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1,758 बैंक अकाउंट, 23 क्रिप्टो वॉलेट और चीन कनेक्शन...कैसे खुला ₹1,071 करोड़ के साइबर फ्रॉड का राज? असम में पकड़ा गया मास्टरमाइंड

1,071 करोड़ रुपये के कथित साइबर फ्रॉड का बड़ा नेटवर्क सामने आया है. 1,758 बैंक अकाउंट, 23 क्रिप्टो वॉलेट और चीन कनेक्शन की जांच के बीच गुजरात CID ने असम से 25 साल के रफीकुल आलम को गिरफ्तार किया है.

1,758 बैंक अकाउंट, 23 क्रिप्टो वॉलेट और चीन कनेक्शन...कैसे खुला ₹1,071 करोड़ के साइबर फ्रॉड का राज? असम में पकड़ा गया मास्टरमाइंड
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गुजरात CID ने असम से 25 साल के एक युवक को गिरफ्तार किया है. आरोपी की पहचान रफीकुल आलम के रूप में हुई है. CID का आरोप है कि आलम ने पूरे भारत में 1,090 साइबर अपराध के मामलों में 1,071.5 करोड़ रुपये की रकम से जुड़े नेटवर्क को चलाने में अहम भूमिका निभाई और उसके चीन में बैठे साइबर अपराधियों से भी संबंध थे.

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, गुजरात CID की साइबर सेल ने अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क की जांच के दौरान तकनीकी जानकारी जुटाई. इसके बाद असम के बरपेटा में कार्रवाई कर रफीकुल आलम को गिरफ्तार किया गया.

क्या था आरोपी का काम?

जांचकर्ताओं के अनुसार, आलम कथित तौर पर साइबर फ्रॉड से हासिल रकम को अलग-अलग बैंक खातों में भेजने का काम करता था. इसमें 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे साइबर ठगी के मामले भी शामिल थे. इसके बाद इस रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाता था और चीन भेजे जाने का आरोप है.

गांधीनगर स्थित साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CCE) के मुताबिक, आलम ने कथित तौर पर पूरे भारत में 1,754 बैंक खातों के जरिए ठगी की रकम को ट्रांसफर किया. बड़ी रकम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर अलग-अलग खातों में भेजा जाता था, ताकि एजेंसियों की नजर से बचा जा सके.

कैसे घटना को अंजाम देता था आरोपी?

CCE ने ANI को बताया, “आरोपी को डिजिटल अरेस्ट या साइबर फ्रॉड के जरिए मिली रकम को एक घंटे के भीतर पूरे भारत में 1,754 बैंक खातों में बांटकर ट्रांसफर किया जाता था. बड़ी रकम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटने का मकसद वित्तीय निगरानी एजेंसियों की नजर से बचना था.”

पुलिस की जांच में कितने खातों का पता लगा?

पुलिस ने अलग से बताया कि जांच के दौरान इस पैसों के लेनदेन का संबंध 1,758 बैंक खातों से सामने आया है. यानी जांच में बड़ी संख्या में बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर अपराध से जुड़ी रकम को इधर-उधर भेजने के लिए किए जाने की बात सामने आई है.

चीन में बैठे अपराधियों से कैसे करता था WhatsApp और Telegram पर संपर्क?

जांच एजेंसियों के मुताबिक, रफीकुल आलम कथित तौर पर चीन में बैठे साइबर अपराधियों के संपर्क में था. दोनों के बीच WhatsApp और Telegram के जरिए बातचीत होती थी. इन प्लेटफॉर्म के जरिए वित्तीय जानकारी और साइबर अपराध से जुड़ी दूसरी महत्वपूर्ण जानकारियों का आदान-प्रदान किए जाने का आरोप है.

CCE के अनुसार, “आरोपी WhatsApp और Telegram के जरिए चीनी अपराधियों के साथ सीधे वित्तीय जानकारी (स्कैनर, यूजर आईडी, पासवर्ड, क्रिप्टो वॉलेट, अपराध का तरीका आदि) साझा करता था.”

मोबाइल से मिले 23 क्रिप्टो वॉलेट...

जांच के दौरान आलम के मोबाइल फोन से 23 क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट मिलने की बात सामने आई है. CCE के मुताबिक, इन क्रिप्टो वॉलेट के जरिए करीब 16 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ था. जांच एजेंसी का कहना है कि इन लेनदेन से क्रिप्टोकरेंसी और चीन में सक्रिय एक गैंग के बीच कथित संबंध का पता चला. जांचकर्ताओं ने ‘चिप सेलर’ नाम के ऐप के जरिए कथित तौर पर अवैध क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग किए जाने की भी जानकारी दी है.

तीन दिन तक घर की रेकी, फिर हुई गिरफ्तारी

CCE के मुताबिक, तकनीकी जांच और पीड़ितों के बयानों के आधार पर जांच की एक टीम असम के बरपेटा शहर पहुंची. टीम ने मुख्य मनी लॉन्ड्रर बताए जा रहे व्यक्ति के घर की तीन दिनों तक गुप्त तरीके से रेकी की. इसके बाद टीम ने कार्रवाई करते हुए रफीकुल आलम को गिरफ्तार कर लिया. उसके पास से तकनीकी उपकरण भी बरामद किए गए.

जांच एजेंसी के मुताबिक, पूरे मामले में साइबर ठगी की रकम को कई बैंक खातों में बांटने, उसे क्रिप्टोकरेंसी में बदलने और चीन स्थित अपराधियों तक पहुंचाने के कथित नेटवर्क की जांच की जा रही है.

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