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बिहार में ‘ढाई-ढाई’ का फॉर्मूला: सम्राट चौधरी CM, पर असली कंट्रोल किसके पास? कब होगा सत्ता का चेहरा साफ

बिहार में ‘ढाई-ढाई’ फॉर्मूला से सत्ता का खेल बदल गया है. CM सम्राट चौधरी के बावजूद BJP-JDU के बीच असली पावर शेयरिंग की लड़ाई जारी है, तस्वीर अभी साफ नहीं.

Samrat Choudhary CM Bihar cabinet 2026 BJP vs JDU
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बिहार में 15 अप्रैल को हुए सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल गई है. सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही नई सरकार का गठन तो हो गया, लेकिन असली चर्चा अब विभागों के बंटवारे और पावर शेयरिंग को लेकर है. कुल 47 विभागों में से 29 खुद मुख्यमंत्री के पास रहने से प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत दिख रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (यूनाइटेड) के बीच “ढाई-ढाई” के फॉर्मूले ने यह सवाल और गहरा कर दिया है कि असली ताकत किसके हाथ में है. वित्त, शिक्षा, गृह और स्वास्थ्य जैसे अहम मंत्रालयों का बंटवारा इस सत्ता समीकरण को और दिलचस्प बना देता है.

सत्ता परिवर्तन के बाद किसके हाथ में असली ताकत?

भारतीय जनता पार्टी (BJP) या जनता दल (यूनाइटेड) (JDU). फिलहाल, ऊपर से देखने पर मुख्यमंत्री पद BJP के पास जरूर गया है, लेकिन विभागों के बंटवारे ने सत्ता की एक संतुलित तस्वीर पेश की है, जिसमें JDU की पकड़ भी कमजोर नहीं दिखती.

29 विभाग अपने पास रखकर BJP ने बढ़त बना ली?

नई सरकार में 47 में से 29 विभाग खुद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने पास रखे हैं. इनमें गृह, स्वास्थ्य, पथ निर्माण, उद्योग और नगर विकास जैसे अहम मंत्रालय शामिल हैं. यह साफ संकेत है कि प्रशासनिक कमान BJP के हाथ में केंद्रित है. गृह विभाग और स्वास्थ्य जैसे बड़े मंत्रालय अपने पास रखकर BJP ने कानून-व्यवस्था और जनसेवा के बड़े फैसलों पर सीधा नियंत्रण रखा है.

5 सबसे ताकतवर विभागों में किसका पलड़ा भारी?

बिहार की राजनीति में गृह, वित्त, सड़क/परिवहन, शिक्षा और स्वास्थ्य को सबसे ताकतवर विभाग माना जाता है. इन पांच विभागों में दिलचस्प “ढाई-ढाई” का फॉर्मूला देखने को मिला है. गृह और स्वास्थ्य BJP के पास हैं, जबकि वित्त और शिक्षा JDU को मिले हैं. वहीं इंफ्रास्ट्रक्चर को दो हिस्सों में बांटा गया है. सड़क BJP के पास है और परिवहन JDU के पास. यह बंटवारा दिखाता है कि किसी एक दल को पूरी ताकत नहीं दी गई, बल्कि संतुलन बनाकर रखा गया है.

क्या JDU ने बिना CM बने भी गेम पलट दिया?

यहीं पर JDU की असली रणनीति सामने आती है. नीतीश कुमार भले ही मुख्यमंत्री पद से हट गए हों, लेकिन उन्होंने अपने भरोसेमंद नेताओं जैसे विजय कुमार चौधरी और बिजेन्द्र प्रसाद यादव को डिप्टी सीएम बनवाकर सरकार के भीतर मजबूत पकड़ बनाए रखी है. विजय कुमार चौधरी के पास शिक्षा, ग्रामीण विकास और परिवहन जैसे विभाग हैं, जो सीधे जनता से जुड़े 10 विभाग हैं. वहीं बिजेंद्र यादव को वित्त, ऊर्जा और योजना जैसे 8 मंत्रालय दिए गए हैं. जो सरकार की आर्थिक दिशा तय करते हैं.

वित्त और शिक्षा JDU के लिए सबसे बड़ा पावर सेंटर है?

अगर गहराई से देखें तो वित्त विभाग का JDU के पास जाना सबसे बड़ा संकेत है. किसी भी सरकार में फंड का कंट्रोल ही असली ताकत होता है. इसके अलावा, शिक्षा विभाग भी राजनीतिक रूप से बेहद अहम है, क्योंकि इसका असर युवाओं और बड़े वोट बैंक पर पड़ता है. इस तरह JDU ने ऐसे विभाग अपने पास रखे हैं, जो सीधे तौर पर नीतियों और संसाधनों को नियंत्रित करते हैं.

क्या BJP ने भी मजबूत पकड़ बनाए रखी है?

दूसरी तरफ BJP ने भी कोई कमजोर स्थिति नहीं ली है. मुख्यमंत्री पद, गृह विभाग, स्वास्थ्य और सड़क जैसे मंत्रालय अपने पास रखकर उसने प्रशासनिक और दिखने वाले विकास पर नियंत्रण रखा है. सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे विभाग जनता को सीधे दिखाई देते हैं, और इनका राजनीतिक फायदा चुनाव में मिलता है.

आखिर किसने मारी बाजी - BJP या JDU?

अगर पूरे समीकरण को देखें तो यह सीधी जीत या हार का मामला नहीं है, बल्कि पावर बैलेंस का उदाहरण है. फिर भी हल्का सा झुकाव JDU की तरफ नजर आता है. कारण साफ है, मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बावजूद JDU ने वित्त, शिक्षा और परिवहन जैसे रणनीतिक मंत्रालय अपने पास रखे हैं और डिप्टी सीएम के जरिए सरकार में मजबूत पकड़ बनाए रखी है.

सिर्फ चेहरा बदलने वाला सत्ता परिवर्तन है?

पूरी तस्वीर को देखें तो बिहार में सत्ता परिवर्तन जरूर हुआ है, लेकिन पावर स्ट्रक्चर पूरी तरह नहीं बदला है. BJP ने नेतृत्व का चेहरा बदला है, जबकि JDU ने सिस्टम के भीतर अपनी पकड़ बनाए रखी है.

क्या 4 मई के बाद होगा मंत्रिमंडल का विस्तार?

पांच राज्यों का विधानसभा चुनाव परिणाम 4 मई को आने के बाद बिहार में अन्य मंत्री बनाए जाएंगे. उसी समय अंतिम रूप से विभाग बनाए जाएंगे. यानी चार मई के बाद कैबिनेट विस्तार होगा. उसी के बाद सत्ता का संतुलन बिहार में साफ होगा, लेकिन सरकार पावर शेयरिंग का एक क्लासिक मॉडल नजर आती है, जहां दोनों दलों ने अपनी-अपनी ताकत के हिसाब से हिस्सेदारी तय की है. कुल मिलाकर सत्ता 'एक हाथ में नहीं', बल्कि एक डुअल पावर सिस्टम में चल रही है.

सम्राट चौधरी
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