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पेट दर्द से गैंग्रीन और गॉलब्लैडर में छेद तक... इलाज में 8 दिन की देरी पड़ी भारी, अब अस्पताल-2 डॉक्टरों को देना होगा 5 लाख

इलाज में 8 दिन की देरी से कैंसर मरीज के गॉलब्लैडर में गैंग्रीन और छेद हुआ. दिल्ली कंज्यूमर कमीशन ने अस्पताल और 2 डॉक्टरों पर 5 लाख का मुआवजा लगाया.

पेट दर्द से गैंग्रीन और गॉलब्लैडर में छेद तक... इलाज में 8 दिन की देरी पड़ी भारी, अब अस्पताल-2 डॉक्टरों को देना होगा 5 लाख
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यह मामला सात साल पहले की है. कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही एक महिला पेट में तेज दर्द के बाद अस्पताल पहुंची. जांच में गॉलब्लैडर में गंभीर सूजन और संक्रमण के संकेत मिले, लेकिन सर्जरी में देरी होती गई. करीब आठ दिन बाद जब ऑपरेशन हुआ तो गॉलब्लैडर में गैंग्रीन, फोड़ा और छेद मिल चुका था. इलाज के बाद महिला को अस्पताल से छुट्टी मिली, लेकिन 18 फरवरी 2019 को उनकी मौत हो गई. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अब इस मामले में दिल्ली कंज्यूमर कमीशन द्वारका ने अस्पताल और दो डॉक्टरों को मेडिकल लापरवाही का जिम्मेदार माना है. कमीशन ने शिकायतकर्ता को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है.

पेट दर्द के बाद अस्पताल पहुंची कैंसर मरीज के साथ क्या हुआ?

यह मामला दिल्ली के द्वारका के चर्चित अस्पताल वेंकटेश्वर हॉस्पिटल में इलाज कराने वाली मीरा देवी से जुड़ा है. वह स्टेज-IV ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित थीं और कैंसर उनके मस्तिष्क तक फैल चुका था. 17 जनवरी 2019 को पेट में तेज दर्द और हल्के बुखार की शिकायत के बाद परिवार उन्हें अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर पहुंचा. जांच में उनका गॉलब्लैडर थोड़ा फैला हुआ मिला, उसमें कीचड़ जमा था और उसकी दीवार मोटी व सूजी हुई थी.

मेडिकल रिपोर्ट में एक्यूट कोलेसिस्टाइटिस यानी गॉलब्लैडर में गंभीर सूजन के संकेत मिले. उनका टोटल WBC काउंट करीब 20,000 था, जो गंभीर संक्रमण की ओर इशारा करता था.

सर्जरी में 8 दिन की देरी क्यों हुई?

शुरुआती जांच में संक्रमण और गॉलब्लैडर की गंभीर समस्या के संकेत मिलने के बावजूद तत्काल सर्जरी नहीं की गई. 19 जनवरी को मीरा देवी सर्जरी के आउटपेशेंट विभाग में पहुंचीं और उन्हें भर्ती कर लिया गया. 22 जनवरी को डॉक्टरों ने MRCP यानी मैग्नेटिक रेजोनेंस कोलैंजियोपैन्क्रिएटोग्राफी कराने की सलाह दी.

इसकी रिपोर्ट 23 जनवरी को आई, जिसमें गॉलब्लैडर के आसपास पेरिकोलेसिस्टिक कलेक्शन, कोलेसिस्टाइटिस और गॉलब्लैडर के फटने की आशंका सामने आई. इसके बावजूद सर्जरी 25 जनवरी को हुई. कमीशन ने कहा कि ऐसी गंभीर स्थिति में 72 घंटे के भीतर सर्जरी करने से जटिलताओं का खतरा काफी कम किया जा सकता है. आयोग ने इलाज और सर्जरी में हुई आठ दिन की देरी को मरीज की देखभाल के तय मानकों में गंभीर चूक माना.

सर्जरी के समय गॉलब्लैडर की हालत कितनी बिगड़ चुकी थी?

25 जनवरी को मीरा देवी की लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी की गई. ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों को गॉलब्लैडर में घने चिपकाव, गैंग्रीन, छेद और फोड़ा मिला. संक्रमण और गॉलब्लैडर की खराब स्थिति को देखते हुए सर्जरी के बाद वहां ड्रेन भी लगाया गया.

