Dussehra 2026: दिल्ली में कहां-कहां होती है भव्य रामलीला? जानें कब से है शुरू
दिल्ली में दशहरे की तैयारियों के साथ रामलीला के मंच भी सजने लगे हैं. इस बार लाल किला, द्वारका सेक्टर-10, रामलीला मैदान और पीतमपुरा समेत राजधानी की कई जगहों पर रामकथा का मंचन देखने को मिलेगा.
जैसे ही शारदीय नवरात्रि शुरू होते हैं, दिल्ली के कई मैदानों में रामलीला की तैयारियां भी तेज हो जाती हैं. शाम ढलते ही मंच पर रामायण के पात्र नजर आने लगते हैं और भगवान राम की कहानी के साथ पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है. इस साल 11 अक्टूबर से रामलीला का सिलसिला शुरू होगा और 20 अक्टूबर 2026 को दशहरा मनाया जाएगा. इसी दिन बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के तौर पर रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाएगा.
रामलीला सिर्फ एक मंचन नहीं, बल्कि भगवान राम के जीवन और उनके आदर्शों की कहानी को लोगों तक पहुंचाने की पुरानी परंपरा है. इसमें राम के वनवास से लेकर सीता हरण, लंका युद्ध और रावण वध तक की घटनाएं दिखाई जाती हैं. दिल्ली में इसकी झलक कई अलग-अलग अंदाज में देखने को मिलती है. लाल किले के मैदान की लव-कुश रामलीला, श्री धार्मिक लीला कमेटी, असफ अली रोड का रामलीला मैदान, द्वारका सेक्टर-10, पीतमपुरा की ब्रॉडवे रामलीला और पंजाबी बाग प्रमुख जगहों में शामिल हैं.
दिल्ली में कहां देखें भव्य राम लीला?
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लाल किले के मैदान में जैसे ही रामलीला का मंच सजता है, पूरा इलाका अलग ही रंग में नजर आने लगता है. यहां होने वाली लव-कुश रामलीला दिल्ली के बड़े आयोजनों में शामिल है. ऊंचे-ऊंचे मंच, रोशनी, आधुनिक तकनीक और शानदार सजावट इसकी खासियत हैं. इस रामलीला में कई बार फिल्म और टीवी के कलाकार भी नजर आ चुके हैं. इस साल इसका आयोजन 11 से 21 अक्टूबर तक होने की जानकारी है. वहीं 20 अक्टूबर को दशहरे के दिन रावण दहन किया जाएगा, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है. इसी वजह से उस दिन इलाके में सुरक्षा के भी खास इंतजाम रहेंगे.
द्वारका सेक्टर-10
द्वारका सेक्टर-10 पहुंचते ही सबसे ज्यादा ध्यान यहां बनने वाले विशाल पुतलों पर जाता है. इस जगह की रामलीला में रावण के बड़े-बड़े पुतले खास आकर्षण रहते हैं. 2024 में यहां 211 फीट ऊंचा रावण का पुतला तैयार किया गया था, जिसे भारत का सबसे ऊंचा रावण पुतला बताया गया था. पिछले साल यहां रामलीला का आयोजन 22 सितंबर से 2 अक्टूबर तक हुआ था. हालांकि, 2026 के कार्यक्रम की तारीखें अभी सामने नहीं आई हैं, इसलिए जाने से पहले द्वारका श्री रामलीला सोसाइटी से इसकी जानकारी जरूर ले लें.
पीतमपुरा में कहां होती है रामलीला?
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अगर आप उत्तर या पश्चिमी दिल्ली में रहते हैं और रामलीला देखने के लिए बहुत दूर नहीं जाना चाहते, तो पीतमपुरा का ऑप्शन आपके लिए अच्छा हो सकता है. यहां आर्यन हेरिटेज फाउंडेशन की ओर से ब्रॉडवे रामलीला होती है. इसका अंदाज पारंपरिक रामलीला से थोड़ा अलग है, क्योंकि इसे खुले मैदान के मंचन के बजाय थिएटर शो की तरह पेश किया जाता है. इस साल यह रामलीला 14 से 19 अक्टूबर तक होने की जानकारी है.
लाल किला मैदान
लाल किला मैदान पहुंचते ही श्री धार्मिक लीला कमेटी की रामलीला में आपको पुरानी दिल्ली की परंपरा की झलक देखने को मिलती है. इस रामलीला की शुरुआत 1924 में हुई थी और तब से इसकी कहानी पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ रही है. यानी दिल्ली में इसे होते हुए 100 साल से भी ज्यादा का वक्त गुजर चुका है. यहां हाईटेक मंच और ज्यादा चमक-दमक के बजाय रामकथा को पारंपरिक तरीके से पेश करने पर जोर रहता है.
मंडी हाउस
अगर आप खुले मैदान में होने वाली पारंपरिक रामलीला के बजाय कुछ अलग अनुभव करना चाहते हैं, तो मंडी हाउस का श्रीराम भारतीय कला केंद्र आपके लिए खास हो सकता है. यहां रामकथा को रामलीला की तरह नहीं, बल्कि एक शानदार डांस-ड्रामा के जरिए मंच पर उतारा जाता है. इसमें भरतनाट्यम, कलारीपयट्टू, मयूरभंज छऊ और उत्तर भारत की लोक कलाओं का खूबसूरत मेल देखने को मिलता है.
करीब ढाई घंटे के इस मंचन में भगवान राम के जन्म से लेकर उनके राज्याभिषेक तक की कहानी को नृत्य और अभिनय के जरिए दिखाया जाता है. खास बात यह है कि इसका आयोजन दशहरे के बाद भी जारी रहता है और 1 नवंबर तक इसे देखा जा सकता है.




