3 मैच, 42 रन! इंग्लैंड के खिलाफ फ्लॉप हुए वैभव सूर्यवंशी क्या अब भी बन सकते हैं फ्यूचर के सुपरस्टार? जानिए क्या बोले एक्सपर्ट्स
इंग्लैंड दौरे पर 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी अभी तक बड़ी पारी नहीं खेल पाए हैं, लेकिन इसे उनके करियर का अंत नहीं बल्कि सीखने का दौर माना जा रहा है. कठिन इंग्लिश परिस्थितियों में मिली शुरुआती नाकामी उन्हें भविष्य में और बेहतर बल्लेबाज बना सकती है.
Vaibhav Sooryavanshi
Vaibhav Sooryavanshi's England Struggles: भारतीय क्रिकेट में 15 साल के वैभव सूर्यवंशी को लेकर पिछले कुछ महीनों में जबरदस्त चर्चा रही है. आईपीएल में विस्फोटक बल्लेबाजी के बाद उनसे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी उसी तरह के प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन इंग्लैंड दौरे पर अब तक उनकी तीन पारियां उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहीं. उन्होंने क्रमशः 14, 13 और 15 रन बनाए हैं. इस तरह 3 मैचों में उनके नाम 42 रन है.
हालांकि, क्रिकेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि सिर्फ तीन पारियों के आधार पर वैभव को आंकना जल्दबाजी होगी. इंग्लैंड की परिस्थितियां दुनिया की सबसे कठिन बल्लेबाजी परिस्थितियों में गिनी जाती हैं. यहां अनुभवी भारतीय बल्लेबाज भी अक्सर संघर्ष करते रहे हैं. ऐसे में महज 15 साल के खिलाड़ी से तुरंत बड़े प्रदर्शन की उम्मीद करना सही नहीं माना जा सकता.
शॉर्ट बॉल क्या वैभव की कमजोरी बन गई है?
वैभव ने अपनी पहचान आईपीएल में बनाई, जहां पिचें बल्लेबाजों के अनुकूल होती हैं और रन बनाना अपेक्षाकृत आसान रहता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, खासकर इंग्लैंड की तेज और स्विंग लेती पिचों पर बल्लेबाजी बिल्कुल अलग चुनौती है. यही कारण है कि उन्हें अपने खेल में कई बदलाव करने होंगे. इस दौरे में उनकी कमजोरी शॉर्ट बॉल के खिलाफ भी सामने आई है. राजस्थान रॉयल्स के उनके साथी जोफ्रा आर्चर ने दो बार उन्हें बाउंसर पर आउट किया.
इससे पहले श्रीलंका में खेली गई त्रिकोणीय सीरीज में भी वैभव की इस कमजोरी की चर्चा हुई थी. विशेषज्ञों का मानना है कि उन्हें हर छोटी गेंद पर बड़ा शॉट खेलने की बजाय धैर्य दिखाना होगा और परिस्थितियों के हिसाब से बल्लेबाजी करनी होगी.
क्या कहता है इतिहास?
क्रिकेट इतिहास बताता है कि कई महान खिलाड़ियों की शुरुआत भी साधारण रही है. सचिन तेंदुलकर भी अपने शुरुआती वनडे मैचों में लगातार दो बार शून्य पर आउट हुए थे. इसके बावजूद उन्होंने आगे चलकर विश्व क्रिकेट में नए कीर्तिमान बनाए. ऐसे में वैभव की शुरुआती नाकामी को उनके करियर का पैमाना नहीं माना जा सकता.
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि कठिन दौर किसी भी युवा खिलाड़ी को मानसिक रूप से मजबूत बनाता है. इस दौरे से वैभव को अपनी कमियों को समझने और उन पर काम करने का मौका मिलेगा। इससे उन्हें यह एहसास भी होगा कि आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के स्तर में कितना बड़ा अंतर है.
टीम चयन को लेकर क्यों उठ रहे सवाल?
हालांकि टीम चयन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. कुछ क्रिकेट जानकारों का मानना है कि हाल ही में भारत को टी20 विश्व कप जिताने में अहम भूमिका निभाने वाले संजू सैमसन को बाहर करना सही फैसला नहीं था. उनका कहना है कि वैभव को लेकर बने माहौल और बाहरी दबाव का असर चयन पर पड़ा. अब शुरुआती नाकामी के बाद उम्मीद है कि टीम प्रबंधन भविष्य में खिलाड़ियों को तैयार करने की प्रक्रिया पर ज्यादा ध्यान देगा.
कुल मिलाकर, वैभव सूर्यवंशी के लिए यह दौरा एक परीक्षा जरूर है, लेकिन यही अनुभव उन्हें आने वाले वर्षों में एक बेहतर और परिपक्व बल्लेबाज बनाने की दिशा में सबसे बड़ी सीख भी साबित हो सकता है.