शिकायतकर्ता का आरोप था कि अगर शुरुआती चरण में ही गॉलब्लैडर की समस्या का उचित इलाज किया जाता, तो स्थिति इतनी गंभीर होने से बच सकती थी. इलाज के बाद मीरा देवी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, लेकिन 18 फरवरी 2019 को उनकी मौत हो गई.

कमीशन ने अस्पताल और डॉक्टरों को क्यों माना लापरवाही का दोषी?

इस मामले की सुनवाई डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन-VII, साउथ-वेस्ट दिल्ली ने की. कमीशन के प्रेसिडेंट सुरेश कुमार गुप्ता और सदस्य हर्षाली कौर की बेंच ने मामले में उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड और विशेषज्ञ की राय पर विचार किया. कमीशन ने माना कि 17 जनवरी को इमरजेंसी में पहुंचने के समय ही मरीज की जांच में एक्यूट कोलेसिस्टाइटिस और गंभीर संक्रमण के संकेत मौजूद थे.

इसके बावजूद बीमारी को समय पर मैनेज करने और जरूरी सर्जिकल इलाज में देरी हुई. कमीशन ने कहा कि एक्यूट कोलेसिस्टाइटिस की पहचान और उसके उचित प्रबंधन में अत्यधिक देरी के कारण मरीज की हालत बिगड़ी और सर्जरी के समय गैंग्रीन व परफोरेशन जैसी गंभीर स्थिति सामने आई. इसी आधार पर इसे मेडिकल लापरवाही माना गया.

किन डॉक्टरों को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया?

कमीशन ने द्वारका के वेंकटेश्वर हॉस्पिटल, सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. दिनेश चंद्र कटियार और गैस्ट्रो सर्जन डॉ. अनुपम साहा को शिकायतकर्ता ओ.पी. स्वामी को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया. यह रकम मरीज के परिवार को हुई मानसिक और शारीरिक परेशानी के साथ मुकदमे के खर्च को भी कवर करती है.

आदेश के मुताबिक मुआवजे का भुगतान तीन महीने के भीतर करना होगा. अगर तय अवधि में रकम नहीं दी जाती है तो 23 दिसंबर 2019, यानी शिकायत दर्ज किए जाने की तारीख से भुगतान होने तक 6 प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा.

क्या कैंसर के इलाज में भी अस्पताल की लापरवाही पाई गई?

कमीशन ने मीरा देवी के एडवांस्ड ब्रेस्ट कैंसर और ब्रेन मेटास्टेसिस के इलाज में कोई लापरवाही नहीं पाई. मामले की कार्रवाई के दौरान सामने आई मेडिकल एक्सपर्ट की राय में उन्हें टर्मिनल कैंसर और कई को-मॉर्बिडिटीज से पीड़ित बताया गया. उन्हें ब्रेन मेटास्टेसिस के लिए पैलिएटिव रेडियोथेरेपी दी गई थी. विशेषज्ञ की राय के मुताबिक सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जन और मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट की ओर से दिया गया इलाज स्टैंडर्ड ऑफ केयर के अनुरूप था.

कमीशन ने उस आरोप को भी खारिज कर दिया कि ब्रेन की रेडियोथेरेपी के कारण गॉलब्लैडर फटा, क्योंकि रेडिएशन केवल मस्तिष्क तक सीमित था. मरीज को दिया गया एंटी-सीजर ट्रीटमेंट भी मेडिकल केयर के अनुरूप माना गया.

गॉलब्लैडर की बीमारी में समय पर इलाज क्यों जरूरी है?

एक्यूट कोलेसिस्टाइटिस में गॉलब्लैडर में सूजन और संक्रमण बढ़ने पर स्थिति गंभीर हो सकती है. लंबे समय तक इलाज में देरी होने पर गॉलब्लैडर की दीवार में खून की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे गैंग्रीन यानी टिशू के मरने की स्थिति पैदा हो सकती है. संक्रमण और दबाव बढ़ने पर गॉलब्लैडर में छेद या परफोरेशन भी हो सकता है. इसके बाद संक्रमण पेट के अंदर फैल सकता है और गंभीर मामलों में सेप्सिस जैसी जानलेवा स्थिति का खतरा बढ़ सकता है. पेट के ऊपरी हिस्से, खासकर दाहिनी तरफ तेज दर्द, बुखार, मिचली, उल्टी या दर्द का पीठ और दाहिने कंधे तक जाना ऐसे लक्षण हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

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