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हरियाणा के 11 मेयरों की कुर्सी पर मंडराया खतरा, एक्ट की खामी से बढ़ा विवाद, 10 प्वॉइंट्स में समझें मामला

हरियाणा में पिछले कई वर्षों से नगर निगम मेयरों का चुनाव सीधे जनता के वोट से कराया जा रहा है. लेकिन अब एक कानूनी विसंगति को लेकर चर्चा तेज हो गई है. दावा किया जा रहा है कि राज्य के मूल कानून में आज भी मेयर के अप्रत्यक्ष चुनाव का प्रावधान मौजूद है, जबकि व्यवहार में प्रत्यक्ष चुनाव हो रहे हैं.

हरियाणा के 11 मेयरों की कुर्सी पर मंडराया खतरा, एक्ट की खामी से बढ़ा विवाद, 10 प्वॉइंट्स में समझें मामला
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क्यों हरियाणा के 11 मेयरों की कुर्सी पर मंडराया खतरा

( Image Source:  chatgpt )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत3 Mins Read

Updated on: 14 Jun 2026 6:10 PM IST

हरियाणा में नगर निगमों की राजनीति एक बार फिर बड़े विवाद में घिरती नजर आ रही है. राज्य के 11 शहरों में चुने गए मेयरों की कुर्सी पर कानूनी संकट के बादल मंडरा रहे हैं. वजह कानून और नियमों के बीच लंबे समय से चला आ रहा टकराव, जिसे अब एक्ट की खामी बताया जा रहा है.

दरअसल, 2018 में हरियाणा में मेयर चुनाव की प्रक्रिया में बदलाव करते हुए सीधे जनता से चुनाव की व्यवस्था लागू की गई थी, लेकिन पुराने कानून में अभी भी पार्षदों द्वारा मेयर चुनने का प्रावधान मौजूद बताया जा रहा है. इसी विरोधाभास ने अब पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इसी कानूनी उलझन के चलते 11 नगर निगमों के मेयरों की वैधता और भविष्य को लेकर बहस तेज हो गई है.

क्या है पूरा विवाद?

  1. हरियाणा में 2018 से मेयर का चुनाव सीधे जनता द्वारा किया जा रहा है. लेकिन 1994 के मूल कानून में अब भी लिखा है कि पार्षद अपने बीच से मेयर चुनेंगे.
  2. हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा 53 के अनुसार नगर निगम चुनाव के बाद चुने गए पार्षद पहली बैठक में अपने बीच से मेयर का चुनाव करेंगे.
  3. आज प्रदेश के सभी नगर निगमों में मेयर का चुनाव सीधे जनता के वोट से कराया जाता है. यानी लोग मेयर को सीधे चुनते हैं.
  4. सितंबर 2018 में राज्य सरकार ने मेयर के प्रत्यक्ष चुनाव का रास्ता साफ किया था. इसके बाद से मेयरों का सीधा चुनाव कराया जा रहा है.
  5. 2018 में चुनाव प्रक्रिया तो बदल दी गई, लेकिन मूल कानून की धारा 53 में जरूरी संशोधन नहीं किया गया. इसी वजह से कानूनी विरोधाभास बना हुआ है.
  6. नवंबर 2018 में चुनाव नियमों में बदलाव कर दिया गया था. नए नियम के अनुसार पहली बैठक में मंडल आयुक्त सीधे चुने गए मेयर और पार्षदों को शपथ दिलाते हैं.
  7. विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी स्थिति में नियम, कानून से ऊपर नहीं हो सकते. अगर दोनों में टकराव हो तो कानून को ही प्राथमिकता दी जाती है.
  8. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के अधिवक्ता हेमंत कुमार कई वर्षों से इस विसंगति की ओर सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग का ध्यान दिला रहे हैं.
  9. वर्तमान में हरियाणा के सभी 11 नगर निगमों में प्रत्यक्ष रूप से चुने गए मेयर कार्यरत हैं. हाल ही में अंबाला, पंचकूला और सोनीपत के मेयरों ने भी शपथ ली है.
  10. दिसंबर 2025 में हरियाणा नगर निकाय विधेयक 2025 पारित किया गया था, जिसमें इस त्रुटि को दूर करने का प्रयास किया गया है. हालांकि यह विधेयक अभी राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने कानून में भी स्पष्ट संशोधन जरूरी है ताकि भविष्य में किसी तरह का कानूनी विवाद न हो.
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