कौन थे फखरुद्दीन अली अहमद, जिनके नाम पर मेडिकल कॉलेज नहीं आया असम सरकार को पसंद!
असम सरकार ने हाल ही में फखरुद्दीन अली अहमद मेडिकल कॉलेज का नाम बदलकर Barpeta Medical College करने का फैसला किया. लेकिन सवाल ये उठता है कि आखिर कौन थे फखरुद्दीन अली अहमद, जिनके नाम पर कॉलेज रखा गया था और अब यह नाम क्यों बदल गया?
असम की हिमंता बिस्वा सरमा सरकार ने एक नया फैसला लिया है. दरअसल सरकार ने फखरुद्दीन अली अहमद मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल का नाम बदल दिया है, जिसे अब बारपेटा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल कहा जाएगा. इस बारे में सीएम हिमंता बिस्वा सरना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि कॉलेज के नाम से अक्सर लोग कंफ्यूज हो जाते हैं कि यह सरकारी है या प्राइवेट.
साथ ही, सरकारी मेडिकल कॉलेज उसी जगह के नाम पर रखे जाते हैं जहां वे स्थित हैं. ऐसे में सरकार ने भम की स्थिती दूर करने के लिए यह फैसला लिया है. ऐसे में चलिए जानते हैं कौन थे फखरुद्दीन अली अहमद?
कौन थे फखरुद्दीन अली अहमद?
फखरुद्दीन अली अहमद का जन्म 13 मई 1905 को पुरानी दिल्ली में हुआ था. उनके पिता असम के एक सेना अधिकारी थे. नेता ने दिल्ली से शुरुआती पढ़ाई की. इसके बाद वह लॉ पढ़ने के लिए इंग्लैंड चले गए. और 1928 में वह Inner Temple, London से बैरिस्टर बने और भारत लौटकर लॉ प्रैक्टिस करने लगे. अहमद ने लाहौर और बाद में गुवाहाटी में वकालत की. फखरुद्दीन अली अहमद भारत के पांचवे राष्ट्रपति रह चुके हैं. उन्होंने 1974 से 1977 तक राष्ट्रपति पद संभाला.
कब शुरू किया राजनीति में करियर?
1930 के दशक में अहमद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े. 1937 में वह असम विधान सभा के सदस्य बने और 1938-39 तक वित्त, राजस्व और श्रम मंत्री के रूप में कार्य किया. उन्होंने असम में कई कर सुधार किए, जिनमें कृषि आय कर और मनोरंजन कर शामिल थे. इन सुधारों से चाय बागानों के मजदूरों और आम जनता को लाभ मिला. फखरुद्दीन क्वीट इंडिया आंदोलन (1942) के दौरान गिरफ्तार भी हुए और एक साल तक जेल में रहे. उन्होंने मुस्लिम लीग के पाकिस्तान बनाने की मांग और भारत विभाजन का विरोध किया.
किन पदों पर किया काम?
अपने कार्यकाल में फखरुद्दीन ने कई पद संभाले. वह 1957 से 1966 तक अहमद असम के वित्त मंत्री रहे. 1966 में उन्हें प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने केंद्रीय कैबिनेट मंत्री बनाया. इसके अलावा, उन्होंने पावर, सिंचाई, उद्योग और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले. उनके प्रशासनिक अनुभव और ईमानदारी ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाया. राष्ट्रपति के रूप में उन्होंने अगस्त 1975 में आपातकाल लागू किया और इंदिरा गांधी द्वारा तैयार किए गए कई अध्यादेशों और संवैधानिक संशोधनों को मंजूरी दी. इस दौरान उन्हें कुछ आलोचना का भी सामना करना पड़ा, खासकर प्रेस और विपक्ष द्वारा. साल 1977 में दिल का दौरा पड़ने से पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन की मौत हो गई थी.




