'Zubeen Garg ने 3 हजार गाने गाए’ वाले बयान पर मचा बवाल तो BJP MLA विजय गुप्ता ने मांगी माफी; सिमंता शेखर बोले- पहले पढ़िए
बीजेपी विधायक विजय गुप्ता ने जुबिन गर्ग को लेकर की गई अपनी टिप्पणियों पर विवाद बढ़ने के बाद माफी मांग ली है. गुप्ता ने जुबिन के नाम, शुरुआती संगीत सफर और गानों की संख्या को लेकर कई दावे किए थे, जिन पर सोशल मीडिया पर सवाल उठे.
असम के मशहूर गायक और संगीतकार जुबिन गर्ग को लेकर बीजेपी विधायक विजय गुप्ता की कुछ टिप्पणियों ने विवाद खड़ा कर दिया. जुबिन गर्ग की पहली पुण्यतिथि के मौके पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में विधायक ने उनके नाम, संगीत करियर और गानों की संख्या को लेकर ऐसी बातें कहीं, जिन पर सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए. मामला बढ़ा तो विधायक ने रविवार को सफाई देते हुए अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांग ली.
दरअसल, शनिवार को फांसी बाजार में जुबिन गर्ग को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित कार्यक्रम में विजय गुप्ता ने जुबिन के शुरुआती जीवन और संगीत सफर का जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि जन्म के समय जुबिन का नाम ‘जुबिन बरठाकुर’ था और बाद में 19 साल की उम्र में मशहूर संगीतकार जुबिन मेहता के नाम से प्रेरित होकर उनका नाम जुबिन किया गया.
विधायक ने यह भी कहा कि 19 साल की उम्र जुबिन गर्ग के संगीत सफर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव थी. इसी दौर में उनका पहला एल्बम आया था. जुबिन का पहला असमिया एल्बम ‘अनामिका’ 1992 में रिलीज हुआ था, जब वह 19 साल के थे. असम से जुड़े कई प्रकाशित प्रोफाइल भी इस जानकारी की पुष्टि करते हैं.
किस पर बढ़ा विवाद?
हालांकि, विवाद सबसे ज्यादा उस वक्त बढ़ा, जब विजय गुप्ता ने जुबिन गर्ग की रिकॉर्ड की गई गानों की संख्या और भाषाओं को लेकर दावा किया. उनके मुताबिक, जुबिन ने करीब 40 भाषाओं में लगभग 3 हजार गाने गाए थे. यही आंकड़ा सोशल मीडिया पर लोगों के निशाने पर आ गया. जुबिन गर्ग के करियर से जुड़े प्रकाशित विवरणों में उनके रिकॉर्ड किए गए गानों की संख्या इससे कई गुना ज्यादा बताई गई है. Business Standard ने उनके करीब 38 हजार गानों और 40 भाषाओं में काम करने का उल्लेख किया है, जबकि अन्य प्रकाशित डिस्कोग्राफी आंकड़े कुल रिकॉर्ड किए गए गानों की संख्या 40 हजार तक बताते हैं.
जुबिन के नाम और संगीत सफर पर भी उठे सवाल
विजय गुप्ता की टिप्पणी सिर्फ गानों की संख्या तक सीमित नहीं थी. उन्होंने जुबिन के नाम और उनके शुरुआती संगीत सफर को लेकर भी कई बातें कहीं. जुबिन गर्ग ने 1992 में ‘अनामिका’ से असमिया संगीत की दुनिया में अपनी पहचान बनानी शुरू की थी. इसके बाद उनका सफर लगातार आगे बढ़ता गया. असमिया संगीत के साथ उन्होंने हिंदी, बंगाली और कई दूसरी भाषाओं में भी अपनी आवाज दी.
जुबिन गर्ग की पहचान सिर्फ एक गायक तक सीमित नहीं रही. वह संगीतकार, गीतकार, अभिनेता और फिल्म निर्देशक के तौर पर भी सक्रिय रहे. तीन दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने असम की स्थानीय संस्कृति और संगीत को व्यापक पहचान दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई. Business Standard के मुताबिक उनकी रिकॉर्डिंग का दायरा करीब 40 भाषाओं तक पहुंचा था.
यही वजह है कि जुबिन को लेकर किसी भी टिप्पणी पर असम में प्रतिक्रिया सामान्य से ज्यादा भावनात्मक होती है. उनके प्रशंसकों के लिए वह सिर्फ एक गायक नहीं, बल्कि असम की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे.
