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नरोत्तम मिश्रा को टिकट न मिलने के बाद गाली गलौज का AUDIO आया सामने, दतिया में मचा बवाल; जिलाध्यक्ष समेत कई नेताओं ने दिया इस्तीफा

दतिया उपचुनाव में भाजपा द्वारा डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पार्टी में खुली बगावत सामने आ गई. कथित गाली-गलौज वाला एक ऑडियो वायरल होने से विवाद और गहरा गया. नरोत्तम समर्थकों ने हाईवे जाम कर प्रदर्शन किया.

नरोत्तम मिश्रा को टिकट न मिलने के बाद गाली गलौज का AUDIO आया सामने, दतिया में मचा बवाल; जिलाध्यक्ष समेत कई नेताओं ने दिया इस्तीफा
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सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी8 Mins Read

Published on: 10 July 2026 11:10 PM

मध्य प्रदेश की राजनीति में दतिया विधानसभा उपचुनाव ने ऐसा भूचाल ला दिया है, जिसकी गूंज भोपाल से लेकर दिल्ली तक सुनाई दे रही है. भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व गृह मंत्री और पार्टी के सबसे चर्चित चेहरों में शामिल डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट न देकर नया चेहरा आशुतोष तिवारी मैदान में उतार दिया. टिकट की घोषणा होते ही दतिया में ऐसा सियासी बवाल मचा कि बीजेपी के अपने ही कार्यकर्ता पार्टी के खिलाफ सड़क पर उतर आए. इसी के साथ उनका सोशल मीडिया पर एक कथित वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें उन्हें गली गलौज करते हुए सुना जा सकता है और इसी के साथ दतिया में बवाल शुरू हो रखा है.

हाईवे जाम हुआ, टायर जलाए गए, बाजार बंद कराने की कोशिश हुई, पार्टी कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन हुआ और सबसे बड़ा झटका तब लगा जब भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर कुशवाह (रघुवीर सरण के नाम से भी चर्चित) सहित जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारियों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया. कई पार्षदों ने भी अपने पद छोड़ दिए. उपचुनाव से पहले यह बीजेपी के लिए सबसे बड़ा संगठनात्मक संकट माना जा रहा है.

नरोत्तम मिश्रा के ऑडियो में क्या?

टिकट न मिलने के बाद नरोत्तम मिश्रा का Audio सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें उनसे ऋषि नाम एक भाजपा कार्यकर्ता बात करता है जिसमें वह कहता है कि दादा प्रणाम, वो पिस्टल वाला लाइसेंस कर देते, इसके जवाब में नरोत्तम मिश्रा कहते हैं कि ठीक है कर देंगे लेकिन आदमी मारना पड़ेगा. शर्म नहीं आ रही बहन के लौ*#, ऑफिस बंद हैं, बाजार बंद हैं, लोग मर रहे हैं। कभी ढंग की बात नहीं की तूने जिंदगी में, कब कौन सी बात करनी चाहिए ये तुझे समझ में नहीं आता क्या? क्या करेगा अगर बनवा दिया तो- ऋषि का जवाब- शादी में जाना है, नरोत्तम मिश्रा ने आगे कहा कि बस शादी में जाना है रिवॉल्वर टांग के, लुगाई और सालियों को जलवा देना है. इससे आगे कुछ काम है क्या बता चु#या कहीं के.

टिकट का सबसे बड़ा दावेदार थे नरोत्तम

दतिया सीट खाली होने के बाद से ही माना जा रहा था कि भाजपा एक बार फिर अपने कद्दावर नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा पर दांव लगाएगी. पार्टी के अंदर भी यही चर्चा थी कि उनका नाम लगभग तय है. बताया जाता है कि उन्होंने नामांकन की तैयारियां भी शुरू कर दी थी. लेकिन उम्मीदवारों की सूची जारी होते ही पूरी तस्वीर बदल गई. भाजपा ने संगठन से जुड़े नेता और पूर्व मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड अध्यक्ष आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित कर सभी राजनीतिक अटकलों पर विराम लगा दिया. यह फैसला न सिर्फ नरोत्तम समर्थकों के लिए झटका था, बल्कि स्थानीय संगठन के एक बड़े वर्ग को भी स्वीकार नहीं हुआ.

टिकट कटते ही सड़क पर फूटा गुस्सा

घोषणा के कुछ ही घंटों बाद दतिया का माहौल पूरी तरह बदल गया. भारी संख्या में कार्यकर्ता भाजपा जिला कार्यालय पहुंच गए. प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गई. आशुतोष तिवारी और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के विरोध में भी जमकर नारे लगे. इसके बाद प्रदर्शनकारी हाईवे पर पहुंच गए और सड़क जाम कर दी. कई जगह टायर जलाए गए. शहर के प्रमुख बाजारों में घूम-घूमकर दुकानें बंद कराने की कोशिश की गई. टाउन हॉल, बड़ा बाजार और किला चौक जैसे इलाकों में कई व्यापारियों ने दुकानें बंद कर दीं. कुछ समय के लिए शहर की सामान्य गतिविधियां भी प्रभावित रहीं.

