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जवानी में किया गुनाह बुढ़ापे में मिली सजा! 33 साल पुराने गोलीकांड में 84 साल के बुजुर्ग को जेल

बिहार के वैशाली जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न्यायिक प्रक्रिया में लगने वाले लंबे समय को लेकर फिर चर्चा छेड़ दी है. वर्ष 1992 में दर्ज हुए एक हत्या के प्रयास के मामले में अदालत ने 34 साल बाद फैसला सुनाया है.

जवानी में किया गुनाह बुढ़ापे में मिली सजा! 33 साल पुराने गोलीकांड में 84 साल के बुजुर्ग को जेल
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( Image Source:  x-@gharkekalesh )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत3 Mins Read

Updated on: 2 Jun 2026 3:55 PM IST

मई 1992 में दर्ज हुआ एक मामला, और फैसला आया 2026 में. यानी न्याय मिलने में पूरे 34 साल लग गए. इस दौरान आरोपी जवान से बुजुर्ग हो गया, कई लोग दुनिया छोड़ गए और पूरा मामला इतिहास बनने की कगार पर पहुंच गया. ऐसे मामलों को देखकर अक्सर यह सवाल उठता है कि अगर न्याय पाने या सजा मिलने में तीन दशक से ज्यादा का समय लग जाए, तो क्या उसे समय पर मिला न्याय कहा जा सकता है?

बिहार के वैशाली जिले के इस मामले ने एक बार फिर न्याय व्यवस्था की धीमी रफ्तार पर बहस छेड़ दी है जिस शख्स पर गोलीबारी और हमले का आरोप था, उसे दोषी तो ठहराया गया, लेकिन तब जब उसकी उम्र 85 साल के करीब पहुंच चुकी है.

क्या था पूरा मामला?

यह मामला मई 1992 का है. जुधावनपुर गांव के रहने वाले अदालत राय ने शिकायत दर्ज कराई थी कि गांव में हुए एक विवाद के बाद पांच लोग हथियारों के साथ उनके घर पहुंचे थे. आरोप था कि आरोपियों ने उन पर और उनकी पत्नी पर हमला किया और गोलीबारी भी की. शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की. इसके बाद 1993 में पुलिस ने चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी. हालांकि, मुकदमे की सुनवाई वर्षों तक चलती रही.

33 साल तक चलता रहा मुकदमा

समय बीतने के साथ इस मामले में बड़ा बदलाव आया. जिन पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था, उनमें से चार आरोपियों की सुनवाई के दौरान ही मौत हो गई. आखिरकार जब अदालत ने फैसला सुनाया, तब केवल दीप राय ही जीवित थे और उन्हीं पर मुकदमा चल रहा था.

84 साल की उम्र में सुनाया गया दोषी करार

अब 84 वर्षीय दीप राय को अदालत ने दोषी ठहराया है. अदालत से बाहर निकलते समय उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. वीडियो में वह काफी कमजोर नजर आए और उन्हें सहारे के साथ कोर्ट परिसर से बाहर निकलना पड़ा. इस दृश्य ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि अपराध और फैसले के बीच कितना लंबा समय बीत चुका है.

किन धाराओं में दोषी पाए गए?

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी की अदालत ने दीप राय को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147 (दंगा), धारा 148 (घातक हथियार के साथ दंगा) और धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत दोषी पाया है. इसके अलावा उन्हें आर्म्स एक्ट की धारा 134 के तहत भी दोषी ठहराया गया है.

सजा का ऐलान अभी बाकी

अदालत ने दीप राय को दोषी तो करार दे दिया है, लेकिन उन्हें कितनी सजा मिलेगी, इसका फैसला अभी होना बाकी है. कोर्ट ने सजा सुनाने की तारीख बुधवार तय की है. यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि कई बार न्याय मिलने में इतना लंबा समय लग जाता है कि फैसला आने तक मामले से जुड़े ज्यादातर लोग इस दुनिया में नहीं रहते.

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