दिवाली से पहले दिल्ली में फिर जहरीली हुई हवा, इस सीजन पहली बार AQI पहुंचा 300 के पार; 36 स्टेशनों पर बढ़ा प्रदूषण
दिल्ली में प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है. सोमवार की सुबह AQI 307 पहुंच गया और 36 मॉनिटरिंग स्टेशनों पर हवा बेहद खराब दर्ज की गई. मौसम विशेषज्ञों ने अगले 7 से 10 दिनों में दिल्ली-NCR में स्मॉग बढ़ने की आशंका जताई है.
दिल्ली की हवा एक बार फिर लोगों की सांसों पर भारी पड़ने लगी है. सोमवार सुबह राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) इस सीजन में पहली बार 300 के पार पहुंच गया. सुबह 7:05 बजे दिल्ली का AQI 307 दर्ज किया गया, जिसके साथ हवा की गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ यानी Very Poor श्रेणी में आ गई.
इससे एक दिन पहले रविवार को 24 घंटे का औसत AQI 261 था, जो खराब श्रेणी में आता है. शनिवार को यही आंकड़ा 117 और शुक्रवार को सिर्फ 60 दर्ज किया गया था. शुक्रवार को हुई भारी बारिश ने हवा से प्रदूषक तत्वों को काफी हद तक साफ कर दिया था. इसके चलते दिल्ली में चार साल में अक्टूबर का सबसे साफ दिन दर्ज हुआ था. लेकिन बारिश के बाद मिली राहत ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी और अब राजधानी में फिर धुंध की मोटी परत दिखाई देने लगी है.
जहांगीरपुरी में AQI पहुंचा 400 के पार
दिल्ली के 59 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों में से 58 के आंकड़े जारी हुए हैं, जिसके मुताबिक 36 स्टेशनों पर हवा की गुणवत्ता बेहद खराब दर्ज की गई, जबकि जहांगीरपुरी में AQI 417 के साथ स्थिति गंभीर श्रेणी में पहुंच गई. पांच स्टेशनों पर हवा मध्यम श्रेणी में रही और बाकी स्टेशनों पर AQI खराब दर्ज किया गया.
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, सोमवार सुबह 6 बजे तक 58 में से 51 मॉनिटरिंग स्टेशनों पर PM2.5 प्रमुख प्रदूषक था, जबकि बाकी सात स्टेशनों पर PM10 मुख्य प्रदूषक के रूप में दर्ज किया गया. रविवार को 57 में से 46 स्टेशनों पर PM2.5 और 11 पर PM10 प्रमुख प्रदूषक था.
दिल्ली में लगातार बढ़ रहा प्रदूषण
दिल्ली में प्रदूषण की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ज्यादातर मॉनिटरिंग स्टेशनों पर हवा की गुणवत्ता खराब से बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई है. जहांगीरपुरी में AQI 417 दर्ज किया गया, जो गंभीर श्रेणी में आता है. CPCB हवा की गुणवत्ता को AQI के आधार पर छह श्रेणियों में बांटता है;
- 0-50: अच्छी हवा
- 51-100: संतोषजनक
- 101-200: मध्यम
- 201-300: खराब
- 301-400: बेहद खराब
- 401-500: गंभीर
दिल्ली में इससे पहले 11 फरवरी को हवा की गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में पहुंची थी. उस दिन 24 घंटे का औसत AQI 305 दर्ज किया गया था. इससे पहले 4 फरवरी को यह आंकड़ा 339 तक पहुंचा था. अब अक्टूबर के आखिरी दिनों में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ने लगा है.
PM2.5 क्या है?