‘Mission China’ को लेकर भी चर्चा
विजय गुप्ता ने जूबीन के फिल्मी सफर का जिक्र करते हुए ‘Mission China’ का भी नाम लिया. यहां भी एक तथ्य साफ करना जरूरी है. ‘Mission China’ कोई ऐसी फिल्म नहीं थी, जिसे जुबिन ने केवल गाने के स्तर पर जोड़ा हो. वह 2017 में रिलीज हुई असमिया एक्शन फिल्म थी, जिसके निर्देशक और निर्माता के तौर पर जुबिन गर्ग जुड़े थे. फिल्म में उन्होंने अभिनय भी किया और संगीत से भी जुड़े रहे.
फिल्म का साउंडट्रैक 2016 में रिलीज हुआ था और इसमें जुबिन गर्ग समेत कई गायकों ने आवाज दी थी. यानी जुबिन का ‘Mission China’ से जुड़ाव वास्तविक था, लेकिन उनके पूरे फिल्मी और संगीत करियर को सिर्फ इस एक प्रोजेक्ट तक सीमित करके देखना उनकी व्यापक भूमिका की पूरी तस्वीर नहीं देता.
सोशल मीडिया पर बढ़ा विरोध तो विधायक ने मांगी माफी
विजय गुप्ता की टिप्पणियों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा. लोगों ने खास तौर पर जुबिन के गानों की संख्या को लेकर किए गए दावे पर सवाल उठाए. इसके बाद रविवार को विधायक ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सफाई दी. उन्होंने कहा कि उन्हें 30 हजार से ज्यादा कहना चाहिए था, लेकिन गलती से उन्होंने 3 हजार से ज्यादा कह दिया. उन्होंने इसे अनजाने में हुई गलती बताते हुए जूबीन के परिवार, प्रशंसकों और लोगों से माफी मांगी.
विजय गुप्ता ने यह भी कहा कि जुबिन उनके लिए असम की आत्मा और दिल की धड़कन हैं. वह उनकी संगीत विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए काम करना चाहते हैं.
सिमंता शेखर ने कहा, ‘पहले जुबिन को पढ़िए’
विवाद के बीच गायक सिमंता शेखर की प्रतिक्रिया भी सामने आई. उन्होंने विधायक की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें सलाह दी कि सार्वजनिक रूप से जुबिन गर्ग पर बोलने से पहले उनके संगीत, योगदान और असम की सांस्कृतिक भूमिका को समझना चाहिए. सिमंता शेखर का कहना था कि किसी व्यक्ति की राजनीतिक पहचान अपनी जगह हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किसी सांस्कृतिक शख्सियत के बारे में बिना पर्याप्त जानकारी के टिप्पणी की जाए.
जुबिन की विरासत सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं
जुबिन गर्ग के करियर को देखें तो उनका योगदान हजारों गानों के आंकड़े से कहीं आगे जाता है. उन्होंने असमिया के साथ हिंदी, बंगाली और कई अन्य भाषाओं में काम किया. उनके चर्चित हिंदी गीतों में ‘या आली’ भी शामिल है, जिसने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई. उनकी रिकॉर्डिंग को लेकर अलग-अलग स्रोतों में संख्या 38 हजार से 40 हजार से ज्यादा तक बताई गई है, लेकिन सभी उपलब्ध विवरण इस बात पर सहमत हैं कि उनका रिकॉर्डिंग आउटपुट असाधारण रूप से बड़ा था.
19 सितंबर 2025 को जुबिन गर्ग के निधन के बाद असम में जिस तरह बड़े पैमाने पर शोक और श्रद्धांजलि का दौर देखने को मिला, उससे उनके सांस्कृतिक प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है. उनकी पहली पुण्यतिथि पर भी उनके प्रशंसकों, कलाकारों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों ने उन्हें याद किया.
ऐसे में विजय गुप्ता की टिप्पणी पर हुआ विवाद सिर्फ एक गलत आंकड़े तक सीमित नहीं रहा. इसने फिर यह बहस छेड़ दी कि असम की सांस्कृतिक विरासत के सबसे बड़े चेहरों में शामिल जुबिन गर्ग के बारे में सार्वजनिक मंचों पर बोलते समय तथ्यों और उनके योगदान को कितनी सावधानी से समझना जरूरी है.




