बेगूसराय में मरीज के पैर में प्लास्टर की जगह बांधा कार्टन, वीडियो वायरल; कांग्रेस-RJD ने सरकार और स्वास्थ्य मंत्री पर साधा निशाना
बेगूसराय का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसने बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है. इस वीडियो में सड़क हादसे में घायल एक युवक के फ्रैक्चर पैर पर प्लास्टर की जगह कार्टन का टुकड़ा बंधा हुआ दिखाई दे रहा है.
बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन बेगूसराय से सामने आई यह घटना लोगों को सोचने पर मजबूर कर रही है कि आखिर सरकारी अस्पतालों में मरीजों को इलाज के दौरान किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ रहा है. मामला बेगूसराय के मंझौल अनुमंडलीय अस्पताल का है. यहां सड़क हादसे में घायल एक युवक को इलाज के लिए लाया गया था. आरोप है कि उसके टूटे हुए पैर पर प्लास्टर या उचित स्प्लिंट लगाने के बजाय कार्टन का टुकड़ा पैर में लगाकर बैंडेज कर दिया गया.
इसके बाद युवक को बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल बेगूसराय रेफर कर दिया गया. घटना का वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद सरकारी अस्पताल की सुविधाओं को लेकर सवाल उठने लगे.
सड़क हादसे में घायल हुआ था 20 साल का कृष्ण कुमार
बताया जा रहा है कि नावकोठी प्रखंड के महेशवाड़ा वार्ड नंबर 4 के रहने वाले 20 वर्षीय कृष्ण कुमार सड़क दुर्घटना में घायल हो गए थे. वे स्नातक के छात्र हैं. हादसे के बाद परिवार के लोग उन्हें इलाज की उम्मीद में मंझौल अनुमंडलीय अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन वहां पैर के इलाज को लेकर जो व्यवस्था की गई, उसने परिजनों को हैरान कर दिया.
परिजनों का आरोप है कि युवक के पैर में फ्रैक्चर था. ऐसे में प्लास्टर या स्प्लिंट की जरूरत थी, लेकिन अस्पताल में सामान पैक करने वाले कार्टन के टुकड़े को पैर के सहारे के तौर पर इस्तेमाल कर उसे बांध दिया गया. इसके बाद युवक को सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया.
अस्पताल प्रशासन ने क्या सफाई दी?
मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने भी अपनी तरफ से सफाई दी है. अधिकारियों के मुताबिक, युवक को आपात स्थिति में प्राथमिक उपचार दिया गया था. अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीज की हालत को देखते हुए तत्काल उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए पैर को स्थिर रखने के लिए कार्टन का सहारा लिया गया, ताकि उसे रेफर किए जाने के दौरान पैर को और नुकसान न पहुंचे. यानी अस्पताल की ओर से इसे अंतिम इलाज नहीं, बल्कि रेफर करने से पहले की गई अस्थायी व्यवस्था बताया गया है.
जांच के आदेश, रिपोर्ट के बाद तस्वीर साफ होगी
विवाद बढ़ने के बाद अस्पताल प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं. अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में वास्तव में इलाज में लापरवाही हुई या फिर आपात स्थिति में उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल किया गया.
फिलहाल युवक के परिजन और स्थानीय लोग इस घटना को लेकर नाराज हैं. उनका सवाल है कि अगर सरकारी अस्पताल में फ्रैक्चर मरीज के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होंगी, तो दुर्घटना के बाद अस्पताल पहुंचने वाले आम लोगों को समय पर बेहतर इलाज कैसे मिलेगा?
RJD ने स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार पर साधा निशाना
घटना के बाद बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है. RJD ने घटना को लेकर सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर निशाना साधा. पार्टी ने सवाल उठाया कि अगर अस्पतालों में जरूरी साधन और संसाधन पर्याप्त नहीं होंगे तो डॉक्टर क्या करेंगे. RJD ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग का ध्यान अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने के बजाय स्वास्थ्य मंत्री की छवि बनाने पर ज्यादा है.
"स्वास्थ्य विभाग का ध्यान स्वास्थ्य मंत्री की छवि बनाने पर अधिक है"
RJD ने कहा, "बेगूसराय में सड़क दुर्घटना में घायल एक युवक के पैर में प्लास्टर करने के बजाय डॉक्टरों को गत्ता बांधकर आगे रेफर करना पड़ा. जब सभी आवश्यक साधन एवं संसाधन पर्याप्त मात्रा में नहीं होंगे तो डॉक्टर क्या करेंगे? राष्ट्रीय जनता दल ने कहा कि अभी बिहार के स्वास्थ्य विभाग का ध्यान अस्पतालों की दशा सुधारने के बजाय बिहार के स्वास्थ्य मंत्री की छवि बनाने पर अधिक है. सब कुछ 'सेट अप' करके स्वास्थ्य विभाग को उन्हें कभी संवेदनशील नेता दिखाना है, कभी भावुक इंसान तो कभी तत्पर राजनेता दिखाना है तो कभी एक फायर ब्रांड युवा नेता दिखाना है. फिलहाल बिहार के स्वास्थ्य विभाग के अस्तित्व का एकमात्र लक्ष्य यही है."
कांग्रेस बोली- शर्मनाक तस्वीर
कांग्रेस ने इसे बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की 'शर्मनाक तस्वीर' बताते हुए सरकार पर हमला बोला. कांग्रेस ने दावा किया कि यह कोई अकेली घटना नहीं है. राज्य के सरकारी अस्पतालों की हालत लगातार खराब हो रही है. कांग्रेस ने अपने बयान में सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर कई गंभीर आरोप भी लगाए.
कांग्रेस ने कहा, "बेगूसराय में एक युवक का पैर टूटने पर प्लास्टर की जगह कार्टन बांध दिया गया. ये बिहार के 'डबल इंजन' सरकार की शर्मनाक तस्वीर है. लेकिन ये पहली घटना नहीं है. बिहार में सरकारी अस्पतालों की हालत बद से बदतर है. कभी चूहे मरीजों की आंख और पैर कुतर देते हैं तो कभी बेड पर कुत्ते सोते हुए दिखाई पड़ते हैं. ये न सिर्फ लापरवाही, बल्कि संवेदनहीनता की हद है. BJP सरकार ने बिहार के हेल्थ सिस्टम को गर्त में धकेल दिया है. शर्म आनी चाहिए.
सवाल सिर्फ कार्टन का नहीं, व्यवस्था का है
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कार्टन का इस्तेमाल आपात स्थिति में पैर को अस्थायी रूप से स्थिर करने के लिए किया गया था या अस्पताल में जरूरी मेडिकल संसाधनों की कमी थी? इसका जवाब जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा... लेकिन इस घटना ने एक बार फिर उस आम मरीज की चिंता सामने ला दी है, जो हादसे के बाद सरकारी अस्पताल पहुंचता है और उम्मीद करता है कि वहां उसे समय पर जरूरी इलाज और सुविधाएं मिलेंगी.
फिलहाल जांच रिपोर्ट का इंतजार है. उसके बाद ही यह तय हो सकेगा कि मामला संसाधनों की कमी का था, आपातकालीन प्राथमिक उपचार का या फिर वास्तव में चिकित्सा लापरवाही का.




