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हिमंता के सामने कांग्रेस की पहली चाल ढेर! कौन हैं बिदिशा नियोग जिनका पर्चा हुआ खारिज, गलती या पूरी रणनीति फेल?

असम चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. जालुकबारी सीट से हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ उतरी बिदिशा नियोग का नामांकन रद्द हो गया. जानिए कौन हैं बिदिशा और कांग्रेस की रणनीति में कहां चूक हुई.

Bidisha Neog Himanta Biswa Sarma Assam Election 2026,
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( Image Source:  Himanta and Bidisha Facebook )

असम चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. चुनाव आयोग ने नामांकन पत्रों की जांच के दौरान हाई प्रोफाइल सीट जालुकबारी से Congress की उम्मीदवार बिदिशा नियोग (Bidisha Neog) का नामांकन रद्द कर दिया. यह वही सीट है, जहां से मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) चुनाव लड़ रहे हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है - क्या कांग्रेस की पहली ही रणनीति फेल हो गई?

कौन हैं बिदिशा नियोग?

बिदिशा नियोग कांग्रेस का अपेक्षाकृत नया चेहरा हैं, जो करीब तीन साल पहले पार्टी में शामिल हुई थीं. जालुकबारी की रहने वाली बिदिशा खुद को “ग्राउंड कनेक्ट” वाली उम्मीदवार के तौर पर पेश कर रही थीं. उन्होंने अपने चुनाव प्रचार में स्थानीय मुद्दों जैसे जमीन अधिग्रहण, शहरीकरण और भ्रष्टाचार को केंद्र में रखा था. खास बात यह रही कि उन्होंने अपने कैंपेन में दिवंगत गायक जुबीन गर्ग (Zubeen Garg) के लिए न्याय को बड़ा मुद्दा बनाया और सीधे मुख्यमंत्री पर वादे पूरे न करने का आरोप लगाया.

EC ने क्यों रद्द किया नामांकन?

चुनाव आयोग ने आधिकारिक तौर पर बिदिशा नियोग के नामांकन रद्द होने की डिटेल जानकारी नहीं दी है. हालांकि, चुनावी प्रक्रिया में आमतौर पर दस्तावेजों में कमी, तकनीकी त्रुटियां, शपथपत्र या कागजी खामियां जैसी वजहों से पर्चा खारिज हो जाता है. इस मामले में भी माना जा रहा है कि कोई प्रक्रियागत गलती कांग्रेस पर भारी पड़ गई.

कांग्रेस के लिए यह बड़ा झटका क्यों?

जालुकबारी असम की सबसे हाई-प्रोफाइल सीटों में से एक है. इस सीट से सीएम हिमंता बिस्वा सरमा 2001 से लगातार चुनाव लड़ते आए हैं. वह इस सीट पर पांच बार चुनाव जीत चुके हैं. यही वजह है कि असम में बीजेपी के लिए यह सीट सबसे ज्यादा सुरक्षित सीट है. 2021 विधानसभा चुनाव में हिमंता ने कांग्रेस प्रत्याशी को 1 लाख से अधिक वोट से चुनावी शिकस्त दी थी.

कांग्रेस यहां पहले ही कमजोर स्थिति में थी. ऐसे में नया चेहरा उतारकर पार्टी “फ्रेश चैलेंज” देना चाहती थी. लेकिन नामांकन रद्द होने से कांग्रेस की यह रणनीति शुरू होने से पहले ही धराशायी हो गई.

क्या सिर्फ बिदिशा ही नहीं, और भी पर्चे हुए खारिज?

इस स्क्रूटनी प्रक्रिया में सिर्फ बिदिशा नियोग ही नहीं, बल्कि कांग्रेस के दो और उम्मीदवारों धकुआखाना से आनंद नराह और हाफलोंग से निर्मल लांगथासा के नामांकन भी रद्द किए गए. असम में अब तक 18 नामांकन पत्र खारिज हो चुके हैं, जिससे यह साफ है कि इस बार स्क्रूटनी बेहद सख्त रही है. हालांकि, हाफलोंग से नंदिता गारलोसा का नामांकन स्वीकार होना कांग्रेस के लिए थोड़ी राहत जरूर है.

असम चुनाव का क्या कहता है?

126 सदस्यीय असम विधानसभा के लिए इस बार 800 से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में हैं और 1300 से अधिक नामांकन दाखिल किए गए हैं. असम में मतदान 9 अप्रैल को होना है. वोट की गिनती 4 मई को होगी. नाम वापसी की अंतिम तारीख 26 मार्च है. यानी अभी चुनावी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हुई है, लेकिन शुरुआती झटकों ने रणनीति पर असर डालना शुरू कर दिया है.

कांग्रेस के गेम प्लान में कहां हुई चूक?

  • इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस की चुनावी तैयारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
  • हाई-प्रोफाइल सीट पर उम्मीदवार चयन तो हुआ, लेकिन कागजी तैयारी कमजोर रही. नामांकन जैसे अहम चरण में चूक ने रणनीति को नुकसान पहुंचाया
  • इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल भी प्रभावित हो सकता है. यानी लड़ाई शुरू होने से पहले ही कांग्रेस को बैकफुट पर आना पड़ा है.
  • जालुकबारी सीट पर बिदिशा नियोग का नामांकन रद्द होना सिर्फ एक तकनीकी मामला नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी है. चुनाव सिर्फ भीड़ और नारों से नहीं, बल्कि रणनीति और तैयारी से जीते जाते हैं.
  • अब देखना होगा कि कांग्रेस इस झटके से कैसे उबरती है, क्योंकि Himanta Biswa Sarma के गढ़ में चुनौती देना पहले ही मुश्किल था, और अब यह और भी कठिन हो गया है.
विधानसभा चुनाव 2026
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