पढ़ाई पर सवाल, हत्या तक के आरोप, चुनाव में जिस पर सबसे ज्यादा वार; बिहार में अब उसी सम्राट की बहार
बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां सम्राट चौधरी को लेकर लंबे समय से उठते रहे आरोपों और विवादों के बावजूद अब वे राज्य की सत्ता में प्रमुख भूमिका में उभरकर सामने आए हैं. चुनाव के दौरान जिन मुद्दों पर उन्हें सबसे ज्यादा घेरा गया, उनमें उनकी शिक्षा से जुड़े सवाल और पुराने आपराधिक मामलों के आरोप शामिल रहे.
बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. 15 अप्रैल से राज्य की सत्ता में नया अध्याय शुरू होगा, जहां पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) का मुख्यमंत्री बनने जा रहा है. करीब दो दशकों तक सत्ता संभालने वाले नीतीश कुमार के बाद अब बिहार की कमान सम्राट चौधरी के हाथों में जाती दिख रही है. यह फैसला न सिर्फ राजनीतिक समीकरण बदल रहा है, बल्कि कई पुराने विवादों और आरोपों को भी एक बार फिर चर्चा में ले आया है.
चुनावी मंचों से लेकर मीडिया बहस तक, जिन मुद्दों पर सम्राट चौधरी को घेरा गया- आज वही चेहरे और वही आरोप फिर सुर्खियों में हैं. खास बात यह है कि इन आरोपों को सबसे ज्यादा जोर से उठाने वालों में चुनाव रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर का नाम सबसे आगे रहा है. आइए जानते हैं, आखिर क्या हैं वो विवाद, जिनके बीच सम्राट चौधरी अब बिहार के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं.
क्या सम्राट चौधरी पर हत्या के गंभीर आरोप लगे थे?
प्रशांत किशोर ने एक इंटरव्यू में सम्राट चौधरी पर गंभीर आरोप लगाए थे. उन्होंने कहा था कि 'बिहार में एक ऐसा व्यक्ति घूम रहा है जिसके ऊपर सात हत्या के आरोप हैं. ये मामला 1995 का है और तारापुर में आज भी डर के कारण कोई इनके खिलाफ बोलता नहीं है. 1995 में ये गिरफ्तार हुए और 1996 में उस केस के दो गवाहों की भी हत्या कर दी गई. जब वहां से भागने की कोशिश हुई तो लोगों ने इनके 6 लोगों को मार दिया.' इन आरोपों ने बिहार की राजनीति में काफी हलचल मचाई थी. हालांकि, इन मामलों को लेकर आधिकारिक स्तर पर स्थिति क्या रही, यह अलग जांच और कानूनी प्रक्रिया का विषय है, लेकिन राजनीतिक मंचों पर यह मुद्दा लगातार उठता रहा.
क्या उनकी पढ़ाई को लेकर भी उठे सवाल?
प्रशांत किशोर ने सिर्फ आरोप ही नहीं लगाए, बल्कि सम्राट चौधरी की शैक्षणिक योग्यता पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि 'मेरी तरफ से उनसे एक सवाल पूछिएगा कि 10वीं वे किस साल में पास किए हैं? वो सीधा जवाब नहीं देंगे." यह बयान भी राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बना और सोशल मीडिया से लेकर जनसभाओं तक चर्चा में रहा.
सम्राट चौधरी ने आरोपों पर क्या जवाब दिया?
जब सम्राट चौधरी से इन सवालों पर प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने सीधे तौर पर प्रशांत किशोर पर निशाना साधते हुए कहा कि 'उनके पास अनुभव की कमी है और वो बिहार को कम जानते हैं. सिर्फ बिहारी होना बिहार नहीं होता है. मैं 30 साल से बिहार में काम कर रहा हूं, ये सब नेता धंधा वाले हैं." पढ़ाई से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि 'मैं किसी व्यक्ति का जवाब नहीं देता हूं. मैंने PFC कोर्स किया है, कामराज यूनिवर्सिटी से किया है. जिसे जानकारी लेनी है, वो वहां जाकर ले सकता है." सम्राट चौधरी ने साफ तौर पर ये नहीं बताया था कि उन्होंने किस साल में 10वीं पास किया है.
क्या विवादों के बावजूद BJP ने सम्राट पर भरोसा जताया?
सवाल उठता है कि इतने विवादों और आरोपों के बावजूद भाजपा ने सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री चेहरा क्यों चुना? इसका जवाब पार्टी की रणनीति और बिहार के बदलते राजनीतिक समीकरणों में छिपा है. पार्टी नेतृत्व ने अनुभव, संगठन में पकड़ और लंबे राजनीतिक सफर को देखते हुए उन पर भरोसा जताया है.
क्या बिहार की राजनीति में यह सबसे बड़ा बदलाव है?
नीतीश कुमार के लंबे कार्यकाल के बाद सत्ता का यह बदलाव ऐतिहासिक माना जा रहा है. पहली बार भाजपा सीधे तौर पर मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने जा रही है. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि सम्राट चौधरी इन आरोपों और उम्मीदों के बीच किस तरह बिहार को आगे बढ़ाते हैं.




