं. यही वजह है कि हरियाणा की नौकरशाही से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस केस की चर्चा हो रही है और आने वाले दिनों में इससे जुड़े और बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं.




