घबराहट में तीसरी मंजिल से हाथ से गिरी बच्ची, आग में झुलसे शरीर; चश्मदीदों ने बयां किया पालम हादसे का भयावह मंजर
दिल्ली के पालम इलाके में हुए भीषण आग हादसे ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया.चश्मदीदों के मुताबिक, घबराहट के बीच तीसरी मंजिल से एक बच्ची हाथ से छूटकर नीचे गिर गई, जबकि ऊपर फंसे लोग आग और धुएं में मदद के लिए चीखते रहे.
दिल्ली के पालम इलाके की 18 मार्च की सुबह की शुरुआत बिल्कुल आम थी, लेकिन कुछ ही मिनटों में सब कुछ बदल गया. चीखों, आग की लपटों और धुएं के बीच एक परिवार जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा था. आसपास के लोग मदद के लिए दौड़े, लेकिन हालात इतने भयावह थे कि हर कोशिश नाकाम होती नजर आई.
जो लोग उस वक्त वहां मौजूद थे, उनकी आंखों के सामने जो मंजर था, उसे याद किसी की भी रूंह कांप जाएगी. किसी ने अपने सामने लोगों को मदद के लिए चीखते देखा, तो किसी ने अपनी जान बचाने के लिए जलते हुए इंसान को कूदते हुए. यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि कई अधूरी चीखों और टूटी उम्मीदों की कहानी बन गया.
मैंने चीखें सुनीं और सब कुछ बदल गया
सुबह करीब 6:40 बजे पास के एक स्कूल में पढ़ाने वाले मोहित कुमार अपनी दिन शुरू करने ही वाले थे कि अचानक पड़ोस से तेज चीखें सुनाई दीं. बाहर निकलते ही उन्होंने देखा कि सचिन कश्यप को छत पर खड़ा था, शरीर जला हुआ, बाल झुलसे हुए और हर जगह से खून बह रहा था. मोहित बिना वक्त गंवाए छत के पीछे पहुंचे और लोहे की सीढ़ी के सहारे ऊपर चढ़कर किसी तरह उसे सुरक्षित नीचे ले आए. नीचे बैठाकर जब उससे बाकी परिवार के बारे में पूछा गया, तो उसके कांपते शब्दों ने सबको सन्न कर दिया “मां दूसरी मंजिल पर हैं, बाकी सब ऊपर फंसे हैं.”
हाथों से गिरा बच्चा
हादसे के दौरान सबसे दर्दनाक पल तब आया, जब अनिल कश्यप अपनी छोटी बच्ची को बचाने के लिए छटपटा रहा था. पड़ोसी दीपक वासन ने बताया कि धुएं में उसने अपनी बेटी को नीचे फेंकने की कोशिश की, ताकि उसकी जान बच सके. नीचे खड़े लोगों ने उसे रोकने की कोशिश की, जिसके बाद सभी ने पत्थरों की मदद से शीशा तोड़ना चाहा, लेकिन कुछ नहीं हुआ. इसी दौरान दमकलकर्मियों ने अंदर पहुंचने के लिए इमारत का मुख्य लोहे का शटर हटाकर रास्ता बनाने की कोशिश की. लेकिन जैसे ही रास्ता खुला, सामने की ओर से आग और घना धुआं तेजी से फैलते हुए पूरी बिल्डिंग में छा गया. हालात अचानक इतने बेकाबू हो गए कि वहां मौजूद लोग कुछ समझ ही नहीं पाए. घबराहट और अफरा-तफरी के बीच अनिल के हाथ से उसकी बेटी छूट गई और वह सीधे नीचे गिर पड़ी. उसी वक्त अनिल भी संतुलन खोकर नीचे आ गिरा और घायल हो गया.
हाइड्रोलिक सीढ़ी थी खराब
सबसे पहले मौके पर पहुंचे कपड़ा व्यापारी योगेश शर्मा ने दावा किया कि इमारत के बाहर तैनात दमकल की हाइड्रोलिक सीढ़ी ने ठीक से काम नहीं किया, जिसके चलते दमकलकर्मी तीसरी मंजिल तक नहीं पहुंच सके. उसी मंजिल की बालकनी में परिवार के नौ लोग फंसे हुए थे और मदद का इंतजार कर रहे थे. वहीं, दमकल विभाग की ओर से इस आरोप को नकारते हुए कहा गया कि सीढ़ी में कोई तकनीकी खराबी नहीं थी. उसकी पहुंच सीमित थी और वह अधिकतम करीब 30 फीट यानी दूसरी मंजिल तक ही पहुंच सकती थी, जिसकी वजह से ऊपर तक पहुंच पाना संभव नहीं हो सका.




