हरियाणा में 10 बेटियों के बाद बेटे के जन्म ने छेड़ी बहस, गिनती करते-करते पिता भूला बेटियों का नाम; सोशल मीडिया पर हल्ला
हरियाणा के जींद जिले के उचाना क्षेत्र में एक परिवार इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां 35-40 वर्षीय महिला ने 10 बेटियों के बाद 11वें बच्चे के रूप में बेटे को जन्म दिया. 5 जनवरी 2026 को हुई इस डिलीवरी में मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं. बेटे की चाहत में बार-बार प्रेग्नेंसी और पिता का बेटियों के नाम भूल जाना सोशल मीडिया पर बहस का कारण बन गया. यह मामला जेंडर बायस, फैमिली प्लानिंग और बढ़ती जनसंख्या जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों पर सवाल खड़े करता है.
हरियाणा राज्य के जींद जिले में उचाना नाम की जगह पर एक परिवार में 11वें बच्चे का जन्म इन दिनों काफी चर्चा में है. यहां रहने वाली एक महिला, जिनकी उम्र लगभग 35 से 40 साल के बीच बताई जा रही है, ने हाल ही में अपने 11वें बच्चे को जन्म दिया है. यह बच्चा एक लड़का है, जबकि इससे पहले पैदा हुए सभी 10 बच्चे लड़कियां हैं. महिला का नाम अभी सार्वजनिक रूप से नहीं बताया गया है, लेकिन उनके पति का नाम संजय है, जो एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं.
यह घटना 5 जनवरी 2026 को हुई, जब महिला को अस्पताल में डिलीवरी हुई. डॉक्टरों के मुताबिक, जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं. यह मामला थोड़ा हैरान करने वाला है क्योंकि आज के समय में, जब लोग फैमिली प्लानिंग और छोटे परिवार की बात करते हैं, तब इतने सारे बच्चे पैदा करना असामान्य लगता है. परिवार के लोग बताते हैं कि वे बेटे की उम्मीद में लगातार कोशिश करते रहे.
ग्रामीणों में अब बेटे की चाहत
भारत जैसे देश में, खासकर ग्रामीण इलाकों में, बेटे की चाहत अभी भी बहुत गहरी है. लोग मानते हैं कि बेटा वंश चलाने वाला होता है, बुढ़ापे का सहारा बनता है. लेकिन इस चाहत में महिला को 11 बार प्रेग्नेंसी से गुजरना पड़ा, जो उनके स्वास्थ्य के लिए भी जोखिम भरा हो सकता है. रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया कि जब न्यूज रिपोर्टर ने पिता संजय से अपनी 10 बेटियों के नाम पूछे, तो वे नाम गिनाते-गिनाते कुछ भूल गए. वे हंसते हुए कहते नजर आए, 'एक का नाम तो याद नहीं आ रहा.' यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिससे लोगों को हंसी भी आई और सोचने पर मजबूर भी किया.
बच्चों को पालना-पोसना आसान नहीं
परिवार अब खुश है क्योंकि उनका सपना पूरा हो गया. वे कहते हैं कि भगवान की मर्जी से यह हुआ. लेकिन सवाल यह उठता है कि इतने बच्चों को पालना-पोसना आसान नहीं. शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना एक बड़ी चुनौती है. ग्रामीण इलाकों में अक्सर ऐसे परिवारों को सरकारी योजनाओं का सहारा लेना पड़ता है, जैसे बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ या अन्य वेलफेयर प्रोग्राम. फिर भी, इस घटना ने समाज में जेंडर असमानता और पॉपुलेशन कंट्रोल जैसे मुद्दों पर बहस छेड़ दी है. कुछ लोग इसे पुरानी सोच का नतीजा मानते हैं, जहां लड़कियों को कम महत्व दिया जाता है.
सोशल मीडिया पर यूजर्स के रिएक्शंस
यह स्टोरी जैसे ही सोशल मीडिया पर फैली, खासकर एक्स हैंडल पर, लोगों ने तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दीं. कुछ ने इसे मजाक बनाया, कुछ ने क्रिटिसिज्म किया, तो कुछ ने सपोर्ट भी किया. कुल मिलाकर, नेगेटिव रिएक्शन्स ज्यादा हैं, लेकिन डिबेट गर्म है. बहुत सारे यूजर्स ने परिवार को गैर-जिम्मेदार बताया. एक यूजर ने लिखा, 'यह महिला 11 बच्चों की मां बनी, लेकिन पिता नाम तक भूल जाते हैं. सरकार को सभी बच्चों को ले लेना चाहिए, ये माता-पिता इन्हें सही से पाल नहीं पाएंगे.' यह रिएक्शन यूजर के ओपिनियन से मिलता-जुलता है. कई लोगों ने जेंडर बायस पर सवाल उठाया, जैसे 'बेटे की चाहत में 10 बेटियां पैदा कर लीं, क्या लड़कियां बोझ हैं?' कुछ ने ओवरपॉपुलेशन की बात की, 'देश की जनसंख्या बढ़ाने में इनका योगदान है, लेकिन सुविधाएं सरकार से चाहिए.' एक पोस्ट में यूजर ने कहा, 'यह क्राइम है, महिलाओं को शील्ड मत दो क्राइम का कोई जेंडर नहीं.'





