Explainer: 'घर में कोई नहीं, सब सड़क पर हैं', असम बाढ़ पीड़ित परिवारों का छलका दर्द, जानिए सरकार से क्या मांग की
असम में बाढ़ का पानी भले ही कई इलाकों से उतर गया हो, लेकिन तबाही अभी खत्म नहीं हुई है. भारतीय सेना ने ऑपरेशन जल राहत के तहत 1,000 से ज्यादा लोगों को बचाया है, जबकि 78 लोगों की मौत हो चुकी है और तीन लाख से अधिक लोग अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं.
असम में बाढ़ का पानी कई इलाकों से जरूर उतरने लगा है, लेकिन उसके पीछे छोड़ी गई तबाही अभी भी लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है. हजारों परिवार अपने घरों से दूर राहत शिविरों और सड़कों के किनारे रहने को मजबूर हैं. खेत बर्बाद हो चुके हैं, मवेशियों का नुकसान हुआ है और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं भी पूरी तरह बहाल नहीं हो पाई हैं.
इसी बीच भारतीय सेना ने राहत और बचाव अभियान को और तेज कर दिया है. ऑपरेशन जल राहत के तहत सेना लगातार नागरिक प्रशासन, NDRF, SDRF और स्थानीय एजेंसियों के साथ मिलकर प्रभावित इलाकों में लोगों तक मदद पहुंचा रही है.
ऑपरेशन जल राहत में सेना की बड़ी भूमिका
भारतीय सेना ने बताया कि उसके जवान प्रभावित इलाकों में लगातार राहत और बचाव कार्य कर रहे हैं. दूर-दराज के गांवों तक पहुंचने के लिए सेना लॉजिस्टिक ड्रोन का भी इस्तेमाल कर रही है, ताकि फंसे हुए लोगों तक दवाइयां, भोजन और जरूरी सामान समय पर पहुंच सके. सेना ने कहा कि वह असम के लोगों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और जरूरतमंदों तक हर संभव सहायता पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है.
अब तक क्या-क्या किया गया?
ऑपरेशन जल राहत शुरू होने के बाद से सेना ने अब तक;
- 1,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला
- 200 से ज्यादा लोगों को मेडिकल सहायता दी
- करीब 19 टन अनाज वितरित किया
- 30,500 से ज्यादा फूड पैकेट बांटे
- 43,000 लीटर पीने का पानी पहुंचाया
- ताजा सब्जियां, दूध, कपड़े, स्वच्छता किट और अन्य जरूरी राहत सामग्री भी प्रभावित परिवारों तक पहुंचाई
16 हजार से ज्यादा लोग अब भी राहत शिविरों में
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, फिलहाल 16,567 लोग राज्य के 101 राहत शिविरों में रह रहे हैं. सबसे ज्यादा प्रभावित जिला शिवसागर है, जहां अकेले 14,586 लोग राहत शिविरों में हैं. इसके अलावा, जोरहाट में 1,080 लोग, चराईदेव में 479 लोग और गोलाघाट में 422 लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं. ऊपरी असम और नागालैंड में हुई भारी बारिश के बाद आई मिट्टी वाली बाढ़ ने इन इलाकों में सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया.
मौत का आंकड़ा बढ़कर 78 पहुंचा
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, बाढ़ से अब तक 78 लोगों की मौत हो चुकी है. हालांकि कई जगहों से पानी उतर गया है, लेकिन तीन लाख से ज्यादा लोग अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं.
खेती और पशुपालन को भारी नुकसान
बाढ़ ने किसानों की कमर तोड़ दी है. 21,500 हेक्टेयर से ज्यादा फसलें अब भी पानी में डूबी हुई हैं, 11 हजार से ज्यादा पशु बह गए... 17 हजार से अधिक मवेशी प्रभावित हुए हैं. खेती और पशुपालन पर निर्भर हजारों परिवारों के सामने अब रोजी-रोटी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है.
मौसम विभाग ने फिर बढ़ाई चिंता
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 30 जुलाई से 1 अगस्त के बीच असम, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश और गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई है. इस चेतावनी के बाद सीमा से लगे जिलों में एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है.