बीजेपी संगठन में सबसे बड़ी बगावत, जिलाध्यक्ष समेत पूरी टीम ने छोड़े पद

सिर्फ कार्यकर्ताओं का विरोध ही नहीं हुआ, बल्कि संगठन के भीतर भी बड़ा विस्फोट हो गया. भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर कुशवाह सहित जिला कार्यकारिणी के कई पदाधिकारियों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया. कई पार्षदों ने भी अपने पद छोड़ दिए. जिलाध्यक्ष ने कहा कि टिकट वितरण का फैसला एकतरफा लिया गया है. उन्होंने दावा किया कि हजारों कार्यकर्ताओं ने बूथ स्तर तक मेहनत की थी, लेकिन उनकी भावनाओं की अनदेखी की गई. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले किसी भी जिले में इस तरह का संगठनात्मक विद्रोह भाजपा के लिए बड़ा नुकसान साबित हो सकता है.


नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के चार कारण

बीजेपी ने आधिकारिक तौर पर टिकट बदलने का कारण नहीं बताया है, लेकिन पार्टी सूत्र कई अहम वजहों की ओर इशारा कर रहे हैं.

1. 2023 की हार का असर

2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र भारती ने नरोत्तम मिश्रा को लगभग 7,500 वोटों से हराया था. यह हार भाजपा नेतृत्व के लिए बड़ा झटका मानी गई थी.

2. गोपनीय सर्वे रिपोर्ट

सूत्रों के मुताबिक सीट खाली होने के बाद भाजपा की केंद्रीय टीम लगातार दतिया में फीडबैक जुटा रही थी. सर्वे में नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ एंटी-इंकंबेंसी और स्थानीय नाराजगी सामने आई. बताया जाता है कि इसी रिपोर्ट के बाद पार्टी ने उम्मीदवार बदलने का फैसला किया.

3. नई और बेदाग छवि की तलाश

भाजपा इस बार ऐसा उम्मीदवार चाहती थी, जिसकी छवि साफ-सुथरी हो और जिस पर कांग्रेस व्यक्तिगत हमले न कर सके. दतिया ब्राह्मण बहुल सीट मानी जाती है. ऐसे में पार्टी ने ब्राह्मण समाज से जुड़े नए चेहरे आशुतोष तिवारी पर दांव लगाया.

4. संघ की भूमिका भी चर्चा में

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और प्रदेश संगठन नरोत्तम मिश्रा के नाम पर पूरी तरह सहमत नहीं थे. हालांकि इस पर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.

कौन हैं आशुतोष तिवारी?

आशुतोष तिवारी दतिया जिले के सेवढ़ा क्षेत्र से जुड़े पुराने भाजपा कार्यकर्ता हैं. छात्र जीवन से ही उनका जुड़ाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से रहा है. उन्होंने संगठन में लंबे समय तक विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं. वे मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. यह उनका पहला विधानसभा चुनाव होगा.

उपचुनाव क्यों हो रहा है?

दतिया सीट पर 2023 में कांग्रेस के राजेंद्र भारती जीते थे. लेकिन इस साल अप्रैल में दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में तीन साल की सजा सुनाई. इसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई और सीट रिक्त घोषित कर दी गई. हालांकि उन्हें जमानत मिल चुकी है, लेकिन उपचुनाव कराना जरूरी हो गया.

कब होगा चुनाव?

निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार-

  • मतदान: 30 जुलाई
  • मतगणना: 3 अगस्त

दतिया के साथ बिहार और गुजरात की दो अन्य विधानसभा सीटों पर भी उपचुनाव होंगे.

अब सबसे बड़ा सवाल... क्या संभल पाएगी बीजेपी?

दतिया में भाजपा के सामने अब चुनौती सिर्फ कांग्रेस नहीं, बल्कि अपने ही नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने की भी है. यदि संगठन की नाराजगी जल्द खत्म नहीं हुई तो उपचुनाव में इसका सीधा असर मतदान पर पड़ सकता है. दूसरी ओर, यदि पार्टी बागी नेताओं और कार्यकर्ताओं को मना लेती है तो आशुतोष तिवारी के लिए मुकाबला आसान हो सकता है. फिलहाल इतना तय है कि दतिया का यह उपचुनाव सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि भाजपा के भीतर नेतृत्व, संगठन और स्थानीय राजनीति की अग्निपरीक्षा बन चुका है.

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