असम विधानसभा में ममता बनर्जी की गूंज, TMC के इकलौते विधायक शेरमान अली ने लगाए 'ममता दीदी जिंदाबाद' के नारे
असम विधानसभा के शपथ ग्रहण समारोह में TMC विधायक शेरमन अली अहमद के ‘ममता दीदी जिंदाबाद’ नारों ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया. भाजपा विधायकों ने इसे सदन की मर्यादा के खिलाफ बताया, जबकि अहमद ने ममता बनर्जी के प्रति आभार जताया.
असम विधानसभा के 16वें सत्र के पहले दिन गुरुवार, 21 मई को एक अनोखी राजनीतिक घटना देखने को मिली. जहां पूरे राज्य के 126 नवनिर्वाचित विधायकों ने शपथ ग्रहण करने के लिए विधानसभा पहुंचे थे, वहीं वहां तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के एकमात्र विधायक ने शपथ लेने के तुरंत बाद अपनी नेता ममता बनर्जी के समर्थन में जोर-जोर से नारे लगाने शुरू कर दिए. सभी विधायक कार्यवाहक अध्यक्ष चंद्र मोहन पटवारी और विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों की देखरेख में शपथ ले रहे थे.
मांडिया विधानसभा क्षेत्र से चुने गए शेरमन अली अहमद ने शपथ ग्रहण की प्रक्रिया पूरी की ही थी कि उन्होंने अचानक 'ममता दीदी जिंदाबाद' के नारे लगाने शुरू कर दिए. इस नारे को सुनकर विधानसभा के अंदर मौजूद कई विधायकों के चेहरे पर हैरानी और मुस्कान छा गई. कई सदस्य हंस पड़े और इस घटना पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देने लगे. सत्ताधारी भाजपा के विधायक भी इस मंजर को देखकर हैरान नजर आए.
शेरमन अली अहमद कौन हैं?
शेरमन अली अहमद असम के अनुभवी नेता है. वह 3 बार विधायक रह चुके है. साल 2021 में कांग्रेस ने उन्हें दल-विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित कर दिया था. इसके बाद फरवरी महीने उन्होंने रायजोर दल में शामिल होकर मांडिया सीट से उपाध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवारी भी दर्ज कराई थी. लेकिन जब कांग्रेस और रायजोर दल सीट बंटवारे समझौता हुआ तो टिकट नहीं मिला सका. अंत में चुनाव में महज कुछ दिन पहले 21 मार्च को उन्होंने तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने का फैसला लिया. ममता बनर्जी की पार्टी ने उन्हें मांडिया से टिकट दिया और वे जीतकर विधानसभा पहुंचे.
विधानसभा के बाहर क्या कहा?
शपथ ग्रहण समारोह के बाद शेरमन अली अहमद विधानसभा के बाहर खड़े पत्रकरों से बात कर रहे थे, उन्होंने अपने नारों का पूरा बचाव किया. उन्होंने कहा कि वे ममता बनर्जी (ममता दीदी) की बहुत आभारी हैं. उन्होंने बताया, 'चुनाव से ठीक पहले का वो समय बहुत मुश्किल भरा था. कई राजनीतिक दल मुझसे दूरी बना रहे थे, लेकिन ममता दीदी ने मुझे पार्टी का टिकट देकर राजनीतिक सहारा दिया. अहमद ने आगे कहा, 'पिछले 15 सालों में जब मैं विधायक रहा, तब मुझे कभी इतना प्रोत्साहन और सम्मान नहीं मिला जितना ममता दीदी ने दिया. आज मैं असम में तृणमूल कांग्रेस का इकलौता विधायक हूं, लेकिन मैं पूरी उम्मीद करता हूं कि पार्टी राज्य में और भी मजबूत होगी.'
टीएमसी की आगे की योजना
शेरमन अली अहमद ने यह भी बताया कि तृणमूल कांग्रेस अब असम में सक्रिय रूप से काम करने जा रही है. उन्होंने खासतौर पर नागांव लोकसभा उपचुनाव का जिक्र करते हुए कहा, 'हम नागांव के लिए गंभीर तैयारी कर रहे है. पार्टी जल्द ही एक मजबूत और सक्षम नेता को चुनाव लड़ने के लिए उतारेगी.'
भाजपा विधायकों की तीखी प्रतिक्रिया
इस घटना पर भाजपा विधायकों ने नाराजगी जताई. थोवरा क्षेत्र से भाजपा विधायक सुशांत बोरगोहेन ने कहा, 'ममता बनर्जी उनके पार्टी की नेता हैं, इसमें कोई शक नहीं. लेकिन शपथ ग्रहण समारोह के दौरान विधानसभा के अंदर इस तरह नारे लगाना उचित नहीं था.' लखीमपुर से भाजपा विधायक मानब डेका ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'शेरमन अली अहमद का मांडिया में अपना मजबूत व्यक्तिगत आधार है. अगर वे स्वतंत्र रूप से भी चुनाव लड़ते तो शायद जीत जाते. ममता बनर्जी की असम में ज्यादा राजनीतिक पहचान नहीं है. शायद चुनाव के दौरान मिली मदद की वजह से उन्हें याद आ गई.'




