कौन हैं खड़ेश्री बाबा, शिवम रोरिकर और शिखा शर्मा, जो अंबुबाजी महायोग में शामिल होने पहुंचे कामाख्या धाम?
असम के प्रसिद्ध मां कामाख्या मंदिर में अंबुबाची महायोग को लेकर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है. मंदिर प्रशासन ने दर्शन को आसान बनाने के लिए टोकन व्यवस्था शुरू कर दी है. इस बीच देश-विदेश से आए साधक, भक्त और तपस्वी अपनी आस्था और साधना से लोगों का ध्यान खींच रहे हैं.
Kamakhya Temple Ambubachi Mahayog 2026
Kamakhya Temple Ambubachi Mahayog 2026: मां कामाख्या मंदिर के मुख्य पुजारी कविंद्र प्रसाद शर्मा ने बताया कि इस वर्ष अंबुबाची मेले में 8 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है. उन्होंने कहा कि मां कामाख्या मंदिर के कपाट खुलने के बाद श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए टोकन व्यवस्था लागू की गई है. आज से ही टोकन वितरण शुरू कर दिया गया है. टोकन के माध्यम से श्रद्धालु व्यवस्थित और सुगमता से मां के दर्शन कर सकेंगे.
मुख्य पुजारी ने अंबुबाची पर्व की महत्ता बताते हुए कहा कि यह पर्व मां कामाख्या के रजस्वला काल से जुड़ा हुआ है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में मां शक्ति स्वरूपा की सृजन शक्ति का उत्सव मनाया जाता है. यही कारण है कि अंबुबाची महायोग को शक्ति साधना, तंत्र साधना और देवी उपासना का सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है.
कौन हैं शिखा शर्मा?
असम की शिखा शर्मा पेशे से एक सरकारी कर्मचारी हैं, लेकिन व्यस्त दिनचर्या के बीच भी उन्होंने सात्विक जीवन और आध्यात्मिक साधना को अपनी दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया हुआ है. मां कामाख्या की अनन्य भक्त शिखा शर्मा अंबुबाची महायोग को विशेष आध्यात्मिक महत्व का पर्व मानती हैं. उनका कहना है कि अंबुबाची केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, शक्ति साधना और मां के प्रति समर्पण का अवसर है.
कौन हैं शिवम रोरिकर?
ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में सफल व्यवसाय संचालित करने वाले और करीब 1000 लोगों को रोजगार देने वाले शिवम रोरिकर इन दिनों मां कामाख्या की भक्ति में पूरी तरह लीन हैं. मूल रूप से हैदराबाद से जुड़े शिवम अब ऑस्ट्रेलिया के नागरिक हैं, लेकिन अंबुबाची महायोग के अवसर पर वे अपना व्यस्त कारोबारी जीवन छोड़कर नीलाचल पर्वत पहुंचे हैं. शिवाय, श्रीमहंत विजय पुरी महाराज के सान्निध्य में मां कामाख्या की आराधना और साधना में जुटे हुए हैं. उन्होंने बताया कि इस आध्यात्मिक यात्रा के दौरान उन्होंने बर्गर, पिज्जा और अन्य फास्ट फूड से दूरी बनाकर सात्विक भोजन को अपनाया है.
कौन हैं खड़ेश्री बाबा?
खड़ेश्री बाबा इन दिनों अपनी अनोखी और कठिन साधना को लेकर चर्चा में हैं. वे पिछले दो वर्षों से लगातार खड़े रहकर तपस्या कर रहे हैं और उनका संकल्प है कि वे इसी तरह अगले 12 वर्षों तक साधना जारी रखेंगे. बाबा का कहना है कि यह कोई शारीरिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि उनके ध्यान और साधना का एक विशेष रूप है. वे इसे आत्म-नियंत्रण और आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ाने की प्रक्रिया मानते हैं.