CPCB के आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार सुबह दिल्ली के 58 रिपोर्टिंग स्टेशनों में से 51 पर PM2.5 सबसे प्रमुख प्रदूषक रहा. बाकी सात स्टेशनों पर PM10 का स्तर प्रमुख रूप से दर्ज किया गया. रविवार सुबह भी 57 में से 46 स्टेशनों पर PM2.5 मुख्य प्रदूषक था. PM2.5 बेहद छोटे आकार के कण होते हैं, जो सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं. वहीं PM10 में अपेक्षाकृत बड़े आकार के प्रदूषक कण शामिल होते हैं. मॉनिटरिंग स्टेशनों के आंकड़े बताते हैं कि इस समय दिल्ली की हवा में सूक्ष्म कणों का प्रदूषण प्रमुख समस्या बना हुआ है.
दिवाली से पहले बढ़ी चिंता, पटाखों से और बिगड़ सकती है हवा
दिल्ली में प्रदूषण का स्तर ऐसे समय बढ़ रहा है, जब दिवाली में करीब एक सप्ताह का समय बचा है. आमतौर पर त्योहार के दौरान पटाखे जलाने से हवा में प्रदूषक तत्वों की मात्रा बढ़ जाती है. ऐसे में पहले से खराब हो रही हवा को लेकर चिंता और बढ़ गई है. बारिश के बाद दिल्ली को साफ हवा की जो राहत मिली थी, वह अब खत्म होती दिख रही है. आने वाले दिनों में मौसम की परिस्थितियां भी प्रदूषण को कम करने के बजाय उसे बढ़ाने में भूमिका निभा सकती हैं. दिवाली के दौरान पटाखों से होने वाला अतिरिक्त प्रदूषण राजधानी के लिए एक और चुनौती बन सकता है.
पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की 1,394 घटनाएं
दिल्ली-NCR में प्रदूषण के बीच पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं पर भी नजर रखी जा रही है. NASA के सैटेलाइट आंकड़ों के मुताबिक, 1 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच दोनों राज्यों में कुल 1,394 खेतों में आग लगने की घटनाएं दर्ज की गईं. इनमें पंजाब में 1,249 और हरियाणा में 145 मामले शामिल हैं. सिर्फ 1 नवंबर को 171 आग की घटनाएं दर्ज की गईं.
पिछले साल इसी अवधि में NASA के सैटेलाइट ने दोनों राज्यों में कुल 1,861 आग की घटनाएं दर्ज की थीं. हालांकि, इन आंकड़ों की सीधे तुलना करना पूरी तरह सही नहीं होगा. रिपोर्ट के मुताबिक, पराली जलाने की घटनाएं अब दिन के बाद के घंटों में ज्यादा हो रही हैं. 2025 में Meteosat सैटेलाइट से दर्ज आग की गर्मी में करीब 98 फीसदी घटनाएं दोपहर 3 बजे के बाद की थीं, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 94 फीसदी था. दोनों वर्षों के आंकड़ों में वास्तविक घटनाओं की संख्या कम दर्ज होने की आशंका है, क्योंकि ज्यादातर आग सैटेलाइट के दोपहर करीब 1:30 बजे गुजरने के बाद लगाई जा रही हैं.
अगले 7 से 10 दिन दिल्ली-NCR के लिए मुश्किल, स्मॉग बढ़ने की आशंका
मौसम विशेषज्ञ के अनुसार, दिल्ली-NCR में स्मॉग का मौसम शुरू हो चुका है. आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर और बढ़ सकता है. दिल्ली-NCR के ज्यादातर AQI सेंसर 300 से ऊपर का स्तर दिखा रहे हैं. कई जगह रात में AQI 400 से 500 के बीच पहुंच रहा है. हवा उत्तर-पश्चिम दिशा से चल रही है और उसकी गति धीमी है. ऐसी परिस्थितियों में प्रदूषक तत्व वातावरण में लंबे समय तक बने रह सकते हैं. अगले 7 से 10 दिनों तक मौसम में प्रदूषण को कम करने वाली अनुकूल परिस्थितियां बनने की उम्मीद नहीं है. ऐसे में दिल्ली-NCR के साथ उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में भी स्मॉग बढ़ सकता है.




