जिसके पास पैसा वही असम कांग्रेस का दावेदार! टिकट के लिए 50,000 की एंट्री फीस, 2 साल पहले खरगे ने किया था फंड क्राइसिस का जिक्र
Assam Election Priyanka Model: असम कांग्रेस में चुनावी टिकट को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है. प्रियंका गांधी के इस फैसले को देश की इतिहास में नई चुनावी परंपरा माना जा रहा है. असम कांग्रेस में अब टिकट का दावेदार वही होगा, जो APCC के नाम 50 हजार रुपये का डीडी जमा करेगा. क्या यह पैसों की कमी का संकेत है या प्रियंका गांधी की नई रणनीति? जानिए, इस फैसले से पार्टी को कितना फायदा और कितना नुकसान हो सकता है
Assam Election Priyanka Model: असम विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस पार्टी में चुनावी टिकट के मसले पर एक नई बहस छिड़ गई है. संगठन को मजबूत करने और ‘गंभीर दावेदारों’ को छांटने के नाम पर पार्टी ने टिकट के लिए 50 हजार रुपये की एंट्री फीस तय कर दी है. APCC के नाम डीडी बनाकर भेजने की अनिवार्यता ने सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या यह कांग्रेस की आर्थिक मजबूरी का नतीजा है या फिर प्रियंका गांधी के नेतृत्व में शुरू की गई कोई नई राजनीतिक परंपरा? टिकट के लिए आवेदन करने की 20 जनवरी 2026 आखिरी तारीख है. इसी के साथ कांग्रेस की इस नई व्यवस्था ने कार्यकर्ताओं से लेकर राजनीतिक विश्लेषकों तक को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि इस ‘प्रियंका मॉडल’ से पार्टी का वास्तव में कितना भला होगा?
कांग्रेस अध्यक्ष ने तंगी का 2 साल पहले किया था जिक्र
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन मल्लिकार्जुन खरगे 14 मार्च 2024 को कहा था कि उनकी पार्टी आर्थिक संकट से जूझ रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि जिन बैंक खातों में दान किया गया पैसा रखा था, उसे बीजेपी सरकार ने फ्रीज करवा दिया है. आयकर विभाग की ओर से कांग्रेस पर जुर्माना लगाया गया है. उन्होंने लोगों से देश में संविधान और लोकतंत्र को 'बचाने' के लिए आगामी लोकसभा चुनावों में मजबूती से खड़े होने और कांग्रेस को जीत दिलाने का आह्वान किया है. साथ ही ये भी कहा था कि मेरे लिए पूरे देश में पार्टी का प्रचार करना भी मुश्किल है. ऐसा इसलिए कि कांग्रेस पार्टी के पास टिकट के लिए पैसा नहीं है. तो क्या, कांग्रेस ने पार्टी की इस हकीकत को स्वीकार कर लिया है. कम से कम असम में प्रियंका गांधी के मॉडल से तो यही लगता है, लेकिन मॉडल अटपटा सा लगता है, क्योंकि आजकल चुनाव तो पैसों के बल पर ही लड़े जाते हैं. ऐसे में रोजगार भर्ती अभियान की तरह 50 हजार डिमांड ड्राफ्ट के रूप में मांगना बेतुका सा लगता है.
किसके कहने पर जारी हुआ आदेश?
कांग्रेस ने असम विधानसभा चुनाव के लिए टिकट चाहने वाले पार्टी सदस्यों से आवेदन के साथ ही 50,000 रुपये जमा करने का निर्देश दिया है. असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) द्वारा जारी सर्कुलर के मुताबिक 5 जनवरी से 20 जनवरी के बीच आवेदन स्वीकार किए जाएंगे और हर आवेदन के साथ APCC के नाम का डिमांड ड्राफ्ट अनिवार्य होगा. पार्टी ने इसे आवेदन शुल्क बताया है, लेकिन बिना इस राशि के कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा.
APCC अध्यक्ष गौरव गोगोई के ने 50 हजार रुपये के डिमांड ड्राफ्ट जमा करने का आदेश जारी है. हालांकि, इस फैसले ने पार्टी के कई जमीनी कार्यकर्ताओं को असहज कर दिया है. यहां पर इस बात को जिक्र कर दें कि असम में कुल 126 विधानसभा सीटें हैं. टिकट के लिए मुकाबला पहले से ही कड़ा माना जा रहा है. ऐसे में सभी वर्गों के लिए समान रूप से 50,000 रुपये की फीस तय किए जाने को लेकर अंदरखाने नाराजगी देखी जा रही है.
