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‘कम से कम आदेश पढ़ तो लेते...’ मोबाइल नोटिफिकेशन देखकर सुना दिया फैसला, हाई कोर्ट ने लगाई फटकार

ट्रायल कोर्ट के जज ने मोबाइल एप पर आए नोटिफिकेशन के आधार पर आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी. जिसको लेकर अब हाई कोर्ड ने ट्रायल कोर्ट के जज को फटकार लगाते हुए अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए हैं. हाई कोर्ट ने इसको न्यायिक व्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक बताया है.

‘कम से कम आदेश पढ़ तो लेते...’ मोबाइल नोटिफिकेशन देखकर सुना दिया फैसला, हाई कोर्ट ने लगाई फटकार
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( Image Source:  ANI )
विशाल पुंडीर
Edited By: विशाल पुंडीर

Published on: 28 Nov 2025 11:10 AM

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक ट्रायल कोर्ट के जज ने मोबाइल एप पर आए नोटिफिकेशन के आधार पर आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी. हाई कोर्ट ने इस रवैये को गैर-जिम्मेदाराना और न्यायिक प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए कड़ी टिप्पणी की है. कोर्ट का कहना है कि किसी पॉप-अप अलर्ट या ऑनलाइन कानूनी ब्लॉग के नोटिफिकेशन को आधार बनाकर फैसला सुनाना न्यायिक व्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक है.

हाई कोर्ट ने साफ कहा कि अदालत के आदेश केवल रिपोर्टेड जजमेंट, आधिकारिक प्रकाशन या सबूतों पर ही आधारित होने चाहिए. डिजिटल पोर्टल के पॉप-अप अलर्ट किसी भी प्रकार से प्रामाणिक कानूनी स्रोत नहीं माने जा सकते.

हाई कोर्ट ने इसे नागरिकों की स्वतंत्रता का खतरा माना

यह मामला रामजी बनाम हरियाणा की अग्रिम जमानत याचिका से जुड़ा था. जांच के दौरान पता चला कि कुरुक्षेत्र के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने 11 जून 2025 को जमानत याचिका खारिज करते समय एक कानूनी मोबाइल एप पर आए पॉप-अप हेडलाइन को आधार बनाया था. जब हाई कोर्ट ने इस पर स्पष्टीकरण मांगा, तो जज ने खुद स्वीकार किया कि उसने वही नोटिफिकेशन देख कर निर्णय दिया और उसका स्क्रीनशॉट भी भेजा.

सुप्रीम कोर्ट का आदेश पढ़ने की भी नहीं समझी जरूरत

जस्टिस सुमित गोयल ने अपने आदेश में कहा कि यह स्पष्ट है कि ट्रायल कोर्ट के जज ने न तो सुप्रीम कोर्ट का पूरा आदेश पढ़ा और न उसकी मंशा को समझा. हाई कोर्ट ने इस मामले को बेहद गंभीर मानते हुए रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया है कि इसे मुख्य न्यायाधीश के सामने पेश किया जाए, ताकि अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार किया जा सके.

हाई कोर्ट ने दिया आदेश

इसके साथ ही हाई कोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के सभी न्यायिक अधिकारियों को ऑनलाइन सूचना एवं टेक्नोलॉजी के जिम्मेदार उपयोग पर स्पेशल ट्रेनिंग देने के आदेश भी दिए हैं. कोर्ट ने कहा कि तकनीक का उपयोग लाभदायक है, लेकिन उसके आधार पर बिना सच जाने निर्णय देना न्याय प्रणाली को कमजोर करता है.

हरियाणा न्‍यूज
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