EMI पर 6 महीने की राहत से लेकर स्कूलों की मरम्मत तक, बाढ़ पीड़ितों के लिए असम सरकार का बड़ा ऐलान; अनन्या बिड़ला से क्या बोली लड़की?
असम में बाढ़ से अब तक 80 लोगों की मौत हो चुकी है. सरकार ने प्रभावित लोगों के लिए 6 महीने की लोन EMI राहत, अतिरिक्त आर्थिक मदद, बीमा दावों के निपटारे और स्कूलों की मरम्मत समेत कई बड़े फैसले किए हैं. इसी बीच अनन्या बिड़ला भी बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचीं और लोगों से मुलाकात कर राहत कार्यों में सहयोग किया.
असम में आई भीषण बाढ़ ने हजारों परिवारों की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है. कई इलाकों में घर, दुकानें, सड़कें और दूसरी संपत्तियां पानी और कटाव की चपेट में आई हैं. प्रशासन के मुताबिक स्थिति में कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन ऊपरी असम के कई हिस्सों में लोगों की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं. गुरुवार तक चार जिलों, चराइदेव, शिवसागर, जोरहाट और गोलाघाट, में करीब 2.12 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित थे. असम स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी यानी ASDMA के मुताबिक पिछले 24 घंटे में दो और लोगों की मौत हुई, जिसके बाद इस साल बाढ़ से मरने वालों की संख्या 80 हो गई है.
चराइदेव सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में रहा, जहां करीब 80 हजार लोग बाढ़ की चपेट में हैं. इसके बाद शिवसागर में लगभग 71 हजार और जोरहाट में करीब 40 हजार लोग प्रभावित हैं. प्रशासन ने चारों जिलों में 112 राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र चलाए हैं, जहां करीब 75,583 प्रभावित लोगों को मदद दी जा रही है. State Mirror की टीम ने भी जहां बाढ़ पीड़ितों तक राहत सामग्री पहुंचाई. वहीं, Ground Zero से इस भयावह हालात की ज़मीनी रिपोर्ट भी आपके सामने रखी.
बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचीं अनन्या बिड़ला
बाढ़ के इस मुश्किल दौर में सामाजिक स्तर पर भी राहत की कोशिशें जारी हैं. आदित्य बिड़ला समूह की निदेशक अनन्या बिड़ला असम के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचीं और प्रभावित परिवारों से मुलाकात की. उन्होंने राहत सामग्री पहुंचाने के प्रयासों में सहयोग किया और बाढ़ के बीच लोगों की परेशानियों को करीब से समझा.
ग्राउंड जीरो पर कई परिवारों की कहानी बेहद दर्दनाक है. एक बाढ़ पीड़ित युवती ने अनन्या बिड़ला को अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वह मॉडलिंग कर रही थी, लेकिन बाढ़ में उसका पूरा सामान डूब गया. ऐसी कई कहानियां हैं, जो यह बताती हैं कि प्राकृतिक आपदा का असर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों की पढ़ाई, रोजगार और भविष्य की योजनाओं को भी प्रभावित करता है.
असम बाढ़ से जुड़े लेटेस्ट अपडेट्स
- कई इलाकों में तेज बहाव के कारण जमीन लगातार कट रही है. एक गांव में नदी के किनारे बना घर देखते ही देखते कटाव की जद में आता नजर आया. परिवार अपने आशियाने को आंखों के सामने उजड़ता देखकर बेहद परेशान दिखे.
- बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए असम सरकार ने सबसे बड़ी राहत में से एक 6 महीने के लोन मोरेटोरियम का ऐलान किया है. यानी प्रभावित लोगों को फिलहाल छह महीने तक अपने कर्ज की किस्त चुकाने से राहत मिलेगी.
- मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बताया कि स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी की बैठक में RBI, NABARD, SBI और दूसरे बैंकों के प्रतिनिधियों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा हुई. फिलहाल यह राहत शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट के बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए लागू की गई है. हालांकि, इसका फायदा केवल उन्हीं लोगों को मिलेगा जो वास्तव में बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. सरकार ने बाकी लोगों से अपील की है कि अगर वे बाढ़ से प्रभावित नहीं हैं तो अपनी EMI सामान्य तरीके से जमा करते रहें.
- सरकार ने सिर्फ EMI टालने की सुविधा ही नहीं दी है. बाढ़ प्रभावित लोगों के कर्ज की अवधि भी जरूरत और कर्ज के प्रकार के हिसाब से एक साल से बढ़ाकर सात साल तक की जा सकती है.
- छोटे दुकानदारों के लिए भी राहत का ऐलान किया गया है. जिन दुकानदारों की दुकानें बाढ़ में पूरी तरह तबाह हो गई हैं, उनके लोन खाते में बैंक 10 हजार रुपये की अतिरिक्त राशि दे सकते हैं. इसके लिए किसी नए मॉर्गेज या अतिरिक्त गारंटी की जरूरत नहीं होगी.
- सरकार ने NBFC से कर्ज लेने वाले लोगों को भी राहत दिलाने की तैयारी शुरू कर दी है. इसके लिए 5 अगस्त को NBFC कंपनियों के साथ बैठक प्रस्तावित है.
- सरकार ने प्रभावित परिवारों के लिए 15 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने का भी ऐलान किया है. मुख्यमंत्री के मुताबिक इस सहायता के लिए आकलन का काम जल्द पूरा किया जाएगा और इसके बाद राशि बांटने की प्रक्रिया शुरू होगी.