खास बात यह है कि अन्य राज्यों में कांग्रेस ने अलग-अलग श्रेणियों के लिए अलग शुल्क तय किया था. आंध्र प्रदेश में लोकसभा चुनाव के दौरान आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों से ₹15,000 और अन्य से ₹25,000 लिए गए थे, जबकि विधानसभा टिकट के लिए यह राशि और कम थी. हरियाणा में भी सामान्य वर्ग के लिए ₹20,000 और SC, BC व महिला उम्मीदवारों के लिए ₹5,000 फीस तय की गई थी. इसके मुकाबले असम में सीधे ₹50,000 की फ्लैट फीस को कई लोग असामान्य मान रहे हैं.
APCC ने यह भी कहा है कि यदि कोई विधानसभा सीट गठबंधन सहयोगी को दी जाती है, तो उस सीट के लिए जमा की गई आवेदन फीस वापस कर दी जाएगी. हालांकि, सर्कुलर में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह राशि कब और किस प्रक्रिया के तहत लौटाई जाएगी. यही अस्पष्टता पार्टी के भीतर असंतोष की एक वजह मानी जा रही है.
टिकट के दावेदारों को आवेदन के साथ निर्धारित फॉर्म, एक अंडरटेकिंग और वोटर लिस्ट की प्रमाणित प्रति भी जमा करनी होगी. APCC मुख्यालय में आवेदन जमा करने के बाद उम्मीदवारों को उसी आवेदन और डिमांड ड्राफ्ट की फोटोकॉपी अपने संबंधित जिला और ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्षों को भी देनी होगी.
इसी बीच कांग्रेस ने चुनाव आयोग और बीजेपी पर मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए सड़कों पर प्रदर्शन भी शुरू कर दिया है. 6 जनवरी को दिसपुर में असम प्रदेश महिला कांग्रेस और असम प्रदेश यूथ कांग्रेस के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट गंभीर खामियों से भरी है और इसे जानबूझकर इस तरह तैयार किया गया है ताकि 2026 के विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी पार्टी को फायदा मिल सके. कांग्रेस नेताओं ने इसे खुलकर “वोट चोरी” करार दिया है.
पार्टी हाईकमान ने भी संकेत दे दिया है कि असम चुनाव को लेकर वह पूरी तरह सतर्क है. कांग्रेस ने असम सहित कई चुनावी राज्यों के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है. असम के लिए पूर्व छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और वरिष्ठ नेता बंधु तिर्की को पर्यवेक्षक बनाया गया है. इन नेताओं को संगठनात्मक तैयारियों, चुनावी रणनीति और राज्य इकाई के साथ समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
प्रियंका के हाथ में कमान
टिकट वितरण की प्रक्रिया को भी सीधे केंद्रीय नेतृत्व की निगरानी में लाया गया है. प्रियंका गांधी वाड्रा को टिकट स्क्रीनिंग की अहम जिम्मेदारी दी गई है. उनके साथ स्क्रीनिंग कमेटी में सप्तगिरी शंकर उलाका, इमरान मसूद और सिरीवेल्ला प्रसाद शामिल हैं. पार्टी का कहना है कि उम्मीदवारों के चयन में इस बार जमीनी काम, संगठन के प्रति निष्ठा और चुनाव जीतने की क्षमता को प्राथमिकता दी जाएगी.
कुल मिलाकर, असम में कांग्रेस एक साथ कई मोर्चों पर सक्रिय नजर आ रही है. एक तरफ वह संगठन को मजबूत करने और केंद्रीय स्तर पर निगरानी बढ़ाने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर टिकट के लिए तय की गई फीस और मतदाता सूची को लेकर उठे सवाल पार्टी के लिए नई चुनौतियां भी खड़ी कर रहे हैं. 2026 का असम विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए न सिर्फ सत्ता की लड़ाई है, बल्कि यह उसकी संगठनात्मक रणनीति और जमीनी जुड़ाव की भी बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है.





