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Assam Chunav 2026 : डर-आस्था और कहानियों का हकीकत से मेल, असम में सिर्फ वोटिंग के गणित से नहीं जीता जाता चुनाव

Assam में चुनावी नतीजे सिर्फ वोट प्रतिशत से तय नहीं होते। जानिए कैसे वोटर का मन, डर, पहचान और जमीनी मुद्दे मिलकर परिणाम तय करते हैं. समझें पूरा गणित.

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असम विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी दलों के बीच प्रचार चरम पर पहुंच गया है. यहां के चुनाव सिर्फ वोटिंग का गणित नहीं हैं, बल्कि यहां 'कहानियां', 'डर' और 'जमीनी हकीकत' एक साथ काम करती हैं. यही वजह है कि कई घटनाएं ऐसी हैं जो लोककथा जैसी लगती हैं, लेकिन उनकी जड़ें पूरी तरह सच्चाई में होती हैं. आइए, पांच सवाल और उसके जवाबों के जरिए जानें इसकी पूरी कहानी.

1. क्या Assam Movement सिर्फ आंदोलन था या चुनावी डर की कहानी भी?

साल 1979 से 1985 के बीच चला असम आंदोलन विदेशी घुसपैठ के खिलाफ था, लेकिन यह सिर्फ राजनीतिक आंदोलन नहीं रहा. उस समय गांव-गांव में यह धारणा फैल गई थी कि हम एकजुट नहीं हुए तो “हमारी पहचान खत्म हो जाएगी”? यही 'डर' धीरे-धीरे लोककथा बन गया. चुनावों में इसका असर इतना गहरा था कि कई जगह लोगों ने वोट ही नहीं डाला. क्या यह सच नहीं कि “जो हमारी पहचान बचाएगा, उसी को वोट” जैसी सोच आज भी चुनावी माहौल में जिंदा है, भले हालात बदल गए हों? उसी सोच का नतीजा था कि दो महीने की पार्टी असम गण परिषद 1985 में प्रफुल्ल कुमार महंता के नेतृत्व में सरकार बनाने में सफल हुई, वो भी अपने दम पर.

इस चुनाव में 32 साल का युवा सीएम बना, जो अब तक का रिकॉर्ड है. पहचान के नाम पर एजीपी की सरकार दूसरी बार भी बनी. पिछले दो बार बीजेपी ने भी असमिया पहचान को ही मुख्य मुद्दा बनाया था. इस बार भी हेमंत बिस्वा सरमा उसी को ढाल बनाकर दूसरी बार सीएम बनना चाहते हैं.

2. क्या Kamakhya Temple की पूजा सच में चुनावी जीत तय करती है?

हर चुनाव से पहले बड़े नेताओं का कामाख्या मंदिर जाना आम बात है, लेकिन क्या सिर्फ दर्शन ही होते हैं? मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय चर्चाओं में “विशेष पूजा” की बातें भी सामने आई हैं. क्या यही वजह है कि लोगों में यह धारणा बन गई कि “जो कामाख्या का आशीर्वाद ले ले, उसकी जीत तय है”? क्या यह सिर्फ आस्था है या चुनावी रणनीति का हिस्सा? सच चाहे जो हो, लेकिन यह कहानी हर चुनाव में फिर से जीवित हो जाती है. इस बार भी सियासी दलों के प्रत्याशी कामाख्या मंदिर आशीर्वाद लेने पहुंचने लगे हैं.

3. क्या Anwara Taimur की जीत वाकई 'किस्मत बदलने' की मिसाल थी?

साल 1980 में अनवारा तैमूर का मुख्यमंत्री बनना एक ऐतिहासिक घटना थी. वह, असम की पहली महिला और भारत की पहली मुस्लिम महिला मुख्यमंत्री बनीं. लेकिन क्या यह सिर्फ एक राजनीतिक जीत थी? उस समय गांवों में यह बात फैल गई कि 'जब वक्त बदलता है, तो कोई भी ऊपर आ सकता है.' क्या यह घटना आज भी लोगों के मन में 'किस्मत और बदलाव' की लोककथा के रूप में नहीं बसती? हिमंता बिस्वा सरमा कांग्रेस के मैनेजर माने जाते थे. बीजेपी में आते ही सीएम बन गए और इस बार फिर यह चर्चा है कि वो किस्मत के धनी हैं, कुछ भी हो सकता है.

4. क्या Bharatiya Janata Party की जीत ‘लहर’ थी या ठोस रणनीति?

साल 2016 और 2021 के असम चुनावों में बीजेपी की जीत को लेकर क्या यह नहीं कहा गया कि “इस बार हवा चल रही है” या “ऊपर से फैसला हो चुका है”? लेकिन क्या हकीकत इससे अलग नहीं थी? मजबूत संगठन, सही गठबंधन (AGP और बोडो दल) और सटीक वोट बैंक मैनेजमेंटण, यही असली कारण नहीं थे? यानी क्या “लहर” की कहानी सिर्फ एक धारणा थी, जिसके पीछे ठोस राजनीतिक गणित भी छिपा था?

5. क्या AIUDF सिर्फ खास समुदाय की पार्टी है या इससे ज्यादा कुछ?

Lower Assam में AIUDF को लेकर अक्सर यह कहा जाता है कि “फलां सीट पर तो एक ही समुदाय जीत तय करता है” या “वोट पहले से बंट चुका है.” लेकिन क्या जमीनी हकीकत इतनी सरल है? क्या उम्मीदवार की छवि, स्थानीय मुद्दे और गठबंधन उतनी ही अहम भूमिका नहीं निभाते? कई सीटों पर नतीजे इस धारणा को तोड़ते भी हैं. तो क्या यह कहना गलत होगा कि “लोककथा” और “हकीकत” यहां अक्सर टकराती हैं?

इन घटनाओं का मतलब क्या है?

क्या असम के चुनाव सिर्फ आंकड़ों से तय होते हैं? या फिर तीन परतें एक साथ काम करती हैं. इनमें हकीकत (जाति, धर्म, गठबंधन), धारणा (“लहर चल रही है”, “सीट फिक्स है”) और लोककथा (तंत्र-मंत्र, आशीर्वाद, किस्मत) शामिल नहीं हैं? क्या यही वजह नहीं कि यहां की हर चुनावी कहानी आधी सच्चाई और आधी भावनाओं में पर बेस्ड लगती है?

दरअसल, असम के चुनावों में जो कहानियां सुनाई देती हैं, क्या वे पूरी तरह झूठ होती हैं? शायद नहीं. वे हकीकत, भावनाओं और अफवाहों का ऐसा मिश्रण होती हैं, जो चुनाव को सिर्फ राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कहानी बना देता है. और शायद यही कारण है कि असम के चुनाव भारत के सबसे जटिल और दिलचस्प चुनावों में गिने जाते हैं.

विधानसभा चुनाव 2026
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