- स्थायी नुकसान का आकलन भी 7 अगस्त से शुरू किया जाएगा. जिला प्रशासन और राजस्व विभाग मिलकर घरों और दूसरी संपत्तियों को हुए नुकसान का सर्वे करेंगे. सरकार के मुताबिक यह प्रक्रिया करीब 10 से 15 दिनों में पूरी करने का लक्ष्य है. इसके बाद जिन परिवारों के घर, पशुधन या अन्य पात्र संपत्तियों को नुकसान हुआ है, उन्हें सरकारी नियमों के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा.
- बाढ़ ने बच्चों की पढ़ाई को भी प्रभावित किया है. शिवसागर में करीब 550 स्कूल बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, जबकि चराइदेव में भी कई स्कूलों को नुकसान पहुंचा है. सरकार ने स्कूलों की सफाई और मरम्मत के लिए 2 से 3 लाख रुपये तक देने की योजना बनाई है. स्कूलों से कीचड़ हटाने और जरूरी मरम्मत के बाद उन्हें दोबारा खोलने की तैयारी है.
- सरकार का लक्ष्य शिवसागर और चराइदेव में स्कूलों को 9 अगस्त से फिर शुरू करने का है. अगर यह संभव नहीं हुआ तो 15 अगस्त तक स्कूल खोलने की कोशिश की जाएगी.
- छात्रों के लिए किताबों का वितरण शुरू हो चुका है. प्रभावित बच्चों को उनकी जरूरत और नुकसान के आकलन के आधार पर 1 हजार, 3 हजार और 5 हजार रुपये तक की सहायता देने की भी योजना है. इसके अलावा मुख्यमंत्री राहत कोष से 8 करोड़ रुपये समग्र शिक्षा अभियान को दिए जाएंगे, जिनका इस्तेमाल स्कूल यूनिफॉर्म के वितरण और खराब हुई यूनिफॉर्म को बदलने में किया जाएगा.
- सरकार के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित परिवारों तक अब तक करीब 23,730 क्विंटल चावल, 4,541 क्विंटल दाल और 1,18,110 लीटर सरसों का तेल पहुंचाया जा चुका है.
- सरकार का कहना है कि फिलहाल प्राथमिकता राहत और पुनर्वास है. इसके बाद सितंबर से सड़कों, तटबंधों और दूसरी सार्वजनिक सुविधाओं की मरम्मत का काम शुरू किया जाएगा. शिवसागर और चराइदेव के लिए अलग-अलग इंफ्रास्ट्रक्चर पैकेज तैयार किए जाएंगे, जिनमें बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कें और तटबंध प्रमुख रूप से शामिल होंगे।
- बाढ़ में कई लोगों की गाड़ियां, पशुधन और दूसरी बीमित संपत्तियां भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। सरकार ने 5 अगस्त को बीमा कंपनियों के साथ बैठक करने का फैसला किया है. इसका उद्देश्य यह है कि पात्र लोगों के बीमा दावों का जल्द निपटारा हो और उन्हें क्लेम लेने में अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े.
सीएम सरमा ने क्या-क्या कहा??
- असम में बाढ़ की वजह को लेकर नागालैंड से भी सवाल उठ रहे हैं. मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि अभी इस मुद्दे पर पड़ोसी राज्य के साथ बातचीत करने का सही समय नहीं है.
- सीएम ने कहा कि नागालैंड खुद भी बाढ़ से प्रभावित है, इसलिए फिलहाल दोनों राज्यों का ध्यान राहत और पुनर्वास पर होना चाहिए. सरकार सितंबर या अक्टूबर में नागालैंड के मुख्यमंत्री के साथ इस मुद्दे पर चर्चा कर सकती है.
- सरमा ने कहा कि तब तक वैज्ञानिक अध्ययन और सैटेलाइट इमेजरी से बाढ़ के कारणों की तस्वीर ज्यादा साफ हो सकती है. इससे भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए समाधान तैयार करने में मदद मिलेगी.
- इससे पहले, असम सरकार ने भारी बारिश को बाढ़ का बड़ा कारण बताया था. हालांकि, IMD ने नागालैंड में दर्ज बारिश को क्लाउडबर्स्ट मानने से इनकार किया था. अब सरकार वैज्ञानिक आकलन के आधार पर आगे की रणनीति बनाने की बात कह रही है.
- बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित दौरे को लेकर भी मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लगातार राज्य के संपर्क में हैं और हर संभव मदद दे रहे हैं.
- हालांकि, सरमा ने कहा कि प्रधानमंत्री के दौरे की तैयारी में प्रशासन को कई दिनों तक अपनी गतिविधियां बदलनी पड़ सकती हैं. इसलिए इस समय राहत कार्य प्रभावित न हों, यह ज्यादा जरूरी है. प्रधानमंत्री अपने दौरे का उचित समय खुद तय करेंगे.
असम में अब अगली चुनौती पुनर्वास की
असम में बाढ़ का पानी कम होने के साथ अब सबसे बड़ी चुनौती लोगों को दोबारा सामान्य जिंदगी में लौटाना है. घरों की मरम्मत, दुकानों को दोबारा शुरू करना, बच्चों की पढ़ाई बहाल करना, कर्ज और बीमा से राहत दिलाना और सड़कों-तटबंधों को ठीक करना सरकार के सामने अगली बड़ी जिम्मेदारियां हैं.
इस बीच नदी कटाव और लगातार बदलते मौसम ने यह साफ कर दिया है कि सिर्फ तत्काल राहत से समस्या का समाधान नहीं होगा. अब सरकार के सामने बाढ़ से प्रभावित इलाकों को लंबे समय के लिए सुरक्षित बनाने और भविष्य में ऐसी आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने की चुनौती भी है.