13 हजार घरों में अब भी बिजली नहीं
बाढ़ के लगभग 11 दिन बाद भी असम के हजारों परिवार अंधेरे में रहने को मजबूर हैं. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि प्रशासन लगातार हालात का आकलन कर रहा है और जहां सुरक्षित होगा, वहां बिजली आपूर्ति बहाल की जाएगी. असम पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (APDCL) की रिपोर्ट के अनुसार 12,756 उपभोक्ताओं के घरों में अभी भी बिजली नहीं पहुंची है. सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके हैं,
- गौरिसागर
- शिवसागर
- नाजिरा
- अमगुड़ी
- डेमो
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बताया कि पानी घटने के साथ बिजली बहाली का काम तेज किया जा रहा है और बिना बिजली वाले उपभोक्ताओं की संख्या में लगभग 30 प्रतिशत की कमी आई है. उन्होंने याद दिलाया कि 24 जुलाई को करीब 40,000 घरों में बिजली नहीं थी, हालांकि तब तक 75 प्रतिशत कनेक्शन बहाल किए जा चुके थे.
19 जुलाई से शुरू हुई थी तबाही
19 जुलाई की सुबह नागालैंड और ऊपरी असम में हुई मूसलाधार बारिश ने तीन जिलों में भीषण बाढ़ ला दी थी. आज भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं और प्रभावित परिवारों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हैं.
सड़क ही बन गई घर... जॉयसागर के परिवारों की दर्दभरी कहानी
ऊपरी असम के जॉयसागर में बाढ़ के दस दिन बाद भी सैकड़ों परिवार अपने घर नहीं लौट पाए हैं. कई घर अब भी पानी में डूबे हुए हैं या मोटी मिट्टी और गाद से भर चुके हैं. इसी वजह से लोगों ने सड़क किनारे ही अस्थायी ठिकाने बना लिए हैं. तिरपाल, बांस और प्लास्टिक की मदद से छोटे-छोटे आश्रय तैयार किए गए हैं, जहां परिवार अपने बच्चों और मवेशियों के साथ रह रहे हैं.
"घर में कोई नहीं... सब सड़क पर हैं"
एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा, "हमारे घर में कोई नहीं रह रहा. सब लोग सड़क किनारे रह रहे हैं. गांव के प्रधान और वार्ड सदस्य ने कहा था कि सरकार राहत देगी. कल हमें 10 किलो चावल, दाल और तेल मिला। आज फिर 2 से 2.5 किलो चावल मिला. देश के अलग-अलग हिस्सों से भी लोग मदद करने आ रहे हैं."
महिलाओं के लिए सबसे बड़ी परेशानी
राहत सामग्री मिलने लगी है, लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी बेहद कठिन बनी हुई है. लोगों ने कहा, "सबसे बड़ी समस्या शौचालय की है, खासकर महिलाओं के लिए. अगर सरकार पोर्टेबल टॉयलेट उपलब्ध करा दे तो बड़ी राहत मिलेगी."
मवेशियों के लिए चारा नहीं
बाढ़ से इंसानों के साथ-साथ पशुपालकों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं. एक शख्स ने बताया, "अब तक हमारे पशुओं के लिए चारा नहीं मिला. सिर्फ एक बार भूसा बांटा गया था. हां, कुछ लोगों ने हमारे कुत्तों के लिए खाना जरूर पहुंचाया."
किराएदारों का छलका दर्द
राहत वितरण को लेकर कुछ लोगों ने भेदभाव के आरोप भी लगाए हैं.. एक स्थानीय निवासी का कहना है, "कुछ लोग मदद करते हैं, लेकिन कई जगह किराए के मकानों में रहने वालों को राहत नहीं दी जाती." एक अन्य निवासी ने आरोप लगाया, "हम भी उतने ही परेशान हैं जितने बाकी लोग, लेकिन कई बार स्थानीय लोग राहत सामग्री लेकर कहते हैं कि रिश्तेदारों ने भेजी है. जरूरतमंदों तक हर बार राहत नहीं पहुंच पाती."
घर लौटने का इंतजार
हालांकि कई इलाकों से पानी उतर चुका है, लेकिन जॉयसागर के कई परिवार अब भी अपने घर नहीं लौट सकते. कई मकान अब भी पानी में डूबे हैं, जबकि कई घर मोटी गाद और मिट्टी से भर चुके हैं. लोगों को उम्मीद है कि पानी पूरी तरह उतरने और सफाई होने के बाद ही वे सामान्य जिंदगी की ओर लौट पाएंगे.
नई बारिश ने बढ़ाई चिंता
मौसम विभाग की ताजा चेतावनी ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है. अगर अगले कुछ दिनों में फिर भारी बारिश होती है तो जिन इलाकों में अभी हालात सामान्य होने लगे हैं, वहां दोबारा बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है. ऐसे में हजारों परिवार अभी भी राहत, पुनर्वास और सुरक्षित घर लौटने का इंतजार कर रहे हैं.